चिंतावागु नदी में विदेशी मेहमान या पारिस्थितिकी का दुश्मन? अर्जुनल्ली में मिली ‘प्लेको फिश’ से फैली चिंता।

बीजापुर – भोपालपटनम विकासखंड के अर्जुनल्ली गांव के पास बहने वाले चिंतावागु नदी में हाल ही में एक अनोखी मछली मिलने से ग्रामीण हैरान है। स्थानीय युवाओं द्वारा मछली पकड़ने के दौरान जाल में फंसी इस मछली की शक्ल-सूरत कुछ अलग ही थी। शरीर पर धारियां बाघ जैसी। जब इसकी तस्वीरें इंटरनेट पर डाली गईं, तो विशेषज्ञों ने इसे ‘प्लेको फिश’ के नाम से पहचाना। प्लेको फिश, मूल रूप से दक्षिण अमेरिका की निवासी है। इसे अक्सर एक्वेरियम में गंदगी और काई साफ करने के लिए पाला जाता है। मगर यही खूबी जब खुले जल स्रोतों में सामने आती है, तो यह दूसरी मछलियों के लिए एक खतरनाक बन जाती है। मछली विशेषज्ञों की मानें, तो प्लेको न केवल तेज़ी से फैलती है, बल्कि यह देशी मछलियों के अंडों और भोजन को भी नष्ट कर सकती है। इसके शरीर की बनावट इतनी कठोर होती है कि इसे शिकारी आसानी से नहीं मार सकते। यही कारण है कि यह जलस्रोतों में असंतुलन पैदा कर सकती है। ऐसी प्रजातियां जब किसी नए पारिस्थितिक तंत्र में प्रवेश करती हैं, तो वे वहां की जैव विविधता को चुनौती देती हैं। अगर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में चिंतावागु जैसी नदियों में देशी मछलियों का अस्तित्व संकट में आने की संभावना बनी रहती है।

महिला अधिकारी की शिकायत पर कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच समिति की रिपोर्ट जारी, डीएमसी मनोज पांडेय के विरुद्ध मानसिक उत्पीड़न के आरोप साबित नहीं

कोरबा, 30 जुलाई 2025 समग्र शिक्षा के अंतर्गत कार्यरत एक महिला अधिकारी द्वारा जिला मिशन समन्वयक (डीएमसी) श्री मनोज पांडेय के विरुद्ध मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए जाने के मामले में कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर जिला स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया था। समिति ने अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है, जिसमें आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी है। जांच समिति का गठन निम्न सदस्यों द्वारा किया गया था: श्रीमती ऋचा सिंह, डिप्टी कलेक्टर, कोरबा – अध्यक्ष श्रीमती रेणु प्रकाश, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास – सदस्य श्रीमती रजनी मारिया, संरक्षण अधिकारी, नवबिहान (डब्ल्यूसीडी) – सदस्य महिला अधिकारी द्वारा डीएमसी पर कार्यस्थल पर मानसिक उत्पीड़न एवं दुर्व्यवहार के आरोप लगाए गए थे। जांच में समिति ने पाया कि: आवेदिका द्वारा लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई लिखित या इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। महिला सहकर्मियों से की गई मौखिक शिकायतों की पुष्टि साक्ष्य के रूप में नहीं हो सकी। गवाहों ने स्वीकार किया कि डीएमसी ने कभी-कभी ऊंचे स्वर में संवाद किया, परंतु किसी प्रकार का मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न सिद्ध नहीं हुआ। जांच समिति ने यह भी उल्लेख किया कि कार्यालयीन कार्य में तनावपूर्ण संवाद की स्थिति बन सकती है, किंतु इसे प्रताड़ना नहीं कहा जा सकता।

