कांकेर में नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका: AK-47 के साथ दो हार्डकोर माओवादी सरेंडर, 6 दिन में 11 ने छोड़ा जंगल

✍️ भागीरथी यादव

 

 

कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नक्सल मोर्चे पर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित माओवादी संगठन से जुड़े दो सक्रिय नक्सलियों—पीपीसीएम (PPCM) शंकर और पीएम (PM) हिड़मा डोडी—ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है। दोनों ने एके-47 राइफल और वॉकी-टॉकी पुलिस के सामने सौंपे, जो उनके सक्रिय और सशस्त्र भूमिका को दर्शाता है।

इस ताजा कार्रवाई के साथ ही पिछले छह दिनों में कांकेर जिले में कुल 11 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है, जिससे माओवादी नेटवर्क को गंभीर झटका लगा है।

पुलिस ने तेज की ‘घर वापसी’ मुहिम

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से मिली अहम जानकारियों के आधार पर कांकेर पुलिस अब जंगलों में सक्रिय अन्य माओवादियों तक पहुंच बनाने में जुट गई है। पुलिस रणनीतिक तरीके से संपर्क कर उन्हें समझाइश दे रही है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर शासन की पुनर्वास नीति का लाभ लें।

सरेंडर कर चुके नक्सलियों ने भी अपने साथियों से अपील की है कि वे भय और भ्रम छोड़कर सामान्य जीवन अपनाएं। फिलहाल जिले में करीब 14 नक्सलियों के सक्रिय होने की जानकारी है, जिनमें डीवीसीएम स्तर के चंदर और रूपी जैसे नाम शामिल हैं।

आंध्र प्रदेश में भी बड़ा सरेंडर

इधर, नक्सल विरोधी अभियान के बीच आंध्र प्रदेश में भी बड़ा घटनाक्रम सामने आया। रविवार को 48 लाख रुपये के इनामी 9 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। इनमें एक वरिष्ठ माओवादी नेता भी शामिल है, जो करीब 36 वर्षों से संगठन में सक्रिय था।

सरेंडर करने वालों में 8 नक्सली छत्तीसगढ़ के सुकमा और बीजापुर जिलों के निवासी बताए गए हैं। ये सभी PLGA बटालियन, एरिया कमेटी और अन्य इकाइयों में सक्रिय थे। खास बात यह रही कि सेंट्रल कमेटी मेंबर और AOBSZC के सचिव चेल्लुरी नारायण राव उर्फ सुरेश ने भी अपने साथियों के साथ हथियार डाले।

बस्तर में पहले ही टूट चुका बड़ा ढांचा

इससे पहले 25 मार्च को बस्तर में नक्सली लीडर पापाराव समेत 18 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। पापाराव को बस्तर क्षेत्र का अंतिम बड़ा कमांडर माना जाता था। उसके सरेंडर के बाद संगठन की कमान कमजोर पड़ गई है।

इन नक्सलियों ने 12 लाख रुपये नकद, 8 AK-47, 1 SLR, 1 INSAS समेत बड़ी मात्रा में हथियार पुलिस को सौंपे थे। इसी दिन ओडिशा में भी 55 लाख के इनामी सुकरू ने अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया था।

लगातार सरेंडर से कमजोर पड़ता नक्सल नेटवर्क

लगातार हो रहे आत्मसमर्पण नक्सल संगठन के गिरते मनोबल और सुरक्षा बलों की प्रभावी रणनीति का संकेत दे रहे हैं। पुलिस का मानना है कि आने वाले दिनों में और भी नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौट सकते हैं।