डायल 112 और बांगो पुलिस की सतर्कता से टली बड़ी अनहोनी, आश्रम की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
सुशील जायसवाल
कोरबा/केंदई। कोरबा जिले के केंदई स्थित आश्रम से सोमवार दोपहर दो नाबालिग छात्र बिना किसी को बताए बाहर निकल गए और पैदल अपने-अपने घर जाने के लिए रवाना हो गए। दोनों बच्चे कई किलोमीटर दूर लमना क्षेत्र तक पहुंच गए। शाम के समय राहगीरों ने बच्चों को अकेले भटकते देखा तो तत्काल इसकी सूचना डायल 112 को दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों बच्चों को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया और बाद में आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
समय रहते पुलिस की सक्रियता से दोनों बच्चों की सकुशल बरामदगी हो गई, जिससे एक संभावित बड़ी अनहोनी टल गई। हालांकि इस घटना ने आश्रम की सुरक्षा व्यवस्था, बच्चों की निगरानी और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, केंदई स्थित आश्रम में रह रहे दो छात्र सोमवार दोपहर बिना किसी कर्मचारी या जिम्मेदार अधिकारी को जानकारी दिए आश्रम परिसर से बाहर निकल गए। दोनों बच्चे पैदल ही अपने घर जाने के उद्देश्य से आगे बढ़ते रहे और काफी दूरी तय कर लमना क्षेत्र तक पहुंच गए। शाम के समय स्थानीय लोगों ने बच्चों को अकेले सड़क पर भटकते देखा। बच्चों की स्थिति संदिग्ध लगने पर उन्होंने तत्काल डायल 112 को सूचना दी।
सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और दोनों बच्चों को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। इसके बाद मामला बांगो पुलिस को सौंपा गया। पुलिस ने बच्चों को सुरक्षित चुटिया टोल प्लाजा लाकर बैठाया, जहां उन्हें भोजन और बिस्किट भी उपलब्ध कराया गया। इसके बाद बच्चों की पहचान कर उनके परिजनों से संपर्क किया गया। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोनों बच्चों को सकुशल उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
हाथी प्रभावित क्षेत्र और व्यस्त मार्ग ने बढ़ाई चिंता
जिस मार्ग से दोनों बच्चे गुजर रहे थे, वह हाथी प्रभावित क्षेत्र माना जाता है। इसके अलावा यह मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा हुआ है, जहां दिनभर भारी वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में यदि समय पर पुलिस और स्थानीय लोगों की नजर बच्चों पर नहीं पड़ती तो कोई गंभीर दुर्घटना या अन्य अप्रिय घटना हो सकती थी। पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने संभावित खतरे को समय रहते टाल दिया।
आश्रम की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद आश्रम प्रबंधन की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। चर्चा है कि बच्चों के आश्रम से निकल जाने की सूचना समय पर उनके परिजनों को नहीं दी गई। इससे आश्रम में बच्चों की नियमित उपस्थिति, निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
लोगों का कहना है कि यदि छात्र आश्रम से बाहर निकल जाते हैं तो उनकी सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी आश्रम प्रबंधन की होती है। ऐसे मामलों में बच्चों के लापता होने की जानकारी तुरंत पुलिस और परिजनों को दी जानी चाहिए, ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके।
परिजनों ने जताई नाराजगी
बताया जा रहा है कि बच्चों के परिजनों ने भी इस घटना को लेकर नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि बच्चों के आश्रम से बाहर निकलने की जानकारी उन्हें समय पर मिल जाती तो वे स्वयं भी उनकी तलाश में जुट जाते। परिजनों का यह भी कहना है कि यदि पुलिस समय पर बच्चों तक नहीं पहुंचती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।
जांच और जवाबदेही की उठी मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने आश्रम की सुरक्षा व्यवस्था की जांच कराने तथा यह पता लगाने की मांग की है कि आखिर दोनों छात्र बिना किसी रोक-टोक के आश्रम से बाहर कैसे निकल गए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली को और मजबूत बनाने की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है।
फिलहाल डायल 112 और बांगो पुलिस की तत्परता के कारण दोनों बच्चे सुरक्षित अपने परिजनों तक पहुंच गए हैं। वहीं इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छात्रावासों और आश्रमों में बच्चों की सुरक्षा, नियमित निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
