जर्जर सड़क से थमी जिंदगी: बस सेवा बंद होने की कगार पर, 20 से अधिक गांवों के हजारों ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

रानी अटारी–कोरबी मार्ग की बदहाली बनी बड़ी मुसीबत, बरसात में सफर जानलेवा; ग्रामीणों ने दी आंदोलन और चक्काजाम की चेतावनी

कोरबा/कोरबी चोटिया | सुशील जायसवाल

पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड और पसान तहसील को जोड़ने वाला रानी अटारी–कोरबी मार्ग इन दिनों अपनी बदहाल स्थिति के कारण क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। करीब 30 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, उखड़ी डामर सड़क, पुलिया के पास जमा मलबा और कीचड़ के कारण आवागमन बेहद जोखिम भरा हो गया है। हालात ऐसे हैं कि इस मार्ग पर संचालित बस सेवाएं भी बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं।

इस सड़क पर निर्भर पिपरिया, सीपत, जल्के, विजयडांड, तनेरा, पुटीपखना, सेनहा, हरदेव, सरमा सहित 20 से अधिक गांवों के हजारों ग्रामीण, विद्यार्थी, किसान और मरीज रोजाना मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। बरसात में सड़क की हालत और अधिक खराब हो जाने से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

कई जिलों को जोड़ने वाली अहम सड़क

ग्रामीणों के अनुसार यह मार्ग मनेंद्रगढ़, चिरमिरी, पेंड्रा, कटघोरा, कोरबा, बिलासपुर और रायपुर जैसे प्रमुख शहरों तक पहुंचने का महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन इस सड़क से बसें, स्कूल वाहन, मालवाहक और निजी वाहन गुजरते हैं, लेकिन बदहाल सड़क के कारण सफर किसी जोखिम से कम नहीं रह गया है।

400 मीटर अधूरा निर्माण बना सबसे बड़ी समस्या

ग्राम सीपत के पास कटाई नाला पुल से लगभग 400 मीटर तक सड़क का डामरीकरण आज तक पूरा नहीं किया गया है। बरसात में यहां कीचड़ और मलबा भर जाने से वाहन फंस जाते हैं और आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद जिम्मेदार विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

मलबे में फंसी बस, बदलना पड़ा पूरा रूट

3 जुलाई की रात करीब 10 बजे आदर्श बस इसी मार्ग पर कीचड़ और मलबे में फंस गई। काफी प्रयास के बाद भी बस नहीं निकल सकी, जिसके बाद चालक को बस वापस मोड़कर सरमा–कोरबी मार्ग से चिरमिरी और मनेंद्रगढ़ की ओर जाना पड़ा। इस घटना के बाद बस संचालकों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सड़क की तत्काल मरम्मत नहीं हुई तो इस मार्ग पर बस संचालन बंद करना पड़ेगा।

विद्यार्थी, मरीज और किसान सबसे ज्यादा प्रभावित

खराब सड़क का सबसे अधिक असर स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों, अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और अपनी उपज बाजार तक ले जाने वाले किसानों पर पड़ रहा है। कई स्थानों पर पानी से भरे गड्ढों के कारण दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ गया है।

करोड़ों खर्च, फिर भी सड़क बदहाल

ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2022-23 में सड़क का नवीनीकरण कराया गया था, लेकिन कुछ ही समय बाद सड़क उखड़ने लगी। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं वर्ष 2025 में एसईसीएल द्वारा सड़क के रखरखाव का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन अब तक कोई प्रभावी सुधार नहीं हुआ।

बोरवेल मशीन पलटने की घटना ने बढ़ाई चिंता

बीते सप्ताह सरमा के पास जर्जर पुल के निकट एक बोरवेल मशीन लोड वाहन पलट गया था, जिसमें चालक गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस घटना के बाद भी सड़क की मरम्मत नहीं होने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और एसईसीएल से तत्काल सड़क की मरम्मत, अधूरे हिस्से का डामरीकरण, पुलिया पर जमा मलबे की सफाई तथा निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द काम शुरू नहीं हुआ तो वे सड़क पर उतरकर चक्काजाम और जनआंदोलन करने को मजबूर होंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि रानी अटारी–कोरबी मार्ग केवल एक सड़क नहीं, बल्कि 20 से अधिक गांवों की जीवनरेखा है। यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं हुई तो शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और जनजीवन पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।