बिलासपुर में कर्मचारियों पर आरोपों की बौछार, संघ ने खोला मोर्चा

ज्ञान शंकर तिवारी

 

 

बिना सबूत कार्रवाई नहीं—कर्मचारी संगठनों का प्रशासन को साफ संदेश

बिलासपुर।

शासकीय कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर बिलासपुर में माहौल गरमाता जा रहा है। हाल के दिनों में कर्मचारियों पर लगातार लगाए जा रहे आरोपों के बीच कर्मचारी संगठनों ने अब खुलकर मोर्चा खोल दिया है। संगठनों ने प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया है कि बिना ठोस और प्रमाणिक साक्ष्य के किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

मामले की पृष्ठभूमि में अंकित गौरहा द्वारा शासकीय कर्मचारियों पर लगातार लगाए जा रहे आरोप हैं, जिनके चलते कई कर्मचारी मानसिक दबाव और असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। ताजा मामला प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री सुनील यादव से जुड़ा है।

इस प्रकरण में पहले ही जिला स्तर पर गठित चार सदस्यीय जांच समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर चुकी है, जिसमें सुनील यादव पर लगे सभी आरोप निराधार और बेबुनियाद पाए गए। इसके बावजूद दोबारा जांच के लिए दबाव बनाए जाने और नई समिति गठित किए जाने से कर्मचारी संगठनों में आक्रोश बढ़ गया है।

इतना ही नहीं, इस मुद्दे को शासन स्तर तक ले जाकर लगातार पत्राचार और सार्वजनिक रूप से प्रचारित किए जाने को लेकर भी संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। कर्मचारी नेता रोहित तिवारी ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे संदिग्ध और संभावित रूप से सुनियोजित षड्यंत्र बताया है। उन्होंने कहा कि बिना सत्यता के बार-बार शिकायत करना न केवल अनुचित है, बल्कि कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने जैसा है।

इस पूरे घटनाक्रम के विरोध में कर्मचारी संगठनों ने कलेक्टर बिलासपुर के माध्यम से मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में मांग की गई है कि झूठी और बेबुनियाद शिकायतों पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों को इस प्रकार निशाना बनाना बंद नहीं हुआ, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे।

अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या प्रशासन कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए ठोस कदम उठाएगा, यह देखना बाकी है।