
✍️ भागीरथी यादव
श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने रविवार को भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक संचार उपग्रह जीसैट-7आर (सीएमएस-03) को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर देश की अंतरिक्ष तकनीक में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। यह उपग्रह भारतीय नौसेना का अब तक का सबसे उन्नत और शक्तिशाली संचार प्लेटफॉर्म है, जो नौसेना की अंतरिक्ष-आधारित संचार प्रणाली और समुद्री क्षेत्र जागरूकता क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
यह उपग्रह पूरी तरह स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है तथा इसे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया। लगभग 4,400 किलोग्राम भार वाला यह भारत का अब तक का सबसे भारी संचार उपग्रह है। इसमें कई उन्नत तकनीकी घटक शामिल हैं, जिन्हें विशेष रूप से भारतीय नौसेना की परिचालन और सामरिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
हिंद महासागर क्षेत्र में मिलेगा व्यापक संचार कवरेज
जीसैट-7आर उपग्रह हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापक और बेहतर दूरसंचार कवरेज प्रदान करेगा। इसके पेलोड में लगाए गए उन्नत ट्रांसपोंडर विभिन्न संचार बैंडों पर ध्वनि, डेटा और वीडियो लिंक को सपोर्ट करने में सक्षम हैं। उच्च क्षमता वाली बैंडविड्थ के साथ यह उपग्रह भारतीय नौसेना के जहाजों, विमानों, पनडुब्बियों और संचालन केंद्रों के बीच सुरक्षित, निर्बाध और वास्तविक समय संचार सुनिश्चित करेगा। इसके परिणामस्वरूप नौसेना की सैन्य और सामरिक क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और कदम
इसरो ने मिशन की सफलता की जानकारी देते हुए कहा,
> “सीएमएस-03 सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ।”
जटिल वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच जीसैट-7आर को ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यह मिशन इस बात का प्रतीक है कि भारत अपनी उन्नत तकनीक का उपयोग कर राष्ट्र के समुद्री हितों की रक्षा करने में सक्षम है।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दी बधाई
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसरो की टीम को बधाई देते हुए कहा,
> “भारत का ‘बाहुबली’ रॉकेट एलवीएम3-एम5, सीएमएस-03 उपग्रह के साथ आसमान में उड़ान भर रहा है। यह अब तक का सबसे भारी उपग्रह है जिसे भारतीय धरती से भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (GTO) में भेजा गया है। इसरो एक के बाद एक सफलता के नए अध्याय लिख रहा है।”
उन्होंने इस मिशन की सफलता का श्रेय इसरो की मेहनती टीम को देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन के लिए भी धन्यवाद दिया।
इसरो का यह सफल प्रक्षेपण न केवल भारत की अंतरिक्ष शक्ति को सुदृढ़ करेगा, बल्कि देश की सामरिक और समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को भी एक नई दिशा प्रदान करेगा।








