
एक ओर वृद्ध महिला की मौत का गम, दूसरी ओर घर उजड़ने का दर्द; वन विभाग अलर्ट मोड पर
सुशील जायसवाल
कटघोरा ( केंदई) 24 जून 2026 :-
कटघोरा वनमंडल के केंदई रेंज में इन दिनों एक खतरनाक लोनर (एकाकी) हाथी ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। सरगुजा वनमंडल से भटककर पहुंचे इस हाथी का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बीती रात हाथी ने मदनपुर और उसके आश्रित मोहल्ला करेहापारा में जमकर उत्पात मचाते हुए दो ग्रामीणों के मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया। गनीमत रही कि दोनों परिवार समय रहते जाग गए और घर के एक सुरक्षित कमरे में छिपकर अपनी जान बचाने में सफल रहे। घटना के बाद पूरे इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल व्याप्त है।
लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा आतंक
जानकारी के अनुसार सरगुजा वनमंडल से आया यह लोनर हाथी कुछ दिनों पहले केंदई रेंज में प्रवेश कर गया था। क्षेत्र में पहुंचते ही उसने ग्रामीण इलाकों का रुख करना शुरू कर दिया। पहले दिन एक ग्रामीण के घर को नुकसान पहुंचाया गया, जबकि दूसरे दिन पतुरियाडांड क्षेत्र में जंगल से डोरी बीनने गई एक वृद्ध महिला पर हमला कर उसे पैरों तले कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
इस दर्दनाक घटना से ग्रामीण अभी उबर भी नहीं पाए थे कि हाथी ने तीसरी रात फिर तबाही मचा दी। हाथी के लगातार हमलों से ग्रामीणों में भारी दहशत है और लोग रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं।
आधी रात को घरों पर बोला धावा
बताया जा रहा है कि देर रात हाथी मदनपुर और करेहापारा पहुंचा। यहां उसने करेहापारा निवासी तुलेश्वर गोंड़ तथा मदनपुर निवासी शांति बाई पनिका के घरों को निशाना बनाया। हाथी ने मकानों की दीवारों और हिस्सों को तोड़ते हुए भारी नुकसान पहुंचाया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब हाथी ने हमला किया, उस समय दोनों परिवार गहरी नींद में थे। अचानक तेज आवाज और हाथी की चिंघाड़ सुनकर परिवार के सदस्य जागे। बाहर का नजारा देखकर सभी के होश उड़ गए। जान बचाने के लिए परिवार के लोग घर के एक कमरे में दुबक गए और तत्काल वन विभाग को सूचना दी।
बाल-बाल बची कई जिंदगियां
ग्रामीणों का कहना है कि यदि कुछ मिनट की भी देरी हो जाती तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। हाथी घर के बेहद करीब पहुंच चुका था और लगातार तोड़फोड़ कर रहा था। परिवार के सदस्यों ने पूरी रात भय के साये में गुजारी। घटना के बाद बच्चे और महिलाएं अभी भी सदमे में हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि हाथी के हमले से केवल मकान ही नहीं टूटे, बल्कि घरों में रखा सामान भी क्षतिग्रस्त हो गया है। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन और वन विभाग से उचित मुआवजे की मांग की है।
वन विभाग ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम रात में ही मौके पर पहुंच गई। कर्मचारियों ने हाथी को आबादी क्षेत्र से खदेड़कर जंगल की ओर भेजा। वर्तमान में हाथी का लोकेशन पुटा जंगल क्षेत्र में बताया जा रहा है।
केंदई रेंजर अभिषेक दुबे के अनुसार डीएफओ कुमार निशांत के निर्देश पर हाथी की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। हाथी की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन अमले के साथ आधुनिक ड्रोन कैमरों की भी मदद ली जा रही है।
ड्रोन कैमरों से हो रही चौबीस घंटे निगरानी
हाथी की सटीक लोकेशन पता लगाने और उसके मूवमेंट पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों का उपयोग किया जा रहा है। वन विभाग की टीमें लगातार जंगल और आसपास के गांवों में निगरानी कर रही हैं। साथ ही ग्रामीणों को मुनादी कर सतर्क रहने की अपील की जा रही है।
वन अधिकारियों का कहना है कि हाथी के व्यवहार को देखते हुए किसी भी प्रकार की लापरवाही भारी पड़ सकती है। लोगों से रात के समय घरों से बाहर न निकलने और जंगल की ओर अकेले न जाने की अपील की गई है।
भंवरकछार में भी मचाया उत्पात
इधर जटगा रेंज के मेढ़ाड पहाड़ पर विचरण कर रहे 27 हाथियों के दल से अलग हुए करीब आधा दर्जन हाथी भंवरकछार गांव पहुंच गए। यहां उन्होंने आनंद सिंह के घर को नुकसान पहुंचाते हुए वहां रखा धान, चावल, दाल और अन्य खाद्यान्न खा लिया।
सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और नुकसान का आंकलन शुरू किया। हाथियों के लगातार गांवों की ओर रुख करने से क्षेत्र के किसान और ग्रामीण चिंतित हैं।
ग्रामीणों में बढ़ रही चिंता
बार-बार हो रही घटनाओं के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल है। लोगों का कहना है कि हाथियों का झुंड और लोनर हाथी लगातार गांवों के करीब पहुंच रहे हैं, जिससे जान-माल का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था, नियमित गश्त और त्वरित राहत की मांग की है।
सावधानी ही बचाव
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथी दिखने पर उसके करीब जाने, फोटो या सेल्फी लेने का प्रयास न करें। हाथी की सूचना तत्काल वन विभाग को दें और समूह में ही आवागमन करें। विशेषकर महिलाओं, बच्चों और किसानों को रात एवं सुबह के समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
लगातार बढ़ती मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी रणनीति की आवश्यकता है। फिलहाल केंदई और जटगा रेंज के ग्रामीण दहशत के साये में जीवन बिताने को मजबूर हैं।
