*राष्ट्रीय राजमार्ग-130 किनारे* *खुले में राखड़ फेंके जाने से* *पर्यावरण और जनसुरक्षा पर* *मंडराया संकट, ग्रामीणों ने की* *जांच और कार्रवाई की मांग*
*सुशील जायसवाल*
*कोरबा/परला।* जिले में राखड़ (फ्लाई ऐश) के परिवहन और उसके सुरक्षित निस्तारण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग-130 से लगे ग्राम पंचायत परला क्षेत्र में सड़क किनारे बड़ी मात्रा में राखड़ डंप किए जाने का मामला सामने आया है। खुले में फैली राखड़ ने न केवल पर्यावरणीय नियमों की पालना पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है, बल्कि सड़क सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और प्रशासनिक निगरानी को लेकर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार राखड़ परिवहन से जुड़े कुछ ट्रांसपोर्टरों द्वारा निर्धारित नियमों की अनदेखी करते हुए सड़क किनारे खुले क्षेत्र में राखड़ डंप कर दी गई है। बताया जा रहा है कि यह डंपिंग लंबे समय से जारी है, जिसके कारण आसपास के क्षेत्र में धूल और प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले भी जिले के गुरसिया और अन्य क्षेत्रों में इसी प्रकार की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई के अभाव में समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।
*राजमार्ग किनारे फैली राखड़* *बनी चिंता का विषय*
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे दूर-दूर तक राखड़ का ढेर फैला हुआ दिखाई दे रहा है। तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही के बीच उड़ने वाली राखड़ की महीन धूल सड़क पर दृश्यता को प्रभावित कर रही है। इससे दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। वाहन चालकों का कहना है कि हवा चलने पर राखड़ के कण सड़क तक पहुंच जाते हैं, जिससे सामने से आने वाले वाहनों को देखने में परेशानी होती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि राखड़ का परिवहन निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाता और उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण होता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। लेकिन जिम्मेदार एजेंसियों की उदासीनता के कारण समस्या लगातार विकराल रूप धारण करती जा रही है।
*पर्यावरण पर पड़ रहा* *प्रतिकूल प्रभाव*
विशेषज्ञों के अनुसार फ्लाई ऐश के सूक्ष्म कण हवा के साथ फैलकर वातावरण को प्रदूषित करते हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से श्वसन संबंधी बीमारियां, एलर्जी, आंखों में जलन तथा त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। खुले में पड़ी राखड़ बारिश के दौरान बहकर आसपास की कृषि भूमि और जल स्रोतों तक पहुंच सकती है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता और जल की शुद्धता प्रभावित होने का खतरा रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में खेती और पशुपालन प्रमुख आजीविका का साधन है। ऐसे में यदि राखड़ खेतों तक पहुंचती है तो फसलों की उत्पादकता पर भी असर पड़ सकता है। इसके अलावा जल स्रोतों के प्रदूषित होने से ग्रामीणों के सामने पेयजल संकट की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
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*परिवहन नियमों की अनदेखी* पर* उठे सवाल
राखड़ परिवहन के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार सामग्री को सुरक्षित तरीके से ढंककर ले जाना तथा अधिकृत स्थलों पर ही उसका निस्तारण किया जाना आवश्यक है। इसके बावजूद सड़क किनारे खुले में राखड़ का पाया जाना कई सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नियमित निगरानी की जा रही होती तो इतनी बड़ी मात्रा में राखड़ डंप नहीं हो पाती।
लोगों का आरोप है कि संबंधित विभागों के बीच समन्वय की कमी और निगरानी तंत्र की कमजोरी के कारण नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है। यही वजह है कि समय-समय पर ऐसे मामले सामने आते रहते हैं।
*प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर* *उठी उंगली*
परला में सामने आए इस मामले ने प्रशासनिक निगरानी और जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली को लेकर भी बहस छेड़ दी है। ग्रामीणों का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे महत्वपूर्ण मार्ग के किनारे इतनी बड़ी मात्रा में राखड़ डंप होना संबंधित अधिकारियों की अनदेखी को दर्शाता है। लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में राखड़ डंप किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि राखड़ परिवहन से जुड़े वाहनों की जांच की जाए तथा यह पता लगाया जाए कि राखड़ कहां से लाई गई और किसके निर्देश पर सड़क किनारे डंप की गई। दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
*ग्रामीणों में आक्रोश, तत्काल* *कार्रवाई की मांग*
मामले को लेकर क्षेत्र के लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क किनारे डंप की गई राखड़ को तत्काल हटाया जाए तथा पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप उसका सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही जिम्मेदार व्यक्तियों और एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई कर जनता को यह विश्वास दिलाया जाए कि पर्यावरण और जनसुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो यह मामला जनआंदोलन का रूप भी ले सकता है। लोगों ने चेतावनी दी है कि पर्यावरण संरक्षण और जनहित के मुद्दे पर वे प्रशासन के समक्ष अपनी आवाज लगातार उठाते रहेंगे।
मुख्य बिंदु
राष्ट्रीय राजमार्ग-130 किनारे परला क्षेत्र में बड़ी मात्रा में राखड़ डंपिंग का मामला।
पर्यावरणीय मानकों और परिवहन नियमों के उल्लंघन के आरोप।
उड़ती धूल से स्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा पर खतरा।
कृषि भूमि और जल स्रोतों पर संभावित दुष्प्रभाव की आशंका।
ग्रामीणों ने जांच, दोषियों पर कार्रवाई और राखड़ हटाने की मांग की।
विभागीय निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल।
