594 मतदाताओं ने किया मतदान, 10 मत हुए निरस्त, देवकुमार को मिले 308 मत, दिनेश कुमार को 271 मत, निर्मल सिंह रहे काफी पीछे
सुशील जायसवाल
जलके (कटघोरा)। कटघोरा वन मंडल के पसान वन परिक्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत जलके में मंगलवार 7 जुलाई को वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पद का चुनाव भारी गहमागहमी, उत्साह और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुआ। चुनाव को लेकर ग्रामीणों में सुबह से ही खासा उत्साह देखने को मिला। ग्राम पंचायत भवन परिसर में बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष मतदाता एकत्रित हुए। मतदान के दौरान पुलिस बल की तैनाती रही, जिससे चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जा सका।

वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पद के लिए तीन प्रत्याशियों ने अपनी दावेदारी पेश की थी। चुनाव अधिकारी (रिटर्निंग ऑफिसर) एवं जलके के परिक्षेत्र सहायक अयोध्या प्रसाद सोनी की देखरेख में पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराई गई। नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोपहर 1 बजे से मतदान प्रारंभ हुआ, जो लगभग शाम 3:30 बजे तक चला। मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना की गई और परिणाम घोषित किया गया।

चुनाव परिणाम में देवकुमार पिता मनीराम गोंड ने सर्वाधिक 308 मत प्राप्त कर अध्यक्ष पद पर विजय हासिल की। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी दिनेश कुमार पिता रामप्रसाद गोंड को 271 मत मिले, जबकि तीसरे प्रत्याशी निर्मल सिंह पिता मनीराम गोंड को मात्र 5 मत प्राप्त हुए। कुल 594 मत डाले गए, जिनमें से 10 मत अमान्य (रिजेक्ट) घोषित किए गए। परिणाम घोषित होते ही विजयी प्रत्याशी के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। समर्थकों ने एक-दूसरे को बधाई देते हुए जीत का उत्सव मनाया।
चुनाव के दौरान ग्राम पंचायत भवन परिसर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ उमड़ी रही। कई बार भारी भीड़ के कारण धक्का-मुक्की जैसी स्थिति भी बनी, लेकिन पुलिस और चुनाव अधिकारियों की सक्रियता से स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया। पूरे चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल मुस्तैद रहा और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं होने दी गई।
इस अवसर पर ग्राम पंचायत की वर्तमान सरपंच श्रीमती फुलेश्वरी नरेंद्र राज, उपसरपंच राजेंद्र सिंह राज, पूर्व सरपंच मंगल सिंह, वरिष्ठ ग्रामीण शिव उदय सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, ग्रामीण महिला-पुरुष एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद विजयी प्रत्याशी को ग्रामीणों ने शुभकामनाएं देते हुए वन संरक्षण की दिशा में बेहतर कार्य करने की अपेक्षा व्यक्त की।
पिछले चुनाव में हुआ था भारी विवाद
गौरतलब है कि इससे पहले 29 जून को इसी ग्राम पंचायत में वन प्रबंधन समिति के चुनाव की तैयारी की गई थी, लेकिन चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही ग्रामीणों ने निष्पक्ष चुनाव की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। उस दौरान चुनाव अधिकारी अयोध्या प्रसाद सोनी पर निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए गए थे। विरोध के दौरान काफी गहमागहमी का माहौल बन गया था। इसी दौरान विरोध कर रहे ग्रामीणों को कथित रूप से “उठवा लेने” की धमकी दिए जाने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसके बाद यह चुनाव पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया था।
विवादों के चलते उस समय चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई थी, लेकिन इस बार प्रशासन ने पुलिस बल की मौजूदगी में चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया। ग्रामीणों ने भी बड़ी संख्या में मतदान कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भागीदारी निभाई।
वन प्रबंधन समिति की भूमिका है महत्वपूर्ण
प्राप्त जानकारी के अनुसार शासन के नियमों के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में वन क्षेत्रों की सुरक्षा एवं संरक्षण के उद्देश्य से वन प्रबंधन समिति का गठन किया जाता है। इस समिति में स्थानीय ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और पुरुषों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है ताकि जंगलों की सुरक्षा, वन संपदा का संरक्षण, अवैध कटाई पर रोक, वन्यजीवों की सुरक्षा तथा पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में जनसहभागिता बढ़ाई जा सके।
वन प्रबंधन समिति ग्रामीणों और वन विभाग के बीच समन्वय स्थापित करने का महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाती है। समिति के सदस्य जंगलों की निगरानी, अवैध लकड़ी कटाई की सूचना देना, पौधरोपण, वन संरक्षण अभियान तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि इस समिति के चुनाव को ग्रामीण क्षेत्रों में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है और ग्रामीण बढ़-चढ़कर इसमें भाग लेते हैं।
ग्राम जलके में संपन्न हुए इस चुनाव के बाद अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि नवनिर्वाचित अध्यक्ष एवं समिति के सदस्य वन संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन तथा ग्रामीणों की सहभागिता को मजबूत बनाने की दिशा में प्रभावी कार्य करेंगे, जिससे क्षेत्र के जंगल सुरक्षित रह सकें और शासन की वन संरक्षण संबंधी योजनाओं का लाभ स्थानीय लोगों तक बेहतर ढंग से पहुंच सके।
