15 घंटे के रेस्क्यू के बाद कुएं से सुरक्षित निकला भालू, वन विभाग की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा

सुशील जयसवाल

 

 

ग्राम छिंदिया में जेसीबी से बनाया गया ढलान और बाँस की सीढ़ी बनी सहारा, रात 9:30 बजे जंगल की ओर लौटा भालू

कटघोरा/छिंदिया। कटघोरा वनमंडल के केंदई वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत छिंदिया में मंगलवार को एक जंगली भालू खुले कुएं में गिर गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और करीब 15 घंटे तक चले हाई अलर्ट रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद रात लगभग 9:30 बजे भालू को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की। सुरक्षित बाहर आते ही भालू पास के जंगल की ओर लौट गया, जिससे वन अमले और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।

जानकारी के अनुसार भोजन की तलाश में निकला भालू खुले कुएं में गिर गया था। सुबह ग्रामीणों ने कुएं से आवाजें सुनकर देखा तो भालू अंदर फंसा हुआ था। सूचना मिलते ही वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया और भीड़ को दूर कर रेस्क्यू शुरू किया।

भालू के भयभीत होने और कुएं की अधिक गहराई के कारण रेस्क्यू आसान नहीं था। प्रारंभिक प्रयास सफल नहीं होने पर वन विभाग ने जेसीबी मशीन की मदद से कुएं के एक हिस्से में ढलाननुमा रास्ता तैयार कराया और कुएं के भीतर मजबूत बाँस की सीढ़ी उतारी गई। इसके बाद आसपास का क्षेत्र पूरी तरह शांत कराया गया ताकि भालू बिना घबराए बाहर निकल सके।

लंबे इंतजार के बाद रात करीब 9:30 बजे भालू ने पहले बाँस की सीढ़ी का सहारा लिया और फिर जेसीबी से बनाए गए ढलान वाले रास्ते से सुरक्षित बाहर निकल आया। बाहर आते ही वह तेजी से जंगल की ओर चला गया।

पूरा रेस्क्यू ऑपरेशन वनमंडलाधिकारी कुमार निशांत के निर्देशन एवं उप वनमंडलाधिकारी संजय कुमार त्रिपाठी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। मौके पर वन परिक्षेत्र अधिकारी अभिषेक कुमार दुबे, वनपाल शारदा प्रसाद शर्मा, मंगल सिंह नायक, वनरक्षक गंगाराम नेताम, अशोक कुमार श्रीवास, मुरारी लाल साहू, प्रहलाद सिदार, हाथी मित्र दल के संदीप उइके, भोला यादव सहित वन विभाग का अमला और स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।

रेस्क्यू के बाद वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की कि यदि कोई वन्यजीव कुएं या अन्य स्थान पर फंसा मिले तो स्वयं बचाने का प्रयास न करें, बल्कि तत्काल वन विभाग को सूचना दें। साथ ही खुले कुओं के चारों ओर सुरक्षा दीवार या जाली लगाने की भी सलाह दी गई, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

यह सफल रेस्क्यू ऑपरेशन वन विभाग की सतर्कता, धैर्य और ग्रामीणों के सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया।