कोरबा सीतामढ़ी में ड्रोन की उड़ान से बेनकाब हुआ अवैध खनन, जेसीबी, टीपर और ट्रैक्टर जब्त देखें वीडियो

✍️ भागीरथी यादव

 

 

थर्मल इमेजिंग तकनीक से अब रात में भी होगी निगरानी, खनिज माफियाओं पर प्रशासन का हाईटेक शिकंजा

कोरबा, 26 जून।

कोरबा जिले में अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन ने अब हाईटेक रणनीति अपनाते हुए खनिज माफियाओं पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश एवं उप संचालक, खनि प्रशासन के मार्गदर्शन में शुक्रवार को खनिज विभाग की उड़नदस्ता टीम ने सीतामढ़ी क्षेत्र में हसदेव नदी पर ड्रोन कैमरे से औचक निगरानी कर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।

 

ड्रोन कैमरे की निगरानी में नदी के भीतर अवैध रेत उत्खनन करते हुए एक जेसीबी की गतिविधियां रिकॉर्ड की गईं। वाहन का लगातार पीछा करते हुए उसकी लोकेशन इमलीडुग्गू तक ट्रैक की गई। इसके बाद खनिज विभाग की टीम ने मौके पर दबिश देकर अवैध उत्खनन में प्रयुक्त एक जेसीबी और अवैध रेत परिवहन कर रहे एक टीपर को जब्त कर लिया। दोनों वाहनों को खनिज जांच चौकी, उरगा की अभिरक्षा में रखा गया।

इसी अभियान के दौरान राताखार क्षेत्र में अवैध रूप से रेत परिवहन करते पाए गए एक ट्रैक्टर को भी जब्त कर रामपुर थाना के सुपुर्द किया गया। इस तरह एक ही दिन में अवैध खनन और परिवहन में संलिप्त तीन वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई की गई।

 

अब थर्मल इमेजिंग से होगी रात में निगरानी

सहायक खनि अधिकारी राकेश वर्मा ने बताया कि जिले में अब नियमित रूप से ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। साथ ही रात के अंधेरे में अवैध उत्खनन और परिवहन करने वालों पर नजर रखने के लिए थर्मल इमेजिंग तकनीक का भी इस्तेमाल होगा। ड्रोन में रिकॉर्ड हुए साक्ष्यों के आधार पर वाहन छिपाने या मौके से भागने की कोशिश करने वाले भी कार्रवाई से नहीं बच पाएंगे।

अवैध खनन पर जारी रहेगा सघन अभियान

खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर पूर्ण रोक लगाने, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा तथा शासकीय राजस्व की हानि रोकने के उद्देश्य से यह अभियान लगातार जारी रहेगा। दोषियों के खिलाफ खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957, छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 एवं अन्य वैधानिक प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विभाग ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं भी अवैध खनन, परिवहन या भंडारण की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तत्काल प्रशासन को दें, ताकि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और राजस्व संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।