ननों की जमानत याचिका खारिज, अब बिलासपुर NIA कोर्ट में होगी अगली सुनवाई

रायपुर: छत्तीसगढ़ में ननों की गिरफ्तारी मामले को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. मानव तस्करी और धर्मांतरण मामले में ननों को लोअर कोर्ट के बाद सेशन कोर्ट से झटका लगा है. सेशन कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. अब मामला बिलासपुर स्थित NIA कोर्ट में सुना जाएगा लोअर कोर्ट के बाद सेशन कोर्ट के जज अनीश दुबे (FTSC) ने बताया कि मानव तस्करी का मामला होने के कारण यह प्रकरण हमारे क्षेत्राधिकार में नहीं आता. इस मामले में सुनवाई का अधिकार केवल NIA कोर्ट को है. अब पीड़िता के वकील राजकुमार तिवारी ने बिलासपुर स्थित NIA कोर्ट में याचिका लगाने की तैयारी शुरू कर दी है. फिलहाल दोनों ननों को जेल में ही रहना होगा बता दें कि 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मानव तस्करी और धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए दो ननों और एक युवक को रोका था. आरोप था कि तीनों, नारायणपुर जिले की तीन लड़कियों को बहला-फुसलाकर आगरा ले जा रहे हैं. कार्यकर्ताओं ने रेलवे स्टेशन पर नारेबाजी करते हुए सभी को GRP के हवाले कर दिया था. GRP थाना भिलाई-3 के अंतर्गत दुर्ग जीआरपी चौकी में मामले की जांच के बाद धर्मांतरण की धारा 4 के तहत मामला दर्ज कर तीनों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया था.

मुकेश चंद्राकर हत्याकांड: बीजापुर में PWD के 5 अधिकारी गिरफ्तार, जांच में बड़ा खुलासा संभव

बीजापुर: जिले में गंगालूर से मिरतुर तक बन रही सड़क में भारी भ्रष्टाचार की परतें अब खुलने लगी हैं। इस निर्माण कार्य में अनियमितताओं के चलते पुलिस ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के दो सेवानिवृत्त कार्यपालन अभियंता (EE), एक वर्तमान EE, एक SDO और एक सब-इंजीनियर को गिरफ्तार कर लिया है। जिले के पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। बता दें कि यह कार्रवाई पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या की चल रही विशेष जांच (SIT) के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई है। सभी आरोपियों को दो दिन की न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है और उनसे लगातार पूछताछ जारी है। मुकेश की हत्या ने खोला भ्रष्टाचार का मामला गौरतलब है कि मुकेश चंद्राकर ने गंगालूर-मिरतुर सड़क निर्माण में हो रही गड़बड़ियों को उजागर किया था। इसी वजह से उनकी हत्या की गई थी। 1 जनवरी की रात से लापता रहे मुकेश चंद्राकर का शव 3 जनवरी को चट्टनपारा बस्ती में रिश्तेदार ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के मजदुरों के लिए बनाए गए बाड़े के सेप्टिक टैंक से बरामद हुआ था। इस मामले में उनके सुरेश चंद्राकर और उनके दो भाई रितेश और दिनेश चंद्राकर सहित सुपरवाइज़र महेंद्र रामटेके को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। सुरेश को पुलिस ने हैदराबाद से पकड़ा था। इसके बाद जब SIT ने हत्याकांड से जुड़े मामलों की पड़ताल शुरू की, तो सड़क निर्माण से जुड़े बड़े भ्रष्टाचार के सुराग मिले। जांच में साफ हुआ कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया निर्माण किया गया था। 73 करोड़ की लागत से बनी सड़क, गंभीर सवालों के घेरे में बता दें कि नेलसनार-कोड़ोली-मिरतुर-गंगालूर सड़क परियोजना को साल 2010 में 73.08 करोड़ रुपए की लागत से मंजूरी मिली थी। लेकिन पत्रकार मुकेश चंद्राकर ने इस परियोजना में घटिया काम और भारी भ्रष्टाचार को उजागर किया था, जो उनकी हत्या की वजह बन गई। मुकेश चंद्राकर बीजापुर जैसे नक्सल प्रभावित और संवेदनशील इलाके में बेखौफ पत्रकारिता करने वाले उन चुनिंदा पत्रकारों में शामिल थे, जो हर हाल में सच को सामने लाने का साहस रखते थे। उन्होंने न सिर्फ सड़क निर्माण में हो रहे भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण कार्यों को उजागर किया, बल्कि सोशल मीडिया और वीडियो पोर्टल के ज़रिए लगातार जनहित से जुड़ी खबरें निर्भीकता से सामने रखीं। नक्सल क्षेत्र में निर्भीक पत्रकारिता की मिसाल थे मुकेश चंद्राकर गौरतलब है कि पत्रकार मुकेश चंद्राकर की भूमिका सिर्फ भ्रष्टाचार उजागर करने तक सीमित नहीं थी। अप्रैल 2021 में बीजापुर के टकलगुड़ा में हुए माओवादी हमले के बाद, जब 22 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे और कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह मन्हास माओवादियों की कैद में थे, उस समय मुकेश ने उनकी रिहाई सुनिश्चित कराने में भी अहम भूमिका निभाई थी। यह घटना उनकी सामाजिक सक्रियता और साहसिक पत्रकारिता का स्पष्ट प्रमाण है। उनकी निर्भीक रिपोर्टिंग से ठेकेदारों और कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की नींद हराम हो गई थी। इन्हीं शक्तियों के खिलाफ लगातार आवाज़ उठाने की कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। मुकेश चंद्राकर की निर्मम हत्या न सिर्फ पत्रकारिता जगत के लिए, बल्कि लोकतंत्र के लिए भी एक गहरी क्षति है।

छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल: ASP, DSP और TI का तबादला, ACB-EOW में प्रतिनियुक्ति

रायपुर. राज्य सरकार ने ASP, DSP और TI का तबादला आदेश जारी किया है. गृह (पुलिस) विभाग के अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर लेकर उनकी पदस्थापना एंटी करप्शन ब्यूरो एवं राज्य आर्थिक अपराध अनवेषण ब्यूरो रायपुर में की गई है. इसका आदेश सामान्य प्रशासन विभाग ने आज जारी किया है. ASP जयप्रकाश बढ़ई, डीएसपी प्रभात पटेल समेत इंस्पेक्टर नवीन देवांगन को ACB-EOW में भेजा गया है. आदेश की कॉपी

CG NEWS : कोसमनारा रोड पर ट्रेलर ने बाइक को मारी टक्कर: एक युवक की मौत, दो घायल

रायगढ़।’ छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एक ट्रैलर के चालक ने बाइक सवार को टक्कर मार दी। इससे बाइक सवार एक युवक की मौत हो गई। वहीं दो लोग मामूली रूप से घायल हो गए। घटना कोतरा रोड थाना क्षेत्र की है। मिली जानकारी मुताबिक सक्ति जिला के ग्राम डभरा का रहने वाला संजू सिदार 30 साल अपने रिस्तेदार मंजू सिदार 28 साल व एक 5 साल के बच्चे के साथ मिट्ठुमुड़ा आया। इसके बाद सुबह करीब 8 बजे बाइक पर सवार होकर वह कोसमनारा की ओर जा रहे थे। तभी कोसमनारा चौक के पास ट्रैलर के चालक ने उन्हें जबरदस्त ठोकर मार दिया। इससे संजू सिदार के चेहरे व शरीर के अन्य हिस्से पर चोट लगने से मौके पर उसकी मौत हो गई। वहीं मंजू सिदार व बच्चे को मामूली चोट पहुंची।

CRPF जवान ने उठाया खौफनाक कदम: सर्विस राइफल से खुद को मारी गोली, मौके पर मौत

बीजापुर। सीआरपीएफ की 22वीं बटालियन में तैनात एक जवान ने बुधवार सुबह खुदकुशी कर ली। घटना मिंगाचल कैंप की है, शुरुआती जानकारी के मुताबिक मृतक जवान का नाम पप्पू यादव है, जिसने तड़के करीब 5 बजे अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मार ली, जो उनके सिर को चीरते हुए बाहर निकल गई। पप्पू यादव बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले थे और 1 दिन पहले ही वह छुट्टी से लौटे थे। घटना के बाद कैंप में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। नैमेड थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। बीजापुर एसपी डॉ. जितेन्द्र यादव ने घटना की पुष्टि की है। जवान ने यह कदम किन कारणों से उठाया, फिलहाल इसकी जांच की जा रही है।

