✍️ भागीरथी यादव
कोरबा। साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे “सजग कोरबा–सतर्क कोरबा” अभियान के तहत कोरबा साइबर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। ऑनलाइन वित्तीय ठगी के एक मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ₹6 लाख की पूरी ठगी गई राशि को संबंधित बैंक खाते में डेबिट फ्रीज (होल्ड) करा दिया है। अब नियमानुसार यह राशि पीड़ित के खाते में वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (साइबर नोडल) नीतीश कुमार ठाकुर के मार्गदर्शन में साइबर पुलिस थाना लगातार ऑनलाइन ठगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, राहुल रात्रे ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार हो गए थे। अज्ञात साइबर ठग ने झांसा देकर उनसे ₹6 लाख अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करा लिए। घटना के तुरंत बाद पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलते ही साइबर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए NCRP पोर्टल के माध्यम से संबंधित बैंक खाते में उपलब्ध पूरी राशि को होल्ड करा दिया, जिससे ठगी की रकम सुरक्षित बचा ली गई। अब वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर राशि पीड़ित के खाते में लौटाने की कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस की अपील
कोरबा पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि वे फर्जी निवेश, डिजिटल अरेस्ट, यूपीआई फ्रॉड, ओटीपी फ्रॉड, केवाईसी अपडेट, लोन फ्रॉड या सोशल मीडिया फ्रॉड जैसी किसी भी साइबर ठगी का शिकार हों, तो बिना देर किए 1930 पर कॉल करें, NCRP पर शिकायत दर्ज करें और निकटतम पुलिस थाना या साइबर थाना को सूचना दें। समय पर शिकायत दर्ज होने से ठगी गई राशि वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
“सतर्क रहें, सुरक्षित रहें”—कोरबा पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर पैसे ट्रांसफर न करें और ओटीपी, यूपीआई पिन, सीवीवी या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
