मोबाइल नहीं तो इलाज की प्रक्रिया में परेशानी, ABHA ऐप से टोकन व्यवस्था बनी मरीजों के लिए चुनौती

✍️ भागीरथी यादव

 

कोरबा। जिला चिकित्सालय में उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों को पंजीयन और टोकन की प्रक्रिया में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में टोकन एवं पंजीयन की प्रक्रिया के लिए ABHA से जुड़ी डिजिटल व्यवस्था का उपयोग किया जा रहा है, जिसके चलते मोबाइल और डिजिटल जानकारी नहीं रखने वाले मरीजों के लिए यह व्यवस्था कठिन साबित हो रही है।

 

ग्रामीण और बुजुर्ग मरीजों की संख्या जिला अस्पताल में काफी अधिक रहती है। इनमें कई ऐसे मरीज भी पहुंचते हैं, जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है या उन्हें मोबाइल फोन चलाने की जानकारी नहीं है। ऐसे मरीजों को ABHA ऐप अथवा डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से टोकन लेने में दूसरे लोगों की मदद लेनी पड़ती है।

मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था सुविधाजनक जरूर है, लेकिन जिन लोगों को मोबाइल चलाना नहीं आता, उनके लिए अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था भी होनी चाहिए। कई बुजुर्ग मरीजों को टोकन लेने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है और परिजनों या अन्य लोगों पर निर्भर रहना पड़ता है।

बुजुर्ग और ग्रामीण मरीज सबसे ज्यादा परेशान

 

जिला अस्पताल में दूर-दराज के गांवों से इलाज कराने आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की होती है, जो तकनीकी रूप से दक्ष नहीं हैं। मोबाइल, इंटरनेट, ऐप और डिजिटल पंजीयन की जानकारी नहीं होने के कारण उन्हें अस्पताल की प्रक्रिया समझने में भी कठिनाई होती है।

 

मरीजों ने मांग की है कि अस्पताल में ABHA अथवा डिजिटल टोकन के साथ एक अलग हेल्प डेस्क या मैनुअल टोकन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि बिना स्मार्टफोन अथवा डिजिटल जानकारी वाले मरीजों को इलाज के लिए परेशान न होना पड़े।

 

डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य मरीजों की सुविधा बढ़ाना है, इसलिए इसके साथ ऐसे मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी है, जो तकनीक का इस्तेमाल नहीं कर सकते।