अमित जोगी पहले भी इस मामले में बरी हो चुके हैं, सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं।”

✍️ भागीरथी यादव

 

 

अमित जोगी की नई ‘अग्निपरीक्षा’: क्या 19 साल बाद फिर मिलेगी बेगुनाही की संजीवनी?

 

 

रायपुर/कोरबा: छत्तीसगढ़ की राजनीति में ‘जोगी’ नाम का प्रभाव और उससे जुड़े विवाद एक बार फिर चर्चा के शीर्ष पर हैं। वर्ष 2003 के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड की फाइल, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार 19 साल बाद फिर से खुलने जा रही है। जहाँ राजनीतिक हलकों में इसे अमित जोगी के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है, वहीं जोगी समर्थकों का मानना है कि यह अमित जोगी के लिए अपनी छवि को अंतिम रूप से बेदाग साबित करने का एक सुनहरा अवसर है।

कानूनी मर्यादा और अमित जोगी का पक्ष

उल्लेखनीय है कि अमित जोगी को इस मामले में निचली अदालत से पहले ही दोषमुक्त (Acquitted) किया जा चुका है। कानून के जानकारों का तर्क है कि एक बार बरी होने के बाद दोबारा जांच की प्रक्रिया केवल न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे जोगी पक्ष ने हमेशा सहर्ष स्वीकार किया है। अमित जोगी ने सदैव न्यायपालिका पर अपना अटूट विश्वास जताया है और इस बार भी वे पूरी मजबूती के साथ अपना पक्ष रखने को तैयार हैं।

‘राजनीतिक द्वेष’ या ‘न्यायिक प्रक्रिया’?

अमित जोगी के करीबियों और समर्थकों का स्पष्ट मानना है कि जब-जब जोगी परिवार राजनीतिक रूप से सक्रिय होकर जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करता है, तब-तब पुराने मामलों के जरिए उन्हें रोकने की कोशिश की जाती है। उनके समर्थकों का कहना है कि:

• जनता की अदालत में क्लीन चिट: अमित जोगी ने पिछले वर्षों में जनता के बीच रहकर अपनी जो जगह बनाई है, वह किसी भी कानूनी उलझन से बड़ी है।

• विकास बनाम विवाद: छत्तीसगढ़ का युवा वर्ग अब पुरानी कड़वाहटों के बजाय विकास और भविष्य की राजनीति पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। ऐसे में 19 साल पुराने मामले को दोबारा उठाना केवल सियासी लाभ लेने की कोशिश जैसा प्रतीत होता है।

चुनौती को अवसर में बदलने का संकल्प

भले ही हाई कोर्ट में दोबारा सुनवाई अमित जोगी के लिए व्यस्तता और मानसिक दबाव का कारण बने, लेकिन रणनीतिक रूप से यह उनके लिए फायदेमंद भी हो सकता है। यदि इस बार भी अदालत से उन्हें राहत मिलती है, तो विरोधियों के पास उनके अतीत को लेकर बोलने के लिए कोई ठोस आधार नहीं बचेगा। यह फैसला न केवल अमित जोगी की व्यक्तिगत जीत होगी, बल्कि उनकी राजनीतिक शुचिता पर भी अंतिम मुहर लगाएगा।

निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें अब हाई कोर्ट की कार्यवाही पर टिकी हैं। अमित जोगी के लिए यह समय धैर्य और संकल्प का है, जहाँ वे एक बार फिर ‘सत्यमेव जयते’ के नारे को चरितार्थ करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।