देहदान से अमर हुई मानव सेवा की मिसाल: संत रामपाल की प्रेरणा से स्वर्गीय दुखनी साहू का पार्थिव शरीर मेडिकल शिक्षा को समर्पित

✍️ भागीरथी यादव

 

 

कोरबा। मानव सेवा और समाज कल्याण की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल के तहत कोरबा निवासी स्वर्गीय दुखनी साहू का निधन 15 जुलाई 2026 को हो गया। निधन के बाद उनके परिजनों ने संत रामपाल की प्रेरणा से उनका देहदान कर मानवता के प्रति अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका पार्थिव शरीर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के उद्देश्य से स्वर्गीय बिसाहू दास स्मृति महाविद्यालय, कोरबा को समर्पित किया गया।

देहदान की पूरी प्रक्रिया के दौरान परिवार के सदस्य, चिकित्सक तथा महाविद्यालय के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कदम चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देने के साथ-साथ समाज में सेवा और परोपकार की भावना को भी मजबूत करते हैं।

इस अवसर पर संत रामपाल के अनुयायी जगत महंत, अजय कुर्रे, धर्मदास, गोपाल, सिमरन सिंह, हरबंस, होरीलाल एवं ओमप्रकाश सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे। अनुयायियों ने बताया कि संत रामपाल के आध्यात्मिक मार्गदर्शन से प्रेरित होकर उनके अनुयायी देहदान, रक्तदान, नशामुक्ति अभियान, दहेज-मुक्त विवाह सहित विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यों के माध्यम से समाज में मानव सेवा और जनजागरण का संदेश फैला रहे हैं।

स्वर्गीय दुखनी साहू का देहदान सामाजिक उत्तरदायित्व, मानवता और परोपकार की एक उत्कृष्ट मिसाल बन गया है। चिकित्सा शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में ऐसे देहदान भावी चिकित्सकों के प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और समाज में सेवा व संवेदनशीलता की भावना को प्रोत्साहित करते हैं।

इसी कड़ी में संत रामपाल के सान्निध्य में संचालित ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के माध्यम से जरूरतमंद एवं असहाय परिवारों को भोजन, वस्त्र, शिक्षा और चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाओं में निःस्वार्थ सहायता प्रदान की जा रही है। यह पहल समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों के लिए सहारा बनकर मानवता, सेवा और परोपकार का संदेश जन-जन तक पहुँचा रही है।