श्री सिद्धि गणेश उत्सव समिति गोपालपुर में हंसी-खुशी के साथ मना गणेश उत्सव
लोक सदन भागीरथी यादव कोरबा – दर्री गोपालपुर में श्री सिद्धि गणेश उत्सव समिति गोपालपुर के तत्वावधान में इस वर्ष भी गणेश उत्सव का आयोजन पूरे धूमधाम और श्रद्धा के साथ किया जा रहा है। गाँव के सभी बच्चे, महिलाएँ और युवा मिलकर सामूहिक रूप से इस उत्सव को खास बना रहे हैं। गणपति बप्पा की स्थापना के साथ ही गाँव का माहौल भक्तिमय हो उठा है। दिनभर भक्तजन पंडाल में आकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं और शाम होते ही भजन-कीर्तन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें गाँव के बच्चों ने नृत्य, गीत और नाट्य प्रस्तुतियाँ दीं, वहीं महिलाओं ने भक्ति गीतों के माध्यम से समा बांध दिया। गाँव के युवाओं की टोली ने पूरे आयोजन की जिम्मेदारी संभाली और अनुशासन व उत्साह दोनों का उदाहरण पेश किया। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि यह उत्सव केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है बल्कि गाँव में सामाजिक एकता, भाईचारा और सांस्कृतिक जागरूकता का भी प्रतीक है। गाँववासी उत्सव में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। खास बात यह रही कि बच्चे और महिलाएँ भी पूरी सक्रियता से आयोजन में शामिल होकर कार्यों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। पूरे पंडाल में आकर्षक सजावट की गई है और गणेश जी की प्रतिमा को फूलों और लाइटों से सजाकर अद्भुत रूप दिया गया है। आने वाले दिनों में भंडारा, खेलकूद और सामूहिक आरती का आयोजन भी किया जाएगा
कब किया जाएगा गणपति विसर्जन? जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और इससे जुड़ी परंपराएं
लोकसदन:– Ganesh Visarjan 2025: गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश के जन्म का प्रतीक है. यह पर्व 10 दिनों तक चलता है. इस दौरान भक्त गणपति बप्पा की प्रतिमा को अपने घर में स्थापित करके उनकी पूजा-अर्चना करते हैं. इस महापर्व का समापन गणेश विसर्जन के साथ होता है. गणेश विसर्जन के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा को पूरे सम्मान और धूमधाम के साथ विसर्जित किया जाता है, तो आइए जानते हैं गणेश विसर्जन की तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और इससे जुड़ी परंपराएं. गणपति विसर्जन 2025 की तिथि इस बार गणेश विसर्जन 6 सितंबर को होगा. इसी दिन अनंत चतुर्दशी भी मनाई जाती है. लेकिन कुछ साधक अपनी परंपराओं के अनुसार 1.5, 3, 5 या 7 दिनों के बाद भी गणपति का विसर्जन करते हैं. गणपति विसर्जन का तरीका गणपति विसर्जन के दिन सुबह से उपवास रखना जरूरी है. अगर आप उपवास ना रख पाएं तो फलाहार करें. घर में स्थापित गणेश की प्रतिमा का विधिवत पूजन करें. पूजन में नारियल, शमी पत्र और दूब जरूर अर्पित करें. प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाते समय भगवान गणेश को समर्पित अक्षत घर में जरूर बिखेर दें. गणेश का विसर्जन नंगे पैर ही करें. बता दें कि विसर्जन के लिए मिट्टी की प्रतिमा सर्वश्रेष्ठ है. इसलिए प्लास्टिक की मूर्ती को स्थापित न करें. विसर्जन के बाद हाथ जोड़कर श्री गणेश से कल्याण और मंगल की कामना करें. विसर्जन के समय करें विशेष उपाय एक भोजपत्र या पीला कागज लें. अष्टगंध कि स्याही या नई लाल स्याही की कलम भी लें. भोजपत्र या पीले कागज पर सबसे ऊपर स्वस्तिक बनाएं. उसके बाद स्वस्तिक के नीचे ‘ऊं गं गणपतये नमः’ लिखें. इसके बाद अपनी सारी समस्याएं