तमिलनाडु में वोटर लिस्ट की सबसे बड़ी सफाई शुरू — 50 लाख तक नाम कट सकते हैं, बढ़ी चिंता और बढ़ा विवाद

✍️ भागीरथी यादव

 

तमिलनाडु में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। 2026 विधानसभा चुनावों से पहले वोटर लिस्ट को पूरी तरह साफ और अद्यतन करने के लिए चुनाव आयोग ने अब तक के सबसे बड़े अभियान की शुरुआत की है। अनुमान है कि 40–50 लाख वोटर्स के नाम लिस्ट से हटाए जा सकते हैं, जिससे पूरे राज्य में चिंता और बहस दोनों तेज हो गई है।

25.72 लाख मृत मतदाता, 39 लाख ने छोड़ा पुराना घर

राज्य में कुल 6.41 करोड़ वोटर्स हैं। चुनाव आयोग की प्रारंभिक जांच में—25.72 लाख लोग मृत पाए गए, जिनके नाम हटना तय है।

39 लाख मतदाताओं ने स्थायी निवास बदला है और उनके पुराने पते पर नाम मौजूद हैं।

9 लाख मतदाताओं का कोई पता उपलब्ध नहीं, उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।3.32 लाख डुप्लीकेट वोटर्स की सूची अलग से तैयार हो चुकी है।

इन आंकड़ों के आधार पर कम से कम 28 लाख नाम तो निश्चित रूप से हटेंगे, वहीं जिन 9 लाख लोगों का पता नहीं मिल पाया, यदि वे 11 दिसंबर तक अपील नहीं करते, तो उनके नाम भी काट दिए जाएंगे।

 

वोटर्स की बढ़ती परेशानी — 41 लाख को फॉर्म भी नहीं मिला

 

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद भी कई मतदाता अपडेट नहीं कर पा रहे।

अब तक 63.2 लाख इलेक्टोरल फॉर्म बांटे जा चुके हैं, लेकिन 41 लाख लोगों को अभी तक फॉर्म नहीं मिला।

इसी कारण आयोग ने अपील की अंतिम तिथि 11 दिसंबर तक बढ़ा दी है।

लोग फॉर्म-6 (नया नाम जोड़ने) और फॉर्म-7 (गलत कटे नाम दोबारा जोड़ने) के माध्यम से ऑनलाइन या बीएलओ के जरिए अपडेट करा सकते हैं।

 

राजनीतिक मुकाबला तेज — ‘लोकतंत्र के लिए खतरा’

 

मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन और विपक्ष के कई नेताओं ने SIR प्रक्रिया को “खतरनाक” बताते हुए कड़ा विरोध किया है।

वीसीके नेता थोल थिरुमावलावन ने चेतावनी दी कि,

> “अगर प्रक्रिया ऐसे ही चली तो 1 करोड़ तक नाम कट सकते हैं, यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।”

उन्होंने बिहार में हुए 43 लाख नाम कटने का उदाहरण देते हुए संसद में बहस की मांग की है।

राजस्व अधिकारियों ने भी बीएलओ का अतिरिक्त काम करने से इनकार कर दिया है, जिससे अभियान की रफ्तार प्रभावित हो रही है।

 

EC का दावा — नकली वोटिंग पर ब्रेक जरूरी

चुनाव आयोग का कहना है कि वोटर लिस्ट को सटीक बनाने के लिए यह कदम अनिवार्य है।

EC के अनुसार,

> “नकली वोटिंग रोकने और हर मतदाता को सही पहचान देने के लिए लिस्ट की सफाई जरूरी है।”

अगर किसी का नाम गलत कट जाता है तो अपील और दोबारा रजिस्ट्रेशन दोनों के विकल्प खुले हैं।

लोग सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।