सुशील जयसवाल
लाठी-डंडों से मारपीट के बाद ग्रामीण ने चलाया तीर, तीन घायल
कोरबा/जटगा-पसान। कटघोरा वनमंडल के जटगा वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम सलिहाभांठा के तेंदूबोदरा में फसल चराई को लेकर चरवाहों और ग्रामीणों के बीच विवाद हिंसक संघर्ष में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच हुई मारपीट में तीन लोग घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
बताया जा रहा है कि करीब एक सप्ताह पहले कवर्धा, बिलासपुर, बेमेतरा और मुंगेली जिले से लगभग आधा दर्जन चरवाहे 650 से अधिक भेड़, बकरी और घोड़ों के साथ क्षेत्र में पहुंचे थे। चरवाहे गांव के बाहर तंबू लगाकर रह रहे थे। ग्रामीणों का आरोप है कि उनके मवेशी लगातार खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे थे। इसे लेकर ग्रामीणों ने पहले भी चरवाहों को समझाइश दी थी।
सोमवार सुबह करीब 52 वर्षीय गंगादीन मरकाम ने खेत में मवेशियों को फसल चरते देखा। इस बात को लेकर उसकी चरवाहों से कहासुनी हुई। कुछ देर बाद गंगादीन अपने साथी अर्जुन उइके के साथ रास्ते से गुजर रहा था, तभी चरवाहों से दोबारा विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद के दौरान लाठी-डंडों से मारपीट की गई। बीच-बचाव करने पहुंचे अर्जुन के साथ भी मारपीट हुई।
मारपीट के दौरान गंगादीन ने बचाव में धनुष से तीर चला दिया। तीर वहां से भाग रहे चरवाहे लीलाधर सप्रे, निवासी भागनपुर जिला कवर्धा, की कमर के निचले हिस्से में जा लगा। घटना के बाद दोनों पक्षों के घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। लीलाधर का उपचार कटघोरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में, जबकि घायल ग्रामीणों का उपचार मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है।
वन विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
घटना के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पसान से जटगा वन परिक्षेत्र में 500 से अधिक मवेशियों और बाहरी चरवाहों की आवाजाही के बावजूद मैदानी अमले को इसकी जानकारी नहीं हुई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि हर वर्ष बड़ी संख्या में बाहरी चरवाहे जंगल और खेतों के आसपास डेरा डालते हैं, लेकिन समय रहते निगरानी और कार्रवाई नहीं होने से विवाद की स्थिति बनती है। घटना को लेकर पुलिस और वन विभाग की कार्रवाई पर लोगों की नजर बनी हुई है।