लिखें. लिखावट में काट छांट न करें. कागज के पीछे कुछ ना लिखें. समस्याओं के अंत में अपना नाम लिखें . इसके बाद गणेश मंत्र लिखें. सबसे आखिर में स्वस्तिक बनाएं. कागज को मोड़ कर रक्षा सूत्र से बांध लें. इस कागज को गणेश जी को समर्पित करें. इस कागज को भी गणेश जी की प्रतिमा के साथ ही विसर्जित करें. माना जाता है कि ऐसा करने से जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है. अनंत चतुर्दशी का महत्व इस दिन मोक्ष की प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु की भी पूजा की जाती है. इसके लिए अनंत चतुर्दशी का व्रत रखा जाता है. बंधन का प्रतीक सूत्र हाथ में बांधा जाता है. व्रत के पारायण के समय इसको खोल दिया जाता है. इस व्रत में नमक का सेवन नहीं करते हैं. पारायण में मीठी चीजें जैसे सेवईं या खीर खाते हैं. मान्यता है कि इस दिन गजेन्द्र मोक्ष का पाठ करने से जीवन की तमाम परेशानियां दूर होती हैं. अनंत चतुर्दशी पर प्रसन्न होंगे इस व्रत में सूत या रेशम के धागे को कुमकुम से रंगकर उसमें चौदह गांठे लगाई जाती हैं. इसके बाद उसे विधि-विधान से पूजा के बाद कलाई पर बांधा जाता है. कलाई पर बांधे गए इस धागे को ही अनंत कहा जाता है. भगवान विष्णु का रूप माने जाने वाले इस धागे को रक्षासूत्र भी कहा जाता है. ये 14 गांठे भगवान श्री हरि के 14 लोकों की प्रतीक मानी गई हैं. यह अनंत धागा भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला तथा अनंत फल देता है.
Korbi news: कोरबी में इस वर्ष होगा भव्य दशहरा उत्सव…*
बैठक में समिति ने लिया अहम निर्णय. Loksadan। कोरबी चोटिया :- जिले के दुरुस्त वनांचल एवं पोड़ी उपरोड़ा ब्लाक के अंतर्गत ग्राम पंचायत कोरबी में इस वर्ष भव्य रूप से श्री श्री दुर्गा पुजा एवं दशहरा उत्सव मनाया जाएगा, इसके लिए ग्राम पंचायत सरपंच राजू राम मरावी,की अध्यक्षता में दशहरा उत्सव समिति का गठन किया गया, समिति की पहली महत्वपूर्ण बैठक आज दिनांक 2 सितंबर मंगल वार को स्थानीय ग्राम पंचायत भवन में आयोजित की गई थी, जिसमें उत्सव की रूपरेखा और कार्यक्रमों को अंतिम स्वरूप दिया गया, आयोजन समिति के सदस्यों द्वारा दशहरा पर्व को वृहद स्वरूप से मनाने का निर्णय लिया गया, आयोजन समिति के सदस्यों द्वारा दशहरा पर्व को भव्य व ऐतिहासिक रूप देने का निर्णय लिया गया, इसमें विशेष रूप से रावण के पुतले का निर्माण, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और व्यवस्थाओं पर मुख्य रूप से चर्चा की गई, हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी ग्रामीण क्षेत्रों से भारी संख्या में लोगों की उपस्थिति रहने की संभावना है, कोरबी का दशहरा उत्सव। वर्षों से आसपास के क्षेत्रों में आकर्षण का केंद्र रहा है रावण दहन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को देखने हजारों की संख्या में लोग एकत्रित होते हैं, इस बार नौगठित समिति और भव्य स्वरूप देने के लिए योजनाबद्ध प्रयास कर रही है, समिति में शामिल प्रमुख सदस्य गण, नवगठित कोरबी के श्री श्री दशहरा उत्सव समिति में कई सामाजिक कार्यकर्ता जनप्रतिनिधि और सामान्य नागरिक शामिल किए गए हैं, इसमें मुख्य रूप से राजू राम मरावी अध्यक्ष, सरपंच ग्राम पंचायत कोरबी, मुरारी लाल जायसवाल उप सरपंच ग्राम पंचायत कोरबी, अतुल जायसवाल, गोल्डी उरांव, प्रेम सिंह मरावी, अरुण सारथी, शिव जायसवाल, पत्रकार सुशील जायसवाल, जवाहर सिंह, अश्वनी जायसवाल, एवं समिति के पदाधिकारि और पंचायत प्रतिनिधि सहित गणमान्य नागरिक मुख्य रूप से उपस्थित थे!