कोयला घोटाला मामला : जेल में बंद सूर्यकांत त्रिपाठी को दूसरे जेल में ट्रांसफर करने की तैयारी, कोर्ट में आज होगी सुनवाई

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी घोटाला मामले में जेल में बंद आरोपी सूर्यकांत त्रिपाठी को दूसरे जेल में शिफ्ट करने की तैयारी है. जेल प्रशासन की ओर से आरोपी को अंबिकापुर जेल में ट्रांसफर करने के अर्जी लगाई गई है, जिसपर आज विशेष कोर्ट में सुनवाई होनी है. जेल प्रशासन का आरोप है कि सूर्यकांत जेल में उत्पात मचाते हैं और कार्रवाई में सहयोग नहीं करते हैं. कुएं के धंसने से बड़ा हादसा: पति-पत्नी और बेटा मलबे में दबे, रेस्क्यू टीम आज फिर करेगी बचाव कार्य शुरू कोर्ट ने दिया था आरोपियों को स्थान्तरित करने का आदेश ईडी की विशेष कोर्ट में जेल में बंद आबकारी, कोयला और कस्टम मिलिंग के आरोपियों को लेकर शिकायत की गई थी. आरोप लगाया गया था कि वे एक सिंडिकेट चला रहे थे और VIP ट्रीटमेंट का लाभ उठा रहे थे. इस शिकायत के बाद रायपुर जेल ने यह फैसला किया था. वहीं कोर्ट ने सभी आरोपियों को राज्य की विभिन्न जेलों में स्थान्तरित करने का आदेश दिया था. संपत्ति की कुर्की बता दें कि ED ने अवैध कोयला लेवी घोटाले के केस में मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी और अन्य से संबंधित पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत 30 जनवरी 2025 तक 49.73 करोड़ रुपए मूल्य की 100 से अधिक चल और अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क किया गया, जिसमें बैंक बैलेंस, वाहन, नकदी, आभूषण और जमीन शामिल है. ये संपत्तियां कोयला घोटाले के कथित मास्टरमाइंड सूर्यकांत तिवारी के साथ बाकी आरोपियों की भी है. CG PSC 2021 मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- जिन अभ्यर्थियों पर नहीं है चार्जशीट, उन्हें 60 दिन में दी जाए नियुक्ति क्या है कोयला लेवी मामला ED की जांच में सामने आया कि कुछ लोगों ने राज्य के वरिष्ठ राजनेताओं और नौकरशाहों से मिलीभगत के बाद ऑनलाइन मिलने वाले परमिट को ऑफलाइन कर कोयला ट्रांसपोर्ट करने वालों से अवैध वसूली की. जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच कोयले के हर टन पर 25 रुपये की अवैध लेवी वसूली गई. 15 जुलाई 2020 को इसके लिए आदेश जारी किया गया था. खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक IAS समीर बिश्रोई ने आदेश जारी किया था. यह परमिट कोल परिवहन में कोल व्यापारियों को दिया जाता है. पूरे मामले का मास्टरमाइंड किंगपिन कोल व्यापारी सूर्यकांत तिवारी को माना गया. इसमें जो व्यापारी पैसे देता उसे ही खनिज विभाग से पीट और परिवहन पास जारी होता था, यह रकम 25 रुपये प्रति टन के हिसाब से सूर्यकांत के कर्मचारियों के पास जमा होती थी. इस तरह से स्कैम कर कुल 570 करोड़ रुपये की वसूली की गई. कहां खर्च की अवैध कमाई जांच में सामने आया है कि इस घोटाले की राशि को सरकारी अधिकारियों और राजनेताओं को रिश्वत देने में खर्च किया गया. साथ ही चुनावी खर्चों के लिए भी इस अवैध राशि का इस्‍तेमाल किया गया. आरोपियों ने इससे कई चल-अचल संपतियों को खरीदा.

