भारत को ग्लोबल इनोवेशन हब बनाने की बड़ी पहल

✍️ भागीरथी यादव    केंद्र सरकार ने शनिवार को 1 लाख करोड़ रुपये का रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) फंड लॉन्च किया है, जो देश में निजी क्षेत्र आधारित शोध और तकनीकी विकास को नई रफ्तार देगा। पंचकूला में इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल 2025 में विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह फंड प्रयोगशालाओं की तकनीक को सीधे बाजार तक पहुंचाने में गेमचेंजर साबित होगा।   सरकार द्वारा मंजूर यह फंड एआई, बायोटेक, क्लीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर और डिजिटल इकॉनमी जैसे फ्रंटियर सेक्टर्स पर केंद्रित रहेगा। फंड का संचालन ANRF के माध्यम से होगा और सहायता कम-ब्याज ऋण व इक्विटी निवेश के रूप में दी जाएगी।   डॉ. सिंह ने उद्योग जगत, स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं से “राष्ट्रीय साझेदारी परियोजना” के रूप में इसमें सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत@2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए यह फंड देश को तकनीक आयातक से तकनीक निर्यातक राष्ट्र की श्रेणी में ले जाने का मार्ग तैयार करेगा।

इंडिगो की उड़ान सेवाएँ पटरी से उतरीं, देशभर में हज़ारों यात्री बेहाल

✍️ भागीरथी यादव   शनिवार को भी इंडिगो एयरलाइंस की अव्यवस्था जारी रही, जिसके चलते देशभर के एयरपोर्टों पर हज़ारों यात्री घंटों फंसे रहे। मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद और गुवाहाटी जैसे प्रमुख हवाईअड्डों पर लंबी कतारें और भीड़ ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दीं।   इंडिगो ने शनिवार सुबह तक 109 उड़ानें रद्द कीं। केवल दिल्ली एयरपोर्ट पर ही 106 उड़ानें रद्द हुईं, जबकि हैदराबाद से 69 उड़ानों के रद्द होने की पुष्टि हुई। पूर्वोत्तर में स्थिति और खराब रही—गुवाहाटी एयरपोर्ट पर यात्रियों को बिना सूचना घंटों इंतज़ार करना पड़ा।   कई यात्रियों ने शिकायत की कि री-शेड्यूल की गई उड़ानें भी अंतिम समय पर रद्द कर दी गईं, जिससे परिवारों और कनेक्टिंग यात्रियों को भारी परेशानी हुई।   इस व्यापक अव्यवस्था के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय सक्रिय हुआ है। मंत्रालय ने इंडिगो को तात्कालिक सुधार उपाय लागू करने का आदेश दिया है। रद्द उड़ानों पर ऑटोमैटिक फुल रिफंड, फंसे यात्रियों के लिए होटल ठहराव, वरिष्ठ नागरिकों को लाउंज एक्सेस, तथा देर से चल रही उड़ानों के लिए स्नैक्स व जरूरी सुविधाएँ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।   सरकार ने बताया कि उड़ान संचालन आधी रात तक स्थिर होने की उम्मीद है और अगले कुछ दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी।

रांची से बड़ी खबर: खुटी के मुरहू में हिस्ट्रीशीटर सीनू पूर्ति की नृशंस हत्या, सिर–धड़ अलग-अलग स्थानों से बरामद

