*भूविस्थापित ग्रामीण करेंगे 20 मई को एसडीएम कार्यालय कटघोरा का घेराव* 

✍️ भागीरथी यादव

 

 *तहसील कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार से भुविस्थापित परेशान* 

 

एसईसीएल के द्वारा कोयला उत्खनन हेतु विभिन्न ग्रामों का अधिग्रहण किया जा रहा है । जिसके लिए भूविस्थापितों को अपने रोजगार ,मुआवजा , पुनर्वास संबंधी कार्यों जैसे वंश वृक्ष, रोजगार सत्यापन , त्रुटि सुधार , फौती, ऑनलाइन रिकॉर्ड सुधार, राजस्व त्रुटि सुधार एवं अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए तहसील दीपका, दर्री , कटघोरा एवं जिला कार्यालय के पुनर्वास शाखा जाने की आवश्यकता पड़ती है । इन कार्यालयो में व्याप्त भ्रष्टाचार से भुविस्थापित त्रस्त हैं । जिनकी शिकायत ग्रामीणों ने पूर्व में प्रशासन को की थी । जिसका निराकरण नहीं होने के फलस्वरुप दिनांक 20/05/2026 को एसडीएम कार्यालय कटघोरा का घेराव करने का निर्णय लिया है । इसके लिए सभी संबंधित कार्यालय को नोटिस प्रेषित की जा चुकी है ।

 

एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के द्वारा कुछ वर्ष पूर्व ग्राम जटराज , पड़निया , सोनपुरी , पाली , रिसदी, खोडरी , चुरैल , आमगांव ,खैरभावना , गेवरा का अधिग्रहण किया है । इसके पूर्व भी ग्राम जरहाजेल, बरपाली , गेवरा , दुरपा , भैसमाखार , मनगांव ,बरमपुर , दुल्लापुर , बरकुटा , सोनपुरी , जटराज आदि ग्रामों का अधिग्रहण किया जा चुका है । इन ग्रामों के ग्रामीण अपनी रोजगार , मुआवजा , पुनर्वास संबंधी कार्यों के लिए दस्तावेज हेतु तहसील कार्यालय दीपका , दर्री , कटघोरा जाते हैं । जहां व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण बहुत परेशान हैं । बेख़ौफ़ होकर कार्यालय में आवेदक ग्रामीणों से सुनियोजित तरीके से रिश्वत ली जाती है । ग्रामीणों के द्वारा रिश्वत उपलब्ध कराने में असमर्थ होने पर प्रकरण को लंबित रखा जाता है । ग्रामीण इसकी शिकायत अनेक बार कर चुके हैं , परंतु कार्यवाही नहीं होने से अत्यंत परेशान हैं ।

 

 **प्रशासनिक अधिकारियों ने सुशासन तिहार को बनाया मजाक , जारी है कुशासन* 

 

 

माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी के द्वारा आम जनता के हित में सुशासन त्यौहार का आयोजन किया जा रहा है । जिसमें विभिन्न योजनाओं का लाभ देने एवं राजस्व संबंधी कार्यों के तुरंत निराकरण करने प्रयास किया जा रहा है । इस सुशासन त्यौहार के खिलाफ जाकर तहसील कार्यालय में कार्य किया जा रहा है । इन अधिकारियों को न तो वरिष्ठ अधिकारियों का भय है न ही शासन एवं निर्वाचित सदस्यों का भय है । ग्रामीण इस भ्रष्टाचार के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही कोरबा जिले के निर्वाचित विधायक सांसद को भी दोषी मानते हैं । उनकी निष्क्रियता के कारण अधिकारी बेलगाम हो गए हैं । अधिकारियों पर उनका कोई कंट्रोल नहीं है , जिससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है । जिससे बेख़ौफ़ होकर ग्रामीणों से रिश्वत की मांग करते हैं । रिश्वत के अभाव में महीना , सालों तक प्रकरण को पेंडिंग रखा जाता है ।

 

 *भूमिहीन को आवास की पात्रता नहीं , बेघर होने के लिए मजबूर हैं* 

 

एसईसीएल के द्वारा भूमिहीन परिवार के लोगों को जिन्होंने अर्जित ग्रामों में अपना मकान शासकीय भूमि या अन्य व्यक्ति के भूमि पर बनाया हैं । ऐसे परिवारों को बसाहट की पात्रता नहीं होने की बात कह रहे हैं । माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी की महत्वाकांक्षी पीएम आवास योजना के द्वारा भूमिहीन एवं निचले तबके के लोगों को मुख्य धारा में लाने के लिए आवास की व्यवस्था की जा रही है । इसके विपरीत एसईसीएल कुसमुंडा के द्वारा लोगों को बेघर करने का प्रयास किया जा रहा है । एसईसीएल की नीति के कारण प्रधानमंत्री आवास योजना के ऐसे हितग्राही जो भूमिहीन है । शासकीय भूमि एवं अन्य व्यक्ति के भूमि में आवास बनाए हैं पुनर्वास के लिए अपात्र होंगे ।