कुएं के धंसने से बड़ा हादसा: पति-पत्नी और बेटा मलबे में दबे, रेस्क्यू टीम आज फिर करेगी बचाव कार्य शुरू

कोरबा : जिले में भारी बारिश के कारण एक कुआं धंस गया। इस हादसे में एक ही परिवार के 3 सदस्य मलबे में दब गए। मंगलवार की इस घटना के बाद रात ढाई बजे तक SDRF ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया लेकिन बारिश और अंधेरा ज्यादा होने के कारण इसे रोकना पड़ा। टीम आज फिर ऑपरेशन शुरू करेगी। मामला जटगा चौकी क्षेत्र के बनवार गांव का है। जानकारी के मुताबिक, छोटू राम श्रीवास (65), पत्नी कंचन श्रीवास (53) और बेटा गोविंद श्रीवास (30) कुएं में लगे मोटर पंप को निकालने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान अचानक पूरा कुआं धंस गया। 2 महीने पहले ही कुआं खुदवाया गया था। भारी बारिश के कारण कोरबा में कुआं धंस गया। हादसे में परिवार के 3 सदस्य मलबे में दब गए। भारी बारिश के कारण कोरबा में कुआं धंस गया। हादसे में परिवार के 3 सदस्य मलबे में दब गए। सूचना पर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची है। SDRF की टीम रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है। सूचना पर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची है। SDRF की टीम रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है।

CG PSC 2021 मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- जिन अभ्यर्थियों पर नहीं है चार्जशीट, उन्हें 60 दिन में दी जाए नियुक्ति

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) 2021 की नियुक्तियों को लेकर हाईकोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि जिन चयनित अभ्यर्थियों के खिलाफ सीबीआई ने चार्जशीट प्रस्तुत नहीं की है, उन्हें 60 दिन में नियुक्ति दी जाए। कोर्ट ने यह भी कहा है कि सभी उम्मीदवारों की ज्वाइनिंग सीबीआई की जांच और हाईकोर्ट के फैसले के अधीन रहेगी। इस मामले में 2 मई को सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसके अब फैसला सुनाया गया है। बता दें कि राज्य लोकसेवा आयोग (पीएससी) में कथित गड़बड़ी के आरोपों के बाद राज्य शासन ने मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा है। सीबीआई ने 4 अभ्यर्थियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। वहीं 44 चयनित अभ्यर्थियों ने नियुक्ति न होने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। पीएससी में हुई नियुक्ति को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई बिलासपुर हाईकोर्ट में चल रही है। इस मामले में राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, उनकी नियुक्तियां अभी नहीं होंगी। जिनकी नियुक्तियां हो चुकी हैं, वह न्यायालय के आदेश के अधीन रहेगी। इसके बाद सरकार ने जांच के लिए सीबीआई को मामला सौंपा था। इधर जिन लोगों की नियुक्ति पर रोक लगी थी उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसमें कहा गया कि पूरी जांच में लंबा समय लग सकता है। तब तक ज्वाइनिंग से वंचित करना अन्याय है।

अन्य खबरे

तिल्दा-नेवरा में 15 दिवसीय रात्रीकालीन क्रिकेट स्पर्धा का भव्य समापन, महिला वर्ग में मुंगेली और पुरुष वर्ग में स्टार MJ ने मारी बाज़ी
स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय कोरबी में सरस्वती पूजन हर्षोल्लास से संपन्न
उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व में बड़ी कार्रवाई, अवैध शिकार करते 3 आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल
धान खरीदी महापर्व में भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार, बालोद में दो अधिकारी निलंबित देखे आदेश
छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, कई जिलों में कर्मचारियों के तबादले
खड़गवां पुलिस की अनूठी पहल, गांव-गांव पहुंचा सड़क सुरक्षा का संदेश