जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन को सौंपा ज्ञापन, चेतावनी– मांग पूरी नहीं हुई तो एनएच-130 होगा जाम, कामबंद-कलमबंद हड़ताल और अनिश्चितकालीन धरना
सुशील जायसवाल
*कोरबा/पोड़ी-उपरोड़ा।*
जनपद पंचायत पोड़ी-उपरोड़ा में लंबे समय से चल रहे प्रशासनिक विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। गुरुवार को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) प्रतीक जैन के पोड़ी-उपरोड़ा दौरे के दौरान जनपद पंचायत के जनपद सदस्यों, सरपंच संघ तथा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने एकजुट होकर उन्हें ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में जनपद पंचायत के स्थानांतरित सीईओ भूपेंद्र कुमार सोनवानी को तत्काल कार्यमुक्त (रिलीव) करने की मांग की गई।

जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि आगामी चार दिनों के भीतर सीईओ सोनवानी को कार्यमुक्त नहीं किया गया तो वे राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-130 पर चक्का जाम करेंगे। इसके साथ ही जनपद पंचायत में कामबंद-कलमबंद हड़ताल शुरू कर जनपद कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि आंदोलन के कारण यदि जनहित के कार्य प्रभावित होते हैं तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

स्थानांतरण के बाद भी नहीं हुए कार्यमुक्त
ज्ञापन में बताया गया कि सीईओ भूपेंद्र कुमार सोनवानी का स्थानांतरण आदेश जारी हुए लगभग 15 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक उन्हें विधिवत कार्यमुक्त नहीं किया गया है। इससे जनपद पंचायत का प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है और कर्मचारियों सहित जनप्रतिनिधियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि शासन द्वारा स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद भी