कलेक्टर के आदेश को भी किया नजरअंदाज, 6 महीने बाद दर्ज हुई FIR

गरियाबंद। समाज कल्याण विभाग के उपसंचालक ने रिटायरमेंट के बाद संविदा के सहारे कुर्सी संभाली और फिर खुद के कल्याण के लिए करोड़ों रुपए का वारा न्यारा कर दिया. उन्होंने गरियाबंद और धमतरी के बैंकों में विभाग के नाम से फर्जी खाता खुलवाया और 3 साल में सवा 3 करोड़ डकार दिए. मामले में फरवरी महीने में कलेक्टर के निर्देश पर अब जाकर विभाग ने एफआईआर दर्ज कराया है.

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रायपुर के कुंदन ठाकुर ने जुलाई 2024 में मामले की लिखित शिकायत कलेक्टर से की थी. इसके बाद तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाकर जांच शुरू की गई. जांच का नेतृत्व अपर कलेक्टर अरविंद पाण्डेय कर रहे थे. अगस्त 2024 से शुरू की गई जांच में उक्त दोनों अफसरों तत्कालीन उप संचालक एलएस मार्को व डीडीओ प्रभारी मुन्नी लाल पाल को तीन मर्तबे जांच कमेटी के समक्ष उपस्थित होने कहा गया, पर वे नहीं आए.

कमेटी ने सरकारी रिकॉर्ड को बारीकी से खंगालना शुरू किया तो पता चला कि वित्तीय वर्ष 2016 से 2019 में कलेक्टर के बगैर अनुशंसा के ही रायपुर संचनालय से जागरूकता अभियान, पेंशन योजना, दिव्यांग प्रोत्साहन योजना, पुनर्वास शिविर जैसे योजनाओं के नाम पर रुपए मंजूर कराते रहे.

मंजूर राशि विभाग के ओरिजनल खाता के बजाए धमतरी व गरियाबंद के निजी बैंकों में विभाग के नाम से खोले गए खाता में डलवाया जाता रहा, जिसे चेक के माध्यम से आहरण किया गया. पूरे मामले में रायपुर संचनालय के तत्कालीन संचालक पंकज वर्मा की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है.

9 चेक से सवा 3 करोड़ रुपए निकाले

26 सितंबर 2016 को यूनियन बैंक रायपुर से 22 लाख रुपए का चेक निकाला गया. 24 नवंबर 2017 को पंजाब नेशनल बैंक रायपुर से 25 लाख रुपए निकाले गए. 22 जून 2018 को एक ही दिन में 83 लाख रुपए तीन चेकों के जरिए निकाले गए, जिसमें
28 लाख, 28 लाख और 27 लाख रुपए का चेक था. एक मार्च 2019 को कोटक महिंद्रा बैंक से 48 लाख और फिर 10 मार्च 2019 को 49 लाख का चेक जारी हुआ. इसी प्रकार 19 अगस्त 2019 को 49 लाख 50 हजार और फिर 20 अगस्त 2019 को 49 लाख की राशि का आहरण किया गया.

धमतरी में 8 करोड़ की गड़बड़ी की आशंका

गरियाबंद में 3.25 करोड़ के गबन के बाद अब धमतरी में 8 करोड़ रुपए के घोटाले की आशंका है. गरियाबंद में हुई गड़बड़ी का मास्टरमाइंड मुन्नीलाल पाल 2012 से 2022 तक धमतरी में विभिन्न पदों पर रहा है. खबर है कि वहां भी इसी तरह फर्जी खाते खोलकर करोड़ों की रकम निकाल चुके हैं. अगर वहां भी जांच होती है तो गरियाबंद से बड़ा घोटाला सामने आ सकता है.

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