राजमेरु संस्था के मार्गदर्शन में ‘वंचितों का संसद’ अभियान के तहत 15 गांवों में 1500 पौधे लगाने का लक्ष्य

जलके के अमझर गांव में फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण, विशेष पिछड़ी जनजातियों को पर्यावरण संरक्षण का दिया गया संदेश

 

सुशील जायसवाल

 

कोरबा (जलके) :- विश्व पर्यावरण संरक्षण की भावना को जन-जन तक पहुंचाने तथा वनांचल क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत सुदूर वनांचल ग्राम जलके क्षेत्र में राजमेरु संस्था के मार्गदर्शन एवं सहयोग से संचालित “वंचितों का संसद” अभियान के तहत व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस अभियान की शुरुआत 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हुई थी, जिसके अंतर्गत 10 जुलाई तक विभिन्न गांवों में पौधरोपण का कार्य निरंतर जारी रहा।

इसी क्रम में शुक्रवार को ग्राम अमझर में फलदार एवं बहुउपयोगी पौधों का सामूहिक रोपण किया गया। कार्यक्रम में आम, अमरूद, जामुन, कटहल, आंवला, नीम, साल, खम्हार सहित अनेक प्रकार के फलदार एवं छायादार पौधे लगाए गए। अभियान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों एवं विशेष रूप से वनाश्रित समुदायों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना भी है।

 

राजमेरु संस्था के सहयोग से संचालित इस अभियान के अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजाति समुदायों के साथ-साथ पंडो, बैगा एवं धनुहार समाज के लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई। संस्था द्वारा लगभग 15 गांवों में 1500 पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि आने वाले वर्षों में क्षेत्र हरियाली से आच्छादित हो सके और ग्रामीणों को फलदार वृक्षों से आर्थिक एवं पोषण संबंधी लाभ भी प्राप्त हो।

 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वंचितों का संसद के संयोजक शिवप्रसाद उदय ने कहा कि जनजातीय समाज का अस्तित्व सदियों से जंगलों और प्रकृति से जुड़ा रहा है। जंगल केवल जीवनयापन का साधन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और पहचान का आधार भी हैं। यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा।

 

उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे हमें शुद्ध ऑक्सीजन, स्वच्छ वातावरण, जल संरक्षण तथा जैव विविधता प्रदान करते हैं। जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण के दौर में प्रत्येक व्यक्ति का यह नैतिक दायित्व है कि वह कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी देखभाल भी करे। केवल पौधरोपण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है।

 

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं एवं बच्चों ने भी पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया तथा लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने का वचन दिया। ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे जन-जागरूकता अभियान वनांचल क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता को भी मजबूत करते हैं।

 

राजमेरु संस्था एवं वंचितों का संसद द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल माना जा रहा है। संस्था का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को वृक्षारोपण से जोड़कर हरित एवं स्वच्छ पर्यावरण का निर्माण करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और संतुलित प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध हो सके।