सब एरिया मैनेजर ने भी माना— “सड़क बननी चाहिए”, लेकिन वर्षों बाद भी नहीं सुधरी हालत
बीजाडांड़ स्कूल के पास धंसा पुल, भारी वाहनों की आवाजाही से हर दिन हादसे का खतरा, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
सुशील जायसवाल
कोरबा (रानी अटारी)।
कोरबा जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में स्थित सिंदुरगढ़ एसईसीएल विजय वेस्ट परियोजना के अंतर्गत आने वाली कोरबी–रानी अटारी मुख्य सड़क इन दिनों अपनी बदहाल स्थिति को लेकर एक बार फिर चर्चा में है। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित यह सड़क आज जगह-जगह गहरे और जानलेवा गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। लगातार हो रही बारिश ने सड़क की हालत और अधिक खराब कर दी है। हालत यह है कि सड़क पर सफर करना किसी जोखिम से कम नहीं रह गया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क के निर्माण और रखरखाव पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन आज सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है। जगह-जगह डामर गायब हो चुका है, बड़े-बड़े गड्ढों में बारिश का पानी भर गया है और वाहन चालकों को यह तक पता नहीं चल पाता कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां।
सबसे बड़ी बात यह है कि एसईसीएल के सब एरिया मैनेजर ने भी सड़क की जर्जर स्थिति को स्वीकार करते हुए कहा कि इस सड़क का निर्माण और सुधार होना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस पहल धरातल पर दिखाई नहीं दे रही है।
कोयला परिवहन का मुख्य मार्ग बना मौत का रास्ता
कोरबी–रानी अटारी सड़क विजय वेस्ट भूमिगत कोयला खदान का प्रमुख संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन सैकड़ों भारी ट्रक और हाईवा वाहन इसी सड़क से कोयला लेकर सरमा, तनेरा, बीजाडांड़ और अन्य क्षेत्रों से गुजरते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं।
लगातार भारी वाहनों के दबाव और बारिश के कारण सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। कई स्थानों पर सड़क धंस गई है, जबकि कई हिस्सों में गहरे गड्ढे बन चुके हैं। ऐसे में छोटे वाहन, मोटरसाइकिल सवार, यात्री बसें और पैदल चलने वाले ग्रामीण हर समय दुर्घटना के खतरे के बीच सफर करने को मजबूर हैं।
बीजाडांड़ स्कूल के पास धंसा पुल, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
स्थिति सबसे अधिक गंभीर बीजाडांड़ मिडिल स्कूल के समीप विजय वेस्ट मुख्य मार्ग पर है, जहां पुल का एक हिस्सा धंस गया है। लगातार भारी वाहनों की आवाजाही के बावजूद पुल की मरम्मत नहीं कराई गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुल की मरम्मत नहीं की गई तो किसी भी दिन कोई भारी वाहन पुल के साथ धंस सकता है और बड़ा हादसा हो सकता है।
स्कूली बच्चों की जान रोज जोखिम में
इस मार्ग से केंदई क्षेत्र के पंडो जनजाति सहित कई गांवों के मासूम बच्चे प्रतिदिन बीजाडांड़ मिडिल स्कूल पढ़ने जाते हैं। बारिश के दौरान सड़क पूरी तरह कीचड़ और पानी से भर जाती है। दूसरी ओर भारी-भरकम कोयला लोड ट्रकों का लगातार आवागमन बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन गया है।
अभिभावकों का कहना है कि हर सुबह बच्चों के स्कूल जाने और शाम को सुरक्षित घर लौटने तक चिंता बनी रहती है। कई बार ट्रकों को रास्ता देने के लिए बच्चों को सड़क किनारे कीचड़ और पानी में उतरना पड़ता है।
बारिश ने खोल दी निर्माण और रखरखाव की पोल
मानसून की पहली ही तेज बारिश ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क पर जगह-जगह डामर उखड़ चुका है और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। बारिश का पानी इन गड्ढों में भर जाने से वाहन चालकों को उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना लगातार बनी रहती है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क का नियमित रखरखाव किया जाता तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
सरमा–कोरबी मार्ग भी बेहद खतरनाक
सबसे गंभीर स्थिति सरमा–कोरबी मार्ग की है। पिछले माह इसी मार्ग पर संकरी पुलिया और जर्जर सड़क के कारण एक बोरवेल मशीन वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इसके बाद भी सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई।
बारिश के कारण सड़क किनारे की मिट्टी लगातार धंस रही है। भारी वाहनों के गुजरने से सड़क और कमजोर होती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी प्रकार लापरवाही जारी रही तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा होना तय है।
हर दिन लगता है जाम, बढ़ रही परेशानी
सड़क की खराब हालत के कारण प्रतिदिन लंबा जाम लग रहा है। बारिश के दौरान छोटे वाहन गड्ढों में फंस जाते हैं, जिससे घंटों तक यातायात बाधित रहता है। कई बार एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक सेवाओं के वाहन भी इसी जाम में फंस जाते हैं, जिससे मरीजों और आम लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
ग्रामीणों का आरोप— शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि विजय वेस्ट परियोजना प्रबंधन और संबंधित विभाग को सड़क की जर्जर स्थिति की कई बार जानकारी दी जा चुकी है। इसके बावजूद न तो सड़क की मरम्मत कराई गई और न ही गड्ढों को भरने का कार्य किया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क का इस प्रकार बदहाल होना निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
लाखों टन कोयला निकल रहा, लेकिन सड़क बदहाल
ग्रामीणों का कहना है कि विजय वेस्ट परियोजना से प्रतिदिन लाखों रुपये मूल्य का कोयला परिवहन किया जाता है। भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क तेजी से खराब हुई, लेकिन उसकी मरम्मत पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। इससे स्थानीय लोगों में परियोजना प्रबंधन के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
ग्रामीणों और अभिभावकों की प्रमुख मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, एसईसीएल प्रबंधन और संबंधित विभागों से मांग की है कि—
कोरबी–रानी अटारी मुख्य सड़क की तत्काल उच्च गुणवत्ता के साथ मरम्मत कराई जाए।
बीजाडांड़ स्कूल के पास धंसे पुल की तत्काल तकनीकी जांच कराकर पुनर्निर्माण कराया जाए।
सड़क पर बने सभी जानलेवा गड्ढों को तत्काल भरा जाए।
बारिश के दौरान भारी वाहनों की गति और संचालन पर नियंत्रण लगाया जाए।
स्कूल समय में कोयला परिवहन करने वाले भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया जाए।
सड़क किनारे चेतावनी संकेत, रिफ्लेक्टर, बैरिकेडिंग एवं सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था की जाए।
सड़क निर्माण एवं रखरखाव में हुई लापरवाही की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
समय रहते नहीं चेता प्रशासन तो हो सकता है बड़ा हादसा
स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों का उद्देश्य जनता को सुविधा देना होता है, लेकिन यदि वही सड़क लोगों और स्कूली बच्चों की जान के लिए खतरा बन जाए तो यह गंभीर चिंता का विषय है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सड़क की मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई तो किसी भी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
अब क्षेत्रवासियों की निगाहें जिला प्रशासन, एसईसीएल प्रबंधन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि आखिर करोड़ों रुपये की लागत से बनी इस महत्वपूर्ण सड़क को सुरक्षित और आवागमन योग्य बनाने के लिए कब ठोस कदम उठाए जाएंगे। वर्तमान स्थिति में यह सड़क विकास की पहचान कम और लापरवाही की मिसाल अधिक बनती जा रही है।
