✍️ भागीरथी यादव
खराब भोजन, दुर्व्यवहार और अव्यवस्थाओं के विरोध में सड़क पर उतरे छात्र; प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद समाप्त हुआ आंदोलन
कोरबा/कटघोरा, 1 अगस्त। कटघोरा स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं से नाराज छात्र-छात्राओं का गुस्सा शनिवार सुबह सड़क पर फूट पड़ा। विद्यालय में खराब भोजन, बुनियादी सुविधाओं की कमी, दुर्व्यवहार और प्रशासनिक उदासीनता के विरोध में विद्यार्थियों ने सुबह करीब 7 बजे कटघोरा-कोरबा मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कर दिया। सड़क पर छात्रों के बैठ जाने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और करीब डेढ़ घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा।

आंदोलन में शामिल छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों ने विद्यालय के प्राचार्य डॉ. असद अहमद तथा अधीक्षक पर गंभीर आरोप लगाए। विद्यार्थियों का कहना है कि हॉस्टल में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब है और कई बार खाने में कीड़े तक निकल चुके हैं। इसके अलावा उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है तथा छात्रावास और विद्यालय में आवश्यक सुविधाओं का भी अभाव है, जिससे उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
विद्यार्थियों ने बताया कि उन्होंने इससे पहले भी अपनी समस्याओं को लेकर स्थानीय विधायक का काफिला रोककर विरोध दर्ज कराया था और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था। बावजूद इसके उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते उन्हें दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
चक्का जाम की सूचना मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो गया। मौके पर एसडीएम, तहसीलदार, पुलिस अधिकारी और जनप्रतिनिधि पहुंचे तथा छात्रों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने का प्रयास किया। इस दौरान छात्र प्राचार्य को हटाने और दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।
करीब डेढ़ घंटे तक चले आंदोलन के बाद प्रशासन की ओर से विद्यार्थियों की शिकायतों की तत्काल जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई करने का लिखित आश्वासन दिया गया। कलेक्टर से चर्चा के बाद छात्रों ने अपना आंदोलन समाप्त कर सड़क खाली कर दी।
आंदोलन समाप्त होने के बाद कटघोरा-कोरबा मुख्य मार्ग पर यातायात सामान्य हो गया और जाम में फंसे यात्रियों ने राहत की सांस ली। अब पूरे मामले में प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि जांच में छात्रों के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