 

 

 *एसईसीएल के द्वारा लगाए जाने वाला राजस्व शिविर औपचारिक* 

 

एसईसीएल के द्वारा अर्जित ग्राम खोडरी, रिसदी, पड़नियां में शिविर का आयोजन किया गया था । इस शिविर में केवल ग्रामीणों से आवेदन संग्रहित किया गया । किसी भी प्रकार का निराकरण नहीं किया गया । इन शिविर में ग्रामीणों के द्वारा फौती , ऑनलाइन सुधार , राजस्व त्रुटि सुधार , वंश वृक्ष , संबंधी आवेदन प्रदान किए । आवेदन संग्रहित कर समस्त कार्यवाही तहसील कार्यालय दीपका के द्वारा किए जाने की जानकारी प्रदान की गई। ग्रामीण तहसील कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार से परेशान होकर ही प्रबंधन से राजस्व शिविर लगाने का गुहार लगाए थे , परंतु शिविर केवल औपचारिक साबित हुई । ग्रामीण चाहते हैं शिविर में ही समस्त कार्रवाई संपन्न कराई जाए जिससे भ्रष्टाचार से बचा जा सके ।

 

 *एसईसीएल केवल कोयला उत्खनन के लिए गंभीर अन्य मुद्दों पर कोई रुचि नहीं* 

 

एसईसीएल के द्वारा केवल कोयला उत्खनन पर ध्यान दिया जा रहा है। उत्खनन बढ़ाने के लिए भूमि बैंक बनाकर विभिन्न ग्रामों का अर्जन किया गया है । अधिग्रहण के 10–15 वर्षों बाद भी मुआवजा , रोजगार की प्रक्रिया आज तक प्रारंभ नहीं की गई है । मुआवजा राशि प्रदान नहीं करने के संबंध में राजस्व विभाग के द्वारा पत्रक प्रदान नहीं करने की जानकारी एसईसीएल द्वारा प्रदान की रही है । ग्रामीण एसईसीएल की कार्यशाली से यह अवगत है की भूमि की तत्काल आवश्यकता पड़ने पर राजस्व विभाग से तत्काल पत्रक प्राप्त कर लिया जाता , केवल गुमराह करने के लिए ऐसी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है । एसईसीएल के ऐसी हरकतों पर कभी भी प्रशासन सख्त नहीं रहा है ।

 

 *एसईसीएल के दबाव में प्रशासन के द्वारा कार्यवाही करने से ग्रामीण नाराज* 

 

एसईसीएल के द्वारा पर संपत्तियों का मूल्यांकन करने हेतु ड्रोन सर्वे को आधार बनाया जा रहा है । जिसके संबंध में ग्रामीणों को आपत्ति है । ड्रोन सर्वे ग्रामीणों के बगैर जानकारी एवं सहमति के कराया गया है । जिसको असेट्स करने का आधार बनाया जा रहा है । जिसके कारण मुआवजा राशि में भारी कटौती की जारी है । बसाहट पूर्ण नहीं होने की स्थिति में ग्रामीण जब तक मकान में रहेंगे ब्लास्टिंग , तूफान आने एवं मकान का जीर्ण–शीर्ण होने पर सुधार परिवर्तन करेंगे जिसको नया मकान मानते हुए राशि में कटौती की जा रही है । ग्राम जटराज मसाहती ग्राम है । इस आधार पर अर्जन उपरांत समस्त कार्रवाई की जा रही है । एकाएक 2026 में मसाहती नहीं होने की जानकारी प्रदान कर तहसीलदार दर्री के द्वारा मुआवजा निर्धारण में व्यापक रूप से पक्षपात किया जा रहा है । ग्राम जटराज का वर्ष 2010 में अर्जन किया गया है । इसके उपरांत आधे ग्रामीणों को मसाहती मानकर और आधे ग्रामीणों को मसाहती नहीं मानकर असेट्स का निर्धारण किया जा रहा है । जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है एसडीएम कार्यालय कटघोरा में आयोजित धरना प्रदर्शन में कुसमुंडा क्षेत्र के अर्जित ग्रामों के ग्रामीण उपस्थित रहेंगे ।