छत्तीसगढ़ में बड़ा बदलाव: अब राजभवन जाना जाएगा ‘लोकभवन’ के नाम से

✍️ भागीरथी यादव   छत्तीसगढ़ में शासन प्रशासन ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राजभवन का नाम बदलकर ‘लोकभवन’ कर दिया है। गृह मंत्रालय, भारत सरकार से प्राप्त आदेश के अनुपालन में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना ने आज नाम परिवर्तन का आधिकारिक आदेश जारी किया।   सचिव ने बताया कि राज्यपालों के सम्मेलन–2024 में पूरे देश के राजभवनों का नाम अधिक जनकेंद्रित बनाने का सुझाव दिया गया था। इसी प्रस्ताव पर आगे बढ़ते हुए अब छत्तीसगढ़ में यह परिवर्तन प्रभावी हो गया है।   अब से सभी शासकीय दस्तावेज़, पत्राचार और सरकारी उपयोग में ‘राजभवन’ की जगह ‘लोकभवन’ लिखा व पढ़ा जाएगा।   विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम शासन के जनसहभागिता और लोक-केंद्रित दृष्टिकोण का प्रतीक है, जिससे राज्य की प्रशासनिक पहचान में एक नया अध्याय जुड़ गया है।

दर्री की ओर से आ रही इनोवा क्रिस्टा कार जमनीपाली NTPC मेन गेट के पास ग्रीन पार्क होटल की बाउंड्री से टकराई, चालक सुरक्षित

✍️ भागीरथी यादव दर्री। मंगलवार, 2 दिसंबर 2025, दोपहर 3 बजे दर्री की ओर से आ रही इनोवा क्रिस्टा कार मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे अचानक अनियंत्रित होकर जमनीपाली NTPC मेन गेट के पास स्थित ग्रीन पार्क होटल की बाउंड्री से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि होटल की बाउंड्री का एक हिस्सा पूरी तरह टूट गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वाहन तेज रफ्तार में था और अचानक आए मोड़ पर नियंत्रण बिगड़ने से कार सीधी बाउंड्री से टकरा गई। राहत की बात यह है कि कार चालक सुरक्षित है और किसी भी प्रकार की गंभीर चोट नहीं आई। हादसे की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। सौभाग्य से उस समय सड़क पर भीड़ नहीं थी, वरना यह दुर्घटना और गंभीर हो सकती थी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंचकर आगे की जांच में जुट गई है।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: देशभर की जांच अब CBI के हवाले

  देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा कदम उठाते हुए इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने इसे अन्य साइबर मामलों से अलग रखते हुए उच्च प्राथमिकता पर जांच करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल ठगी को अंजाम देने में जिन बैंक अकाउंट्स और बैंकरों की भूमिका रही है, उनकी जांच भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत होगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए RBI को पक्षकार बनाया और पूछा कि संदिग्ध खातों की पहचान और रकम को फ्रीज करने के लिए AI–ML सिस्टम कब लागू किया जाएगा। आईटी इंटरमीडियरी रूल्स 2021 के तहत सभी एजेंसियों व प्लेटफॉर्म्स को CBI को पूर्ण सहयोग देने का आदेश दिया गया है। जिन राज्यों ने अभी तक सीबीआई को सामान्य सहमति नहीं दी है, उन्हें भी आईटी एक्ट से जुड़े मामलों में सहमति देने के निर्देश दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़ने पर इंटरपोल की मदद भी ली जा सकती है। टेलीकॉम कंपनियों द्वारा फर्जी पहचान पर सिम जारी करने की लापरवाही पर कोर्ट ने दूरसंचार विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। सभी राज्यों को तत्काल साइबर क्राइम सेंटर स्थापित करने तथा साइबर अपराधों में जब्त मोबाइल व डिजिटल डिवाइस का डेटा सुरक्षित रखने का आदेश दिया गया है। साथ ही आईटी एक्ट 2021 में दर्ज सभी एफआईआर को सीबीआई को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि इस स्कैम में सबसे ज्यादा सीनियर सिटिज़न्स पीड़ित हुए हैं, जिन्हें धमकाकर और झूठी “ऑनलाइन गिरफ्तारी” दिखाकर ठगा गया।

डिजिटल-अरेस्ट स्कैम पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: CBI को देशभर में स्वतंत्र जांच का आदेश, संदिग्ध बैंक खातों पर बिना FIR भी लगेगी रोक