  डॉग स्क्वॉड और फॉरेंसिक टीम की मदद से पुलिस ने खोला हत्या का पूरा राज   रांची/खुटी। खुटी जिले के मुरहू थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। कुख्यात हिस्ट्रीशीटर सीनू पूर्ति की बर्बर तरीके से हत्या कर शव को टुकड़ों में काटकर अलग-अलग स्थानों पर दफनाने की घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। पुलिस ने डॉग स्क्वॉड और फॉरेंसिक टीम की मदद से शव के सिर और धड़ को दो अलग-अलग जगहों से बरामद किया।   ● पुरानी रंजिश पर शक, कानू मुंडा हत्याकांड से जुड़ रही कड़ियां   प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मामला पुरानी रंजिश का लग रहा है। सीनू पूर्ति वर्ष 2022 में हुए कानू मुंडा हत्याकांड का आरोपी था और इसी मामले में लंबे समय तक जेल में बंद रहा। कुछ ही दिन पहले वह जेल से बाहर आया था। जेल से छूटने के बाद वह अचानक लापता हो गया था, जिसके बाद परिवार ने मुरहू थाना में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।   ● खेत से मिली क्षत-विक्षत लाश   3 दिसंबर को पुलिस को मुरहू क्षेत्र के एक खेत में मानव शरीर के कटे हिस्से दफन होने की सूचना मिली। खुदाई कर जब पुलिस ने पहले धड़ और फिर दूसरे स्थान से सिर बरामद किया, तब पहचान सीनू पूर्ति के रूप में हुई।   ● हत्या का तरीका भी कानू मुंडा केस जैसा   पुलिस का मानना है कि जिस तरह वर्ष 2022 में कानू मुंडा की निर्दयतापूर्वक हत्या की गई थी, उसी पैटर्न पर सीनू की भी हत्या की गई है — पहले धारदार हथियार से वार, फिर शरीर के टुकड़े कर अलग-अलग जगह दफनाना।   ● पुलिस ने बनाई विशेष टीम, आरोपियों की तलाश तेज   मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने ✔ विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है ✔ डॉग स्क्वॉड व फॉरेंसिक विभाग की तकनीकी सहायता ली जा रही है ✔ इलाके में छापेमारी जारी है और संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है   पुलिस का कहना है कि जल्द ही हत्याकांड की पूरी साजिश का पर्दाफाश कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।

गांधी मूर्ति चौराहे से छात्र का अपहरण, कोचिंग मैनेजर की सूझबूझ से 5 घंटे में सकुशल बरामद

✍️ भागीरथी यादव    मुरादाबाद में दिनदहाड़े बड़ा मामला सामने आया है। अमरोहा में कोचिंग करने वाले छात्र अरुण कुमार को बुधवार दोपहर गांधी मूर्ति चौराहे से चार युवकों ने फॉर्म भरने के बहाने अपहरण कर लिया। अपहर्ताओं ने उसे धमकाकर 3800 रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए और फिरौती की डिमांड बढ़ाते-बढ़ाते 50 हजार रुपये तक पहुंच गई।   घटना की जानकारी मिलते ही कोचिंग सेंटर मैनेजर प्राची उपाध्याय ने पुलिस को सूचना दी और खुद भी छात्र की तलाश में जुट गईं। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन ट्रेस कर आरोपियों का पीछा शुरू किया। अपहर्ता अरुण को ईदगाह के पास एक मकान में छिपाकर राशि न देने पर जान से मारने की धमकी दे रहे थे।   प्राची उपाध्याय ने सूझबूझ दिखाते हुए आरोपियों को रुपये देने के बहाने ईदगाह के पास बुलाया और मौके पर मौजूद पुलिस टीम की मदद से चारों अभियुक्तों को दबोच लिया। अरुण को सकुशल बरामद कर लिया गया।   सीओ सिटी अभिषेक यादव के अनुसार, सभी चार अभियुक्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। प्राची उपाध्याय द्वारा की गई तत्परता और रिकॉर्डिंग ने पुलिस की कार्रवाई आसान कर दी।

उत्तर प्रदेश में सड़क क्रांति: एक्सप्रेसवे और हाईवे नेटवर्क ने बदली विकास की तस्वीर

✍️ भागीरथी यादव   लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में उत्तर प्रदेश सड़क अवसंरचना के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग और ग्रामीण सड़कों का विशाल नेटवर्क प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति दे रहा है। देश में सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे नेटवर्क 2017 से पहले यूपी में केवल 3 एक्सप्रेसवे थे, जबकि आज यह संख्या बढ़कर 22 हो गई है। गंगा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए उत्तर–दक्षिण कॉरिडोर का विकास तेजी से हो रहा है। राष्ट्रीय राजमार्गों में 41% योगदान पिछले दो दशकों में यूपी का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 5,599 किमी से बढ़कर 12,292 किमी हो गया है। देश के कुल राष्ट्रीय राजमार्गों में प्रदेश की हिस्सेदारी 7.48% से बढ़कर 41% पहुंच गई है। शहरों से गांव तक आसान कनेक्टिविटी बेहतर सड़कों से यातायात सुगम हुआ है, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है। ग्रामीण सड़कों का तेज विस्तार प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण मार्गों की कुल लंबाई 2017 से अब तक 77,425 किमी तक पहुंच गई है, जिससे अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी मजबूत हुई है। योगी सरकार का लक्ष्य 2029 तक यूपी को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाना है, जिसके लिए “सड़कों का गोल्डन नेटवर्क” आधार साबित हो रहा है।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: देशभर की जांच अब CBI के हवाले

  देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा कदम उठाते हुए इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने इसे अन्य साइबर मामलों से अलग रखते हुए उच्च प्राथमिकता पर जांच करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल ठगी को अंजाम देने में जिन बैंक अकाउंट्स और बैंकरों की भूमिका रही है, उनकी जांच भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत होगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए RBI को पक्षकार बनाया और पूछा कि संदिग्ध खातों की पहचान और रकम को फ्रीज करने के लिए AI–ML सिस्टम कब लागू किया जाएगा। आईटी इंटरमीडियरी रूल्स 2021 के तहत सभी एजेंसियों व प्लेटफॉर्म्स को CBI को पूर्ण सहयोग देने का आदेश दिया गया है। जिन राज्यों ने अभी तक सीबीआई को सामान्य सहमति नहीं दी है, उन्हें भी आईटी एक्ट से जुड़े मामलों में सहमति देने के निर्देश दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़ने पर इंटरपोल की मदद भी ली जा सकती है। टेलीकॉम कंपनियों द्वारा फर्जी पहचान पर सिम जारी करने की लापरवाही पर कोर्ट ने दूरसंचार विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। सभी राज्यों को तत्काल साइबर क्राइम सेंटर स्थापित करने तथा साइबर अपराधों में जब्त मोबाइल व डिजिटल डिवाइस का डेटा सुरक्षित रखने का आदेश दिया गया है। साथ ही आईटी एक्ट 2021 में दर्ज सभी एफआईआर को सीबीआई को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि इस स्कैम में सबसे ज्यादा सीनियर सिटिज़न्स पीड़ित हुए हैं, जिन्हें धमकाकर और झूठी “ऑनलाइन गिरफ्तारी” दिखाकर ठगा गया।

डिजिटल-अरेस्ट स्कैम पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: CBI को देशभर में स्वतंत्र जांच का आदेश, संदिग्ध बैंक खातों पर बिना FIR भी लगेगी रोक

  नई दिल्ली। देशभर में तेजी से फैल रहे डिजिटल-अरेस्ट स्कैम पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सोमवार को सीबीआई को पूरे भारत में स्वतंत्र जांच का अधिकार दे दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने स्पष्ट तौर पर कहा कि साइबर फ्रॉड में उपयोग किए गए खातों को एफआईआर दर्ज न होने पर भी फ्रीज किया जा सकेगा, ताकि अपराध की रकम को तुरंत रोका जा सके। बैंकिंग सेक्टर की भूमिका की भी होगी जांच सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह बैंकिंग सेक्टर में शामिल कर्मचारियों की भूमिका की भी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करे। अदालत ने कहा कि यदि डिजिटल-अरेस्ट स्कैम इतना बड़ा रूप ले चुका है, तो इस पर देश की शीर्ष जांच एजेंसी को तुरंत और प्राथमिकता के साथ कार्रवाई करनी होगी।   RBI को कोर्ट ने किया तलब डिजिटल फ्रॉड रोकने के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर कोर्ट ने RBI से रिपोर्ट मांगी है। बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ी संस्था को यह बताना होगा कि – AI/ML आधारित सिस्टम कब तक तैयार होंगे, – कैसे ये सिस्टम संदिग्ध खातों की पहचान कर तुरंत फंड ब्लॉक कर सकेंगे। इंटरमीडियरीज को आदेश: CBI को पूरा सहयोग दें आईटी नियम 2021 के तहत काम करने वाले सभी इंटरमीडियरीज — सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर्स और ऑनलाइन नेटवर्क — को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि वे सीबीआई की हर जांच में पूरा सहयोग करें। जिन राज्यों ने सामान्य सहमति नहीं दी, उन्हें तुरंत अनुमति देने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने उन सभी राज्यों से कहा है जो अब तक सीबीआई को सामान्य सहमति नहीं दे रहे थे कि वे आईटी एक्ट के तहत जांच की अनुमति तुरंत दें, ताकि पूरे देश में एकजुट होकर कार्रवाई हो सके।   इंटरपोल की मदद भी ले सकेगी CBI साइबर अपराधों के क्रॉस-बॉर्डर नेटवर्क को देखते हुए कोर्ट ने सीबीआई को इंटरपोल के सहयोग से भी जांच आगे बढ़ाने की अनुमति दी है।   टेलीकॉम कंपनियों की लापरवाही पर भी कोर्ट की सख्त टिप्पणी अदालत ने पाया कि टेलीकॉम कंपनियों की तरफ से – सिम कार्ड जारी करने में भारी लापरवाही, – एक ही नाम पर कई सिम कार्ड जारी होने जैसी गंभीर खामियां सामने आई हैं। इससे डिजिटल-अरेस्ट स्कैम को संचालित करने वाले गिरोहों को आसान रास्ता मिलता है। इसलिए दूरसंचार विभाग (DoT) को सख्त उपायों का प्रस्ताव पेश करने का निर्देश दिया गया है। हर राज्य में साइबरक्राइम सेंटर जल्द स्थापित करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को आदेश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जल्द से जल्द राज्य साइबर क्राइम सेंटर स्थापित करें, ताकि डिजिटल अपराधों पर प्रभावी रोक लग सके। डिजिटल-अरेस्ट स्कैम तक सीमित है आदेश कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश फिलहाल केवल डिजिटल-अरेस्ट स्कैम के लिए है। अन्य साइबर अपराधों पर निगरानी और कार्रवाई से जुड़े निर्णय बाद में लिए जाएंगे। मोबाइल डिवाइस के डेटा को सुरक्षित रखने का निर्देश आईटी नियमों के तहत दर्ज साइबर अपराध मामलों से जुड़े मोबाइल डिवाइस और डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने का आदेश भी दिया गया है, ताकि जांच प्रभावित न हो।

