राजिम कुंभ कल्प 2026: तैयारियों की समीक्षा, मांस-मछली और मदिरा बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध

✍️ भागीरथी यादव

 

 

गरियाबंद।

राजिम कुंभ कल्प 2026 की तैयारियों को लेकर राजिम के नए मेला मैदान में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने की। इस दौरान उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि कुंभ कल्प की तैयारियां 30 जनवरी तक हर हाल में पूरी की जाएं।

बैठक में कलेक्टर बीएस उइके, पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर, जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्री अग्रवाल ने बताया कि 1 फरवरी से 15 फरवरी तक राजिम कुंभ कल्प का आयोजन होगा, जिसमें शुभारंभ अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका सहित कई मंत्री शामिल होंगे।

मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कुंभ कल्प अवधि के दौरान राजिम नगरी और आसपास के क्षेत्रों में मांस, मछली और मदिरा की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने विद्युत विभाग को निर्बाध बिजली आपूर्ति, परिवहन विभाग को रात में भी बस संचालन सुनिश्चित करने, स्वास्थ्य विभाग को मौके पर त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही पुलिस और परिवहन विभाग को लगातार सड़क गश्त और यातायात व्यवस्था पर कड़ी निगरानी रखने को कहा गया।

खाद्य विभाग को समय पर खाद्यान्न, विशेषकर चावल का आबंटन करने और श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त दाल-भात केंद्र संचालित करने के निर्देश दिए गए। शाही स्नान के दौरान नदी तट पर सुरक्षित बैरिकेटिंग, भीड़ नियंत्रण और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

इसके अलावा, दुर्घटनाओं की स्थिति में क्रेन, फायर ब्रिगेड और अन्य आपात संसाधन तैयार रखने, मेला परिसर में नियमित साफ-सफाई और कचरा निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। व्यापारिक प्रतिष्ठानों में रेट लिस्ट और फ्लैक्स बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाने को भी कहा गया।

मंत्री अग्रवाल ने कहा कि पिछली बार की कमियों को इस बार दूर किया जाएगा और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दूरसंचार कंपनियों को मोबाइल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने और धर्मशालाओं की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

अंत में मंत्री ने कहा कि राजिम कुंभ कल्प प्रदेश की आस्था, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक महापर्व है, इसलिए सभी विभाग पूरी जिम्मेदारी और समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि आयोजन भव्य, सुरक्षित और ऐतिहासिक रूप से सफल हो सके।