  नई दिल्ली। देशभर में तेजी से फैल रहे डिजिटल-अरेस्ट स्कैम पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सोमवार को सीबीआई को पूरे भारत में स्वतंत्र जांच का अधिकार दे दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने स्पष्ट तौर पर कहा कि साइबर फ्रॉड में उपयोग किए गए खातों को एफआईआर दर्ज न होने पर भी फ्रीज किया जा सकेगा, ताकि अपराध की रकम को तुरंत रोका जा सके। बैंकिंग सेक्टर की भूमिका की भी होगी जांच सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह बैंकिंग सेक्टर में शामिल कर्मचारियों की भूमिका की भी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करे। अदालत ने कहा कि यदि डिजिटल-अरेस्ट स्कैम इतना बड़ा रूप ले चुका है, तो इस पर देश की शीर्ष जांच एजेंसी को तुरंत और प्राथमिकता के साथ कार्रवाई करनी होगी।   RBI को कोर्ट ने किया तलब डिजिटल फ्रॉड रोकने के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर कोर्ट ने RBI से रिपोर्ट मांगी है। बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ी संस्था को यह बताना होगा कि – AI/ML आधारित सिस्टम कब तक तैयार होंगे, – कैसे ये सिस्टम संदिग्ध खातों की पहचान कर तुरंत फंड ब्लॉक कर सकेंगे। इंटरमीडियरीज को आदेश: CBI को पूरा सहयोग दें आईटी नियम 2021 के तहत काम करने वाले सभी इंटरमीडियरीज — सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर्स और ऑनलाइन नेटवर्क — को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि वे सीबीआई की हर जांच में पूरा सहयोग करें। जिन राज्यों ने सामान्य सहमति नहीं दी, उन्हें तुरंत अनुमति देने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने उन सभी राज्यों से कहा है जो अब तक सीबीआई को सामान्य सहमति नहीं दे रहे थे कि वे आईटी एक्ट के तहत जांच की अनुमति तुरंत दें, ताकि पूरे देश में एकजुट होकर कार्रवाई हो सके।   इंटरपोल की मदद भी ले सकेगी CBI साइबर अपराधों के क्रॉस-बॉर्डर नेटवर्क को देखते हुए कोर्ट ने सीबीआई को इंटरपोल के सहयोग से भी जांच आगे बढ़ाने की अनुमति दी है।   टेलीकॉम कंपनियों की लापरवाही पर भी कोर्ट की सख्त टिप्पणी अदालत ने पाया कि टेलीकॉम कंपनियों की तरफ से – सिम कार्ड जारी करने में भारी लापरवाही, – एक ही नाम पर कई सिम कार्ड जारी होने जैसी गंभीर खामियां सामने आई हैं। इससे डिजिटल-अरेस्ट स्कैम को संचालित करने वाले गिरोहों को आसान रास्ता मिलता है। इसलिए दूरसंचार विभाग (DoT) को सख्त उपायों का प्रस्ताव पेश करने का निर्देश दिया गया है। हर राज्य में साइबरक्राइम सेंटर जल्द स्थापित करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को आदेश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जल्द से जल्द राज्य साइबर क्राइम सेंटर स्थापित करें, ताकि डिजिटल अपराधों पर प्रभावी रोक लग सके। डिजिटल-अरेस्ट स्कैम तक सीमित है आदेश कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश फिलहाल केवल डिजिटल-अरेस्ट स्कैम के लिए है। अन्य साइबर अपराधों पर निगरानी और कार्रवाई से जुड़े निर्णय बाद में लिए जाएंगे। मोबाइल डिवाइस के डेटा को सुरक्षित रखने का निर्देश आईटी नियमों के तहत दर्ज साइबर अपराध मामलों से जुड़े मोबाइल डिवाइस और डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने का आदेश भी दिया गया है, ताकि जांच प्रभावित न हो।