गाजियाबाद में सनसनीखेज वारदात: प्रेम संबंध टूटने पर युवती पर बरसाईं गोलियां, हालत गंभीर

  गाजियाबाद से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। नांगलाबेर गांव, भोजपुर थाना क्षेत्र में शनिवार शाम उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक युवक ने अपनी पूर्व प्रेमिका पर गोलियां चला दीं। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। जानकारी के अनुसार, 28 वर्षीय प्रदीप कुमार पिछले 5 साल से युवती के साथ रिश्ते में था। लेकिन हाल ही में 22 वर्षीय MSc छात्रा की शादी कहीं और तय हो गई, जिससे आरोपी बौखला गया। गुस्से और प्रतिशोध में उसने युवती के घर में घुसकर फायरिंग कर दी। फायरिंग में एक गोली छात्रा के कान के पास हड्डी में जाकर फंस गई, जिससे उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई है। परिजनों और पड़ोसियों ने घायल युवती को तुरंत मोदीनगर के अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से उसे बेहतर इलाज के लिए मेरठ रेफर कर दिया गया है। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव और दहशत का माहौल है। आरोपी प्रदीप फरार है और पुलिस उसकी तलाश में दबिश दे रही है। मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा होने के कारण पुलिस हर पहलू पर गंभीरता से जांच कर रही है। एक बार फिर प्रेम संबंधों में अनियंत्रित गुस्से और जुनून ने एक मासूम जिंदगी को मौत के मुंह में धकेल दिया है। समाज में ऐसे मामलों ने चिंता की नई लकीर खींच दी है।

नालंदा में जमीन विवाद ने लिया खतरनाक मोड़, घात लगाकर गोली मारकर मछलीपालक घायल — गांव में दहशत का माहौल

