प्रशासन सतर्क, सभी विभागों को अभी से कार्ययोजना बनाने के निर्देश
गांव-गांव लगेगी कृषि चौपाल, जल संरक्षण, पेयजल व्यवस्था और खाद्यान्न भंडारण पर रहेगा विशेष फोकस
सुशील जायसवाल
पोड़ी उपरोड़ा/कोरबा, 24 जून 2026।
मानसून की धीमी शुरुआत और सामान्य से कम वर्षा की संभावना ने कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खरीफ सीजन की शुरुआत में अच्छी बारिश की उम्मीद के साथ किसानों ने अपने खेतों में धान की रोपाई कर दी थी, लेकिन लगातार पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में नमी की कमी होने लगी है। ऐसी स्थिति में किसान अपनी मेहनत और फसल को बचाने के लिए ट्यूबवेल तथा अन्य सिंचाई साधनों का सहारा लेने को मजबूर हो गए हैं।
क्षेत्र के कई गांवों में किसान दिन-रात खेतों की सिंचाई में जुटे हुए हैं। जिन किसानों के पास निजी ट्यूबवेल या सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वे किसी तरह अपनी फसल को बचाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि छोटे और सीमांत किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की फसल पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों की मेड़ों पर खड़े किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बादलों का इंतजार कर रहे हैं। कई स्थानों पर धान की नई पौध पीली पड़ने लगी है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि रोपाई के बाद शुरुआती दिनों में पर्याप्त पानी नहीं मिलने से उत्पादन प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाती है।
किसानों की बढ़ी चिंता, बढ़ रहा सिंचाई खर्च
पोड़ी उपरोड़ा क्षेत्र के किसानों का कहना है कि इस वर्ष समय पर रोपाई तो हो गई, लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं होने से सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। डीजल पंप और बिजली चालित ट्यूबवेल से सिंचाई करने में किसानों की लागत बढ़ रही है। कई किसानों ने बताया कि यदि यही स्थिति बनी रही तो खेती की लागत बढ़ेगी और लाभ कम हो जाएगा।
किसानों का कहना है कि खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर है। यदि बारिश लगातार कम रही तो धान की पैदावार में कमी आने की आशंका है, जिसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
प्रशासन ने शुरू की अग्रिम तैयारी
कम बारिश की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। संभावित सूखा या अल्पवृष्टि की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने अभी से व्यापक तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने समय-सीमा (टीएल) बैठक में सभी विभागों की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी परिस्थिति में किसानों, ग्रामीणों और पशुपालकों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ तत्काल कार्ययोजना तैयार करें और उसे जमीनी स्तर पर लागू करना शुरू करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य संकट आने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि पहले से तैयारी कर संभावित समस्याओं को नियंत्रित करना है।
कृषि विभाग को सौंपी गई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
कलेक्टर ने कृषि विभाग को विशेष जिम्मेदारी देते हुए किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली वैकल्पिक फसलों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत में “कृषि चौपाल” आयोजित की जाएगी।
इन कृषि चौपालों में किसानों को सूखा सहनशील बीज, फसल विविधीकरण, जल संरक्षण तकनीक, आधुनिक खेती के तरीके तथा कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों के बारे में जानकारी दी जाएगी। कृषि विस्तार अधिकारी, ग्रामीण कृषि विस्तार कर्मचारी तथा पटवारियों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है ताकि किसानों की समस्याओं का मौके पर समाधान किया जा सके।
प्रशासन का मानना है कि यदि किसानों को समय रहते वैज्ञानिक सलाह और तकनीकी मार्गदर्शन मिल जाए तो फसल नुकसान की संभावना काफी कम हो सकती है।
जल संरक्षण और पेयजल व्यवस्था पर रहेगा विशेष ध्यान
कम बारिश की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने जल संरक्षण कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट की आशंका को देखते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग को सभी पेयजल स्रोतों की निगरानी करने तथा खराब हैंडपंपों और बंद बोरवेलों को तत्काल सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही जल संरक्षण संरचनाओं, तालाबों और जलाशयों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए भी कार्ययोजना तैयार की जा रही है ताकि भू-जल स्तर बनाए रखा जा सके और भविष्य में पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न न हो।
मनरेगा के माध्यम से होंगे जल संरक्षण कार्य
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और जल संरक्षण दोनों उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए मनरेगा के तहत तालाब गहरीकरण, जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण, नाला सुधार और अन्य जल संवर्धन कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
इससे एक ओर ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर गांवों में जल संचयन क्षमता भी बढ़ेगी। प्रशासन का मानना है कि यह पहल संभावित सूखे की स्थिति में काफी मददगार साबित होगी।
खाद्यान्न और पशु चारे की व्यवस्था के निर्देश
कलेक्टर ने खाद्य विभाग को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से खाद्यान्न का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। वहीं पशुधन विकास विभाग को पशुओं के लिए चारा और आवश्यक संसाधनों की अग्रिम व्यवस्था करने को कहा गया है।
प्रशासन का मानना है कि कम बारिश का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पशुपालन और ग्रामीण आजीविका पर भी पड़ता है। इसलिए सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए समग्र कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
किसानों की निगाहें अब मानसून पर
पोड़ी उपरोड़ा क्षेत्र के किसानों की उम्मीदें अब आगामी दिनों में होने वाली बारिश पर टिकी हुई हैं। किसान चाहते हैं कि जल्द अच्छी बारिश हो ताकि धान की फसल को पर्याप्त पानी मिल सके और उनकी मेहनत सफल हो। फिलहाल किसान अपने स्तर पर ट्यूबवेल और सिंचाई साधनों के जरिए फसल बचाने में जुटे हैं, जबकि प्रशासन भी संभावित संकट से निपटने के लिए पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है।
यदि आने वाले दिनों में अच्छी वर्षा नहीं हुई, तो कृषि उत्पादन, पेयजल उपलब्धता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन की अग्रिम तैयारी और किसानों की सतर्कता दोनों ही इस चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