करतला के वनांचल में सनसनी: झाड़ियों में मिली जली हुई लाश, हत्या की आशंका गहराई

कोरबा – करतला थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत औरई के पंडोपारा में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब जंगल की झाड़ियों के भीतर एक अज्ञात व्यक्ति की अधजली लाश बरामद हुई। शव की अवस्था देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि मृत्यु को 3 से 4 दिन बीत चुके हैं। घटनास्थल की परिस्थितियाँ इस ओर इशारा करती हैं कि हत्या के बाद पहचान छुपाने के लिए शव को जलाया गया होगा। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस मौके पर स्थानीय ग्रामीणों ने झाड़ियों में संदिग्ध लाश देखकर तुरंत पुलिस को जानकारी दी। करतला पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। शव की पहचान न हो पाने के चलते आसपास के गांवों में मुनादी करवाई जा रही है, वहीं पुलिस ने अन्य थाना क्षेत्रों से गुमशुदा व्यक्तियों की जानकारी भी मांग ली है।   फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड की मदद घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मौके पर फॉरेंसिक विशेषज्ञों और डॉग स्क्वायड को भी बुलाया है, ताकि हत्या की गुत्थी को जल्द सुलझाया जा सके।   एडिशनल एसपी नीतिश ठाकुर का बयान एडिशनल एसपी नीतिश ठाकुर ने बताया— “करतला क्षेत्र में अज्ञात लाश मिलने की सूचना पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की है। शव 3-4 दिन पुराना प्रतीत हो रहा है। मामले की गहन जांच की जा रही है और पहचान के प्रयास जारी हैं।” गांव में चर्चाओं का दौर तेज घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत और चर्चाओं का माहौल है। फिलहाल मौत के सही कारण का खुलासा मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही होगा।

गाजियाबाद में सनसनीखेज वारदात: प्रेम संबंध टूटने पर युवती पर बरसाईं गोलियां, हालत गंभीर

  गाजियाबाद से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। नांगलाबेर गांव, भोजपुर थाना क्षेत्र में शनिवार शाम उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक युवक ने अपनी पूर्व प्रेमिका पर गोलियां चला दीं। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। जानकारी के अनुसार, 28 वर्षीय प्रदीप कुमार पिछले 5 साल से युवती के साथ रिश्ते में था। लेकिन हाल ही में 22 वर्षीय MSc छात्रा की शादी कहीं और तय हो गई, जिससे आरोपी बौखला गया। गुस्से और प्रतिशोध में उसने युवती के घर में घुसकर फायरिंग कर दी। फायरिंग में एक गोली छात्रा के कान के पास हड्डी में जाकर फंस गई, जिससे उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई है। परिजनों और पड़ोसियों ने घायल युवती को तुरंत मोदीनगर के अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से उसे बेहतर इलाज के लिए मेरठ रेफर कर दिया गया है। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव और दहशत का माहौल है। आरोपी प्रदीप फरार है और पुलिस उसकी तलाश में दबिश दे रही है। मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा होने के कारण पुलिस हर पहलू पर गंभीरता से जांच कर रही है। एक बार फिर प्रेम संबंधों में अनियंत्रित गुस्से और जुनून ने एक मासूम जिंदगी को मौत के मुंह में धकेल दिया है। समाज में ऐसे मामलों ने चिंता की नई लकीर खींच दी है।

जिले में दर्दनाक घटना: पत्नी की यादों में टूट गया 50 वर्षीय किताब सिंह, फांसी लगाकर जीवन को कहा अलविदा

जिले से एक बेहद हृदयविदारक मामला सामने आया है। ग्राम बाइसेमर, चैतमा चौकी क्षेत्र में रहने वाले 50 वर्षीय किताब सिंह, पिता स्व. पूरन सिंह, ने अपने घर में फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। यह खबर सामने आते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। मिली जानकारी के अनुसार, किताब सिंह अपनी पत्नी कमलाबाई के मात्र तीन माह पहले हुए निधन के बाद से ही गहरे सदमे में थे। पत्नी की मृत्यु ने उन्हें भीतर से तोड़ दिया था। वह अक्सर गुमसुम रहते, घर में अकेले ही समय बिताते और उनका मन कहीं नहीं लगता था। अकेलेपन और दुख से जूझते-जूझते आखिरकार उन्होंने जिंदगी से हार मान ली। शनिवार की रात उन्होंने अपने घर में फांसी लगाकर दुखद कदम उठा लिया। परिजनों और ग्रामीणों को जब इसकी खबर लगी, तो पूरे गांव में मातम छा गया। लोग बताते हैं कि किताब सिंह अपनी पत्नी से बेहद लगाव रखते थे, और उनकी मौत ने उन्हें भीतर तक कमजोर कर दिया था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अस्पताल भिजवाकर मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि किताब सिंह मानसिक रूप से अत्यधिक तनाव और अकेलेपन का सामना कर रहे थे। यह घटना एक दर्दनाक याद दिलाती है कि अकेलापन और मानसिक आघात इंसान को किस कदर तोड़ सकता है। ऐसे समय में परिवार, समाज और साथ की जरूरत सबसे ज्यादा होती है।  

कौड़िया गांव में दर्दनाक घटना: 24 वर्षीय युवक ने जिंदगी से हारकर किया अंत, पूरे क्षेत्र में छाया मातम

  जिला मुख्यालय से मात्र 5 किमी दूर स्थित ग्राम कौड़िया से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहां 24 वर्षीय दुलेश साहू, पिता भूखन साहू, ने मानसिक तनाव के चलते अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है। परिजनों के अनुसार, दुलेश पिछले कुछ समय से गहरे मानसिक तनाव से गुजर रहा था। आज सुबह उसने तबीयत ठीक न होने की बात कहकर घर के ऊपर वाले कमरे में जाने की बात कही। काफी देर तक उसके बाहर न आने पर जब मां ऊपर पहुंचीं, तो वह स्तब्ध रह गईं। बेटे को ऐसी हालत में देखकर परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। दुलेश की अचानक हुई मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। परिवार के आंगन में चीख-पुकार और दर्द का माहौल बना हुआ है। पड़ोसी और ग्रामीण इस दुखद घटना से गहरे सदमे में हैं। मानसिक तनाव एक अदृश्य लड़ाई है, जिसे अक्सर लोग अकेले झेलते रहते हैं। यह घटना फिर याद दिलाती है कि समय रहते बातचीत और सहयोग किसी की जिंदगी बचा सकता है।

बलरामपुर से दिल को झकझोर देने वाली खबर: चार साल की मासूम के साथ दरिंदगी, पूरा इलाका सदमे में

  छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। शंकरगढ़ थाना क्षेत्र में मात्र चार साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना ने पूरे इलाके में खौफ और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, 16 वर्षीय नाबालिग आरोपी ने बच्ची को चॉकलेट देने का लालच देकर अपने साथ ले गया और उसके साथ घिनौनी हरकत की। मासूम पर हुई यह हैवानियत सुनकर हर किसी का दिल दहल उठा है। जब बच्ची की खोज में परिजन पहुंचे, तो मासूम की हालत देखकर उनके होश उड़ गए। बच्ची की मासूम आंखों में दर्द और भय साफ नजर आ रहा था। रोते-बिलखते परिजन उसे तुरंत थाने ले गए और आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत मिलते ही पुलिस ने तेजी दिखाते हुए आरोपी नाबालिग युवक को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच जारी है और पुलिस हर पहलू को गंभीरता से खंगाल रही है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। लोग गुस्से में हैं और मांग कर रहे हैं कि कानून ऐसी घटनाओं के खिलाफ और कठोर कार्रवाई करे, ताकि मासूमों के साथ ऐसी दरिंदगी दोबारा कोई न कर सके। समाज की आत्मा को झकझोर देने वाली यह घटना फिर याद दिलाती है कि बच्चियों की सुरक्षा को लेकर और सतर्क रहने की जरूरत है।

एसईसीएल प्रबंधन पर बढ़ा दबाव: भू-विस्थापित महिलाओं का आर-पार की लड़ाई का ऐलान

  कोरबा – कोरबा में एसईसीएल प्रबंधन की परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। अपनी वाजिब मांगों को लेकर भू-विस्थापितों का लगातार आंदोलन तेज होता जा रहा है। प्रबंधन की ओर से मिल रहे अधूरे और झूठे आश्वासनों से त्रस्त भू-विस्थापित महिलाओं ने अब संघर्ष को निर्णायक मोड़ देने की तैयारी कर ली है।   विरोध पर बैठी महिलाओं ने स्पष्ट किया है कि अब वे पीछे हटने वाली नहीं। वर्षों से अधिकारों की लड़ाई लड़ते-लड़ते थक चुकी ये महिलाएं अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। उनका कहना है कि जब तक उन्हें उनका हक नहीं मिलेगा, आंदोलन दिन-ब-दिन और मजबूत होता जाएगा।   लगातार प्रदर्शनों ने एसईसीएल प्रबंधन की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। कोरबा में यह मुद्दा अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है, जिसकी गूंज स्थानीय प्रशासन तक पहुँच चुकी है। भू-विस्थापितों के सवाल आज भी वही हैं— विकास के नाम पर विस्थापन तो हो गया, लेकिन अधिकारों का इंतजार कब तक?

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