नालंदा। परबलपुर थाना क्षेत्र के विजयपुरा गांव में वर्षों से चले आ रहे गोतिया विवाद ने सोमवार को हिंसक रूप ले लिया। तालाब पर मछलियों को दाना डालने गए दिलीप कुमार पर घात लगाकर गोली चलाई गई, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। गोली उनके हाथ में लगी है और फिलहाल बिहारशरीफ सदर अस्पताल में उनका इलाज जारी है। घायल ने बताए हमलावरों के नाम दिलीप कुमार ने बताया कि वे रोज की तरह तालाब पर दाना डालने पहुंचे थे। तभी उनके चचेरे भाई—गजेंद्र कुमार और रंजीत कुमार—अपने गुर्गों के साथ घात लगाए बैठे थे। दिलीप के मुताबिक करीब 10 बीघा जमीन के बंटवारे पर विवाद जारी है, लेकिन उन्होंने किसी तरह की लड़ाई में शामिल न रहते हुए भी आज उन पर जानलेवा हमला कर दिया गया। “जान मारने की नीयत से घेरकर हमला किया गया”—दिलीप कुमार घायल ने बताया कि पहले उनकी पिटाई की गई और फिर नजदीक से गोली चलाई गई। प्राथमिक इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुआ, जहाँ से गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें सदर अस्पताल रेफर किया गया। पुलिस मौके पर, खोखा बरामद — हमलावरों की तलाश तेज घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और हिलसा डीएसपी–2 कुमार ऋतुराज मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल से एक खोखा बरामद किया है। डीएसपी ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला जमीन विवाद का प्रतीत होता है। डीएसपी कुमार ऋतुराज का बयान “हम सभी बिंदुओं पर जांच कर रहे हैं। हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है।” गांव में दहशत, बढ़ते विवादों पर उठे सवाल विजयपुरा गांव में दिनदहाड़े हुई फायरिंग ने लोगों में भय का माहौल बना दिया है। जमीन विवाद से जुड़े लगातार बढ़ते अपराधों ने स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि जमीन के झगड़ों ने किस तरह ग्रामीण इलाकों को अपराध की आग में झोंक रखा है।

दिल्ली के निजी अस्पताल में शर्मनाक हरकत: बुजुर्ग महिला के शव से सोने के गहने चोरी, वीडियो वायरल होने पर मचा हड़कंप

✍️ भागीरथी यादव    दिल्ली से इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज के दौरान मृत हुई बुजुर्ग महिला के शव से सोने के गहने चुरा लिए गए। यह घटना 11 नवंबर की बताई जा रही है, जिसका सीसीटीवी फुटेज सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। फुटेज में अस्पताल की एक महिला स्टाफ मृतका के कानों के टॉप्स और गले की चेन उतारते हुए साफ दिखाई देती है।   अस्पताल की लीपापोती और दबाव में आया एक्शन   परिजनों का आरोप है कि शुरुआत में अस्पताल प्रबंधन ने चोरी पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। लेकिन जब वीडियो सामने आया, तब जाकर अस्पताल प्रशासन ने बयान जारी करते हुए बताया कि गहने चोरी करने वाली महिला स्टाफ को टर्मिनेट कर दिया गया है। हालांकि, शुरुआत में अस्पताल की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।   यह हरकत न सिर्फ पेशेवर नैतिकता के खिलाफ है, बल्कि मानवता को भी शर्मसार करती है। वायरल वीडियो ने अस्पताल की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।   पुलिस की उदासीनता भी आई सामने   परिजनों ने गहने गायब होने की शिकायत 12 नवंबर को ही कृष्णा नगर थाने में दर्ज कराई थी, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने 20 दिनों तक मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। परिवार का कहना है कि पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और बार-बार टालती रही।   लगातार दबाव और सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग के बाद अब जाकर पुलिस ने FIR दर्ज की है। पुलिस की इस लापरवाही ने भी सिस्टम पर गंभीर सवाल उठा दिए हैं, खासकर तब जब वीडियो में स्टाफ की करतूत साफ दिख रही है।   कैसे हुआ खुलासा?   महिला को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। परिजनों के अनुसार, उस समय गहने मौजूद थे। देर रात ‘क्रिटिकल’ बताकर महिला को सरकारी अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन तब तक मौत हो चुकी थी। शव पर गहने नहीं मिले तो परिवार को संदेह हुआ। सीसीटीवी जांच में चोरी की पूरी वारदात सामने आ गई।   समाज और सिस्टम दोनों पर उठे सवाल यह घटना सिर्फ एक अस्पताल की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करती है— एक तरफ मरीज की मौत का दुख झेलता परिवार, दूसरी ओर अस्पताल स्टाफ की शर्मनाक करतूत और पुलिस की उदासीनता। परिजन अब न्याय की मांग कर रहे हैं, और इस मामले ने स्वास्थ्य सेवाओं में भरोसे को झकझोर कर रख दिया है।

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