Korba : दर्री रोजगार-मुआवजा की मांग पर अड़े ग्रामीण, तहसीलदार से हुई बातचीत… देखें वीडियो

✍️ भागीरथी यादव

 

 

सरकारी छुट्टी के दिन दर्री तहसील कार्यालय का घेराव, रोजगार-मुआवजा और पुनर्वास की मांग पर आंदोलन का ऐलान

 

कोरबा। एसईसीएल कुसमुंडा परियोजना से प्रभावित ग्राम जटराज (चंदननगर) के ग्रामीणों का वर्षों से लंबित रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास की मांग को लेकर सोमवार को गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में प्रभावित ग्रामीण दर्री तहसील कार्यालय पहुंचे और धरना-प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

सोमवार को सरकारी अवकाश होने के कारण तहसील कार्यालय बंद था। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही दर्री थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और पूरे समय कानून-व्यवस्था संभाले रहे। कुछ देर बाद तहसीलदार भी मौके पर पहुंचीं और प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों से चर्चा की।

ग्रामीणों ने तहसीलदार के समक्ष अपनी समस्याएं रखते हुए बताया कि एसईसीएल कुसमुंडा परियोजना के लिए वर्ष 1979, 1983, 1984 और 2010 में उनकी भूमि का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन आज तक कई प्रभावित परिवारों को रोजगार, उचित मुआवजा और पुनर्वास का लाभ नहीं मिला। उनका आरोप है कि वर्षों से आवेदन और शिकायतें देने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।

प्रदर्शन के दौरान तहसीलदार ने ग्रामीणों से कहा कि वह उनकी मांगों और समस्याओं को शासन-प्रशासन के उच्च अधिकारियों तक पहुंचा सकती हैं, लेकिन मौके पर किसी प्रकार का निर्णय लेने का अधिकार उनके पास नहीं है। इसके बाद ग्रामीणों ने जल्द कार्रवाई की मांग दोहराई।

 

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2026 में अचानक जमीन को “सर्वेक्षित” बताकर पुनर्वास और मुआवजा प्रक्रिया में बदलाव किया जा रहा है। आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने में भी लापरवाही बरती जा रही है। साथ ही ड्रोन सर्वे के आधार पर परिसंपत्तियों का मूल्यांकन किया जा रहा है, जबकि सर्वे और मापन प्रक्रिया नियमों के अनुरूप नहीं हुई। उनका कहना है कि मापन समिति के सदस्यों की अनुपस्थिति में आकलन किया गया और प्रभावितों को मापन की पावती भी नहीं दी गई।

ग्रामीणों का कहना है कि एसईसीएल प्रबंधन ने 30 जून तक 50 प्रतिशत मुआवजा लेने का नोटिस जारी किया है, जबकि पुनर्वास स्थल पर सड़क, पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। बरसात के मौसम में कमजोर एवं कटाव वाली जमीन पर मकान बनाने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे भविष्य में जान-माल का खतरा बना रहेगा।

प्रभावित परिवारों ने पुराने रोजगार प्रकरणों का शीघ्र निराकरण, पुनर्वास समिति के निर्देशों का पालन, पारदर्शी मुआवजा प्रक्रिया तथा सभी पात्र परिवारों को नियमानुसार अधिकार दिए जाने की मांग की। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन और प्रशासन के खिलाफ आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

oplus_4128
oplus_4128
oplus_4128