*।।ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।।*
Loksadan ।।परिवर्तिनी एकादशी।। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की परिवर्तनी एकादशी तिथि 03 सितंबर 2025 बुधवार को प्रात: 03 बजकर 53 मिनट से शुरू होगी और 04 सितंबर 2025 गुरुवार को प्रात: 04 बजकर 21 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। अतः उदया तिथि के अनुसार परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 03 सितंबर 2025 बुधवार को रखा जायेगा। एकादशी व्रत का पारण 04 सितंबर 2025 गुरुवार को मध्यान्ह 01 बजकर 36 मिनट से सायं 04 बजकर 07 मिनट के बीच किया जाएगा। *परिवर्तनी एकादशी व्रत कथा* पाण्डुनन्दन अर्जुन ने कहा – “हे प्रभु! भादों की शुक्ल पक्ष की एकादशी का क्या नाम है तथा उसके वत का क्या विधान है? उस एकादशी के उपवास को करने से किस फल की प्राप्ति होती है। हे कृष्ण! कृपा कर यह सब समझाकर कहिए। श्रीकृष्ण ने कहा – “हे पार्थ! भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जयन्ती एकादशी भी कहते हैं। इस एकादशी की कथा के सुनने मात्र से ही सभी पापों का शमन हो जाता है और मनुष्य स्वर्ग का अधिकारी बन जाता है। इस जयन्ती एकादशी की कथा से नीच पापियों का भी उद्धार हो जाता है। यदि कोई धर्मपरायण मनुष्य एकादशी के दिन मेरा पूजन करता है तो मैं उसको संसार की पूजा का फल देता हूँ। जो मनुष्य मेरी पूजा करता है, उसे मेरे लोक की प्राप्ति होती है। इसमें तनिक भी सन्देह नहीं। जो मनुष्य इस एकादशी के दिन भगवान श्रीवामन का पूजन करता है, वह तीनों देवता अर्थात ब्रह्मा, विष्णु, महेश की पूजा करता है। हे पार्थ! जो मनुष्य इस एकादशी का उपवास करते हैं, उन्हें इस संसार में कुछ भी करना शेष नहीं रहता। इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी भी कहते हैं। यह सुन विस्मित होकर अर्जुन ने कहा – “हे जनार्दन! आपके वचनों को सुनकर मैं भ्रम में पड़ गया हूँ कि आप किस प्रकार सोते तथा करवट बदलते हैं? आपने बलि को क्यों बाँधा और वामन रूप धारण करके क्या लीलाएँ कीं। चातुर्मास्य व्रत का विधान क्या है तथा आपके शयन करने पर मनुष्य का क्या कर्त्तव्य है, कृपा कर सब आप विस्तारपूर्वक कहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा – “हे कुन्ती पुत्र अर्जुन! अब तुम समस्त पापों का शमन करने वाली इस कथा का ध्यानपूर्वक श्रवण करो। त्रेतायुग में बलि नाम का एक असुर था। वह अत्यन्त भक्त, दानी, सत्यवादी तथा ब्राह्मणों की सेवा करने वाला था। वह सदा यज्ञ, तप आदि किया करता था। अपनी इसी भक्ति के प्रभाव से वह स्वर्ग में देवेन्द्र के स्थान पर राज्य करने लगा। देवराज इन्द्र तथा अन्य देवता इस बात को सहन नहीं कर सके और भगवान श्रीहरि के पास जाकर प्रार्थना करने लगे। अन्त में मैंने वामन रूप धारण किया और तेजस्वी ब्राह्मण बालक के रूप में राजा बलि पर विजय प्राप्त की।” यह सुनकर अर्जुन ने कहा – “हे लीलापति! आपने वामन रूप धारण करके उस बलि को किस प्रकार जीता, कृपा कर यह सब विस्तारपूर्वक बताइये। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा – “मैंने वामन रूप धारण करके राजा बलि से याचना की- हे राजन! तुम मुझे तीन पग भूमि दान दे दो, इससे तुम्हें तीन लोक के दान का फल प्राप्त होगा। राजा बलि ने इस छोटी-सी याचना को स्वीकार कर लिया और भूमि देने को तैयार हो गया। जब उसने मुझे वचन दे दिया, तब मैंने अपना आकार बढ़ाया और भूलोक में पैर, भुवन लोक में जंघा, स्वर्ग लोक में कमर, महलोक में पेट, जनलोक में हृदय, तपलोक में कण्ठ और सत्यलोक में मुख रखकर अपने शीर्ष को ऊँचा उठा लिया। उस समय सूर्य, नक्षत्र, इन्द्र तथा अन्य देवता मेरी स्तुति करने लगे। तब मैंने राजा बलि से पूछा कि हे राजन! अब मैं तीसरा पग कहाँ रखूँ। इतना सुनकर राजा बलि ने अपना शीर्ष नीचे कर लिया। तब मैंने अपना तीसरा पग उसके शीर्ष पर रख दिया और इस प्रकार देवताओं के हित के लिए मैंने अपने उस असुर भक्त को पाताल लोक में पहुँचा दिया तब वह मुझसे विनती करने लगा। मैने उससे कहा कि हे बलि! मैं सदैव तुम्हारे साथ रहूँगा। भादों के शुक्ल पक्ष की परिवर्तिनी नामक एकादशी के दिन मेरी एक प्रतिमा राजा बलि के पास रहती है और एक क्षीर सागर में शेषनाग पर शयन करती रहती है। इस एकादशी को विष्णु भगवान सोते हुए करवट बदलते हैं। इस दिन त्रिलोकी-नाथ श्री विष्णु भगवान की पूजा की जाती है। इसमें चावल और दही सहित चाँदी का दान दिया जाता है। इस दिन रात्रि को जागरण करना चाहिये। इस प्रकार उपवास करने से मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर स्वर्ग लोक को जाता है। जो मनुष्य पापों को…
अयोध्यापुरी दुर्गा चौक में विजय बहादुर के गीतों की धूम”
विजय बहादुर की धमाकेदार प्रस्तुति लोक सदन भागीरथी यादव कोरबा – दर्री क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 52 अयोध्यापुरी स्थित दुर्गा चौक गणेश पंडाल में सोमवार की रात संगीत और भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिला। लोकप्रिय गायक विजय बहादुर ने अपनी शानदार गायकी और ऊर्जावान प्रस्तुति से माहौल को झूमने पर मजबूर कर दिया। गणेश उत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र की बड़ी संख्या में महिलाएँ, युवा और बुज़ुर्ग शामिल हुए। उनके गीतों पर श्रोता देर रात तक थिरकते और तालियों की गड़गड़ाहट से पंडाल गूंजता रहा। पूरा दुर्गा चौक एक उत्सवधर्मी रंग में रंग गया। स्थानीय समिति ने बताया कि इस बार गणेश उत्सव को यादगार बनाने के उद्देश्य से इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की सफलता पर समिति ने सभी आगंतुकों और कलाकार विजय बहादुर का आभार व्यक्त किया।
चांदी के तिगड़े पर शांतिनाथ भगवान को विराजमान कर मनाया गया स्नात्र महोत्सव
Loksadan रायपुर । सीमंधर स्वामी जैन मंदिर में सौ से ज्यादा बच्चे संडे की शुरुआत स्नात्र महोत्सव से करने लगे हैं। सीमंधर स्वामी जैन मंदिर व दादाबाड़ी ट्रस्ट के अध्यक्ष संतोष बैद व महासचिव महेन्द्र कोचर ने बताया कि इस भौतिक युग में बच्चों के जीवन को धर्म के मार्ग पर मोड़ना जरूरी है इसी उद्देश्य से गुरुदेव की प्रेरणा से प्रति संडे बच्चों को स्नात्र पूजा, चंदन पूजा व पूजा विधि के सुत्रों का अध्ययन कराया जाता है। मेरु शिखर नव्हरावे ओ सुरपति , मेरु शिखर नवराव्हे , घड़ा एक सौ आठ भरी ने , प्रभु जी ने नवहन करावे के पवित्र आत्म कल्याणकारी श्लोकों के साथ जब एक साथ सभी बच्चों ने सीमंधर स्वामी जिन मंदिर में प्रभु प्रतिमा के सामने सामूहिक स्वर में स्नात्र महोत्सव मनाया तो मंदिर में अलौकिक दृश्य उपस्थित हो गया। ट्रस्टी नीलेश गोलछा ने बताया कि 126 बच्चों को तीर्थंकर परमात्मा के जन्मकल्याणक की , तीर्थंकरों के जन्म से तीन ज्ञान व व अतिशय बलों की जानकारी देकर मेरुशिखर पर स्नात्र महोत्सव कराया गया । जिनप्रतिमा के 9 अंगों के पूजन की विधि की जानकारी देकर नवांगी पूजा कराई गई , जैन धर्म में ही भगवान की प्रतिमा में भक्तों द्वारा सीधे पूजन का विधान है । बच्चों को पुरस्कृत किया गया। रविवार को प्रभावना के लाभार्थी श्रीमति वर्तिका वर्धमान वैभव चोपड़ा व संतोष सरला बैद परिवार है । ट्रस्टी डॉ योगेश बंगानी ने आगे बताया कि चारों दादागुरुदेव के सम्मुख विधिपूर्वक गुरुवंदन की प्रक्रिया सिखाई गई , बच्चों ने दादागुरुदेव का विधिपूर्वक खमासमना देकर वन्दन किया। अंत में दादागुरुदेव इक्तिसा का पाठ किया गया ।
“निहारिका गणेशोत्सव भंडारे में उमड़ी भक्तों की भीड़”
लोकसदन। निहारिका महानदी कॉम्प्लेक्स में गणेशोत्सव भंडारे पर उमड़ रही भीड़, आज भजन संध्या का आयोजन भंडारे में प्रसाद वितरित करते महानदी कॉम्प्लेक्स के व्यवसायी। आज भजन संध्या का आयोजन सायं 6 बजे से कोरबा। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर निहारिका महानदी कॉम्प्लेक्स परिसर में व्यवसायियों द्वारा गाजे-बाजे के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई है। यहां प्रतिदिन भोग व भंडारे का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें हजारों भक्तगण प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। इसी क्रम में आज सोमवार, 1 सितंबर को हलवा और चने का भोग वितरण किया जाएगा। साथ ही शाम 6 बजे से दर्री जमनीपाली भजन मंडली द्वारा भजन संध्या का आयोजन होगा। इस अवसर पर रामप्रसाद साहू, श्रीमती शांति साहू, धृति साहू, दीक्षा यादव और गोपी यादव अपनी प्रस्तुतियां देंगे। तबला वादक देवेश विशेष संगति करेंगे। महानदी कॉम्प्लेक्स समिति के अध्यक्ष डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने क्षेत्रवासियों, श्रद्धालुओं व धर्मप्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर प्रसाद ग्रहण करने व भजन संध्या का लाभ उठाने की अपील की है।
“बोईदा सरपंच संजय राज ने गणेश पंडाल में लिया आशीर्वाद”
Loksadan। हरदीबाजार – ग्राम पंचायत बोईदा सरपंच संजय राज ने बोईदा,बरपारा,वासु बाबा चौक,आवापारा,अटल चौक,सराईपाली,लीमभांठा,मौहाडीह,नायकपारा,ओढ़ालीडीह के सभी गणेश पंडालों में पहुंचकर दर्शन कर भगवान गणेश की पूजा अर्चना की और ग्रामवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने समितियों एवं उपस्थित ग्रामीणों के साथ भजन – कीर्तन करते हुए ढोल भी सरपंच संजय राज द्वारा बजाया गया।इस दौरान सरपंच संजय राज ने युवाओं के साथ गणपति बप्पा मोरिया के जयकारे लगाते हुए नजर आए।
“पद्मनाभस्वामी थीम पर 111 फीट पंडाल, 21 फीट गणेश प्रतिमा के दर्शन को उमड़ा जनसैलाब”
Loksadan। कोरबा/कटघोरा :- गणेशोत्सव के पावन अवसर पर कटघोरा नगर एक बार फिर भक्ति और श्रद्धा का गढ़ बन गया है। जयदेवा गणेशोत्सव समिति द्वारा आयोजित “कटघोरा का राजा” का भव्य आयोजन इस वर्ष भी अपनी अनूठी भव्यता और धार्मिक आस्था के कारण देशभर में सुर्खियों में है। रविवार को गणपति बप्पा के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। इस बार पंडाल का स्वरूप केरल स्थित पद्मनाभस्वामी मंदिर की तर्ज पर तैयार किया गया है। 111 फीट ऊँचे इस पंडाल में 21 फीट ऊँची श्री गणेश प्रतिमा विराजमान है,जिसका अलौकिक स्वरूप श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रहा है। प्रतिमा के साथ ही जीवंत हनुमान जी की प्रतिमा,विविध धार्मिक झांकियां और आकर्षक साज-सज्जा भक्तों को अपनी ओर खींच रही हैं। कारीगरों की महीनों की मेहनत भव्य पंडाल कोलकाता से आए कुशल कारीगरों ने एक माह से भी अधिक समय तक दिन-रात परिश्रम कर तैयार किया है। प्रतिमा और झांकियों का निर्माण राजनांदगांव जिले के थनौद ग्राम स्थित राधे आर्ट गैलरी में हुआ है। समिति हर वर्ष नई थीम पर भव्य पंडाल सजाने की परंपरा निभाती आ रही है। यही कारण है कि “कटघोरा का राजा” अब केवल कोरबा ही नहीं,बल्कि प्रदेश और देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है। श्रद्धालुओं का सैलाब भक्तों का उत्साह इस बार देखने लायक है। कोरबा जिले के अलावा जांजगीर-चांपा,बिलासपुर,अंबिकापुर, रायगढ़,शक्ति और कोरिया जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भीड़ में महिलाएं,बच्चे और बुजुर्ग सभी शामिल होकर गणपति बप्पा के दर्शन का लाभ ले रहे हैं। विशेष रूप से युवा और बच्चे पंडाल में आकर्षक झांकियों और प्रतिमाओं के साथ फोटो और सेल्फी लेते दिखाई दे रहे हैं। गंगा आरती ने बांधा समा आरती के समय प्रस्तुत की जा रही गंगा आरती की थीम श्रद्धालुओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय हो रही है। संगीतमय आरती के दौरान सैकड़ों भक्त एक स्वर में बप्पा की जय-जयकार करते हैं और भक्ति रस में डूब जाते हैं। डमरू,मंजीरा,ढोल-नगाड़े और शंखनाद से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की है। कटघोरा थाना प्रभारी धर्मनारायण तिवारी स्वयं पंडाल स्थल और मेले की व्यवस्थाओं पर नजर रख रहे हैं। नगर में यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया है। साथ ही “सजग कोरबा” के फ्लेक्स और म्यूजिकल संदेशों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भीड़ में सुरक्षित और सतर्क रहने की अपील की जा रही है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा भव्य आयोजन से कटघोरा नगर की रौनक भी देखते ही बन रही है। मेले में सजाई गई दुकानों पर खिलौनों,मिठाइयों और सजावटी सामानों की खरीददारी से बाजार गुलजार हैं। स्थानीय छोटे व्यापारी और अस्थायी दुकानदारों के लिए यह आयोजन अतिरिक्त आय का साधन बन गया है। आयोजन का महत्व और परंपरा 27 अगस्त से प्रारंभ हुआ यह गणेशोत्सव अब चरम पर है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग दर्शन के लिए आ रहे हैं और रात देर तक भक्ति गीतों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद ले रहे हैं। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है,बल्कि सामाजिक एकता,सांस्कृतिक संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाना भी है कटघोरा का राजा अब श्रद्धा,उत्साह और भक्ति का ऐसा केंद्र बन चुका है,जहां पहुंचकर हर कोई भक्तिभाव में सराबोर हो जाता है।
*कटघोरा का राजा बना आकर्षण का केंद्र :
Loksadan. पद्मानाभस्वामी थीम पर सजा 111 फीट का भव्य पंडाल.. 21 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा के दर्शन को उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ कोरबा/कटघोरा, 31 अगस्त 2025: कटघोरा में आयोजित जयदेवा गणेशोत्सव समिति का ऐतिहासिक आयोजन इस बार भी श्रद्धालुओं के लिए भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम बना हुआ है। रविवार को “कटघोरा का राजा” श्री गणेश जी के दर्शन और पद्मानाभस्वामी मंदिर की भव्य झलक प्रस्तुत करते 111 फीट ऊंचे आकर्षक पंडाल को देखने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। समिति की ओर से प्रतिवर्ष विशाल गणेश प्रतिमा स्थापित की जाती है। इस बार भी 111 फिट ऊंचा केरल का पद्मानाभस्वामी का आकर्षक पंडाल, 21 फीट ऊंचे गणेश जी का भव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। गणेश प्रतिमा के साथ ही हनुमान जी की जीवंत प्रतिमा और अन्य धार्मिक झांकियां भी लोगों को अपनी ओर खींच रही हैं। खासकर युवा और बच्चे यहां पर सेल्फी लेते हुए नजर आते हैं। भव्य पंडाल का निर्माण कोलकाता से आए कारीगरों ने एक माह से भी अधिक समय तक दिन-रात मेहनत कर तैयार किया है। प्रतिमा व झांकियों का निर्माण राजनांदगांव जिले के थनौद ग्राम स्थित राधे आर्ट गैलरी में हुआ है। समिति की परंपरा है कि हर साल अलग थीम पर पंडाल का निर्माण किया जाता है, “कटघोरा का राजा” को देखने कोरबा जिले के अलावा जांजगीर चांपा, बिलासपुर, अम्बिकापुर, रायगढ़, शक्ति, कोरिया के लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे है और यही कारण है कि “कटघोरा का राजा” अब सिर्फ कोरबा जिले ही नहीं, बल्कि प्रदेश और देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है। आरती के समय आयोजित “गंगा आरती” की थीम श्रद्धालुओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है। संगीतमय आरती के दौरान नगर और आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होकर भक्ति रस में डूब जाते हैं। *सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद* श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की है। कटघोरा थाना प्रभारी धर्मनारायण तिवारी स्वयं गणेश पंडाल, मेले और सड़कों पर नजर रखे हुए हैं। यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए नगर के भीतर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है और जगह-जगह पुलिस बल तैनात है। इसके अलावा “सजग कोरबा का फ्लेक्स व म्यूजिकल मैसेज” के माध्यम से लगातार श्रद्धालुओं को भीड़ में सुरक्षित और सतर्क रहने की अपील की जा रही है। 27 अगस्त से शुरू हुए गणेशोत्सव का रंग अब और गहराता जा रहा है। रविवार को उमड़ी विशाल भीड़ ने यह साबित कर दिया कि कटघोरा का राजा अब आस्था, उत्साह और भक्ति का ऐसा केंद्र बन चुका है, जहां पहुंचकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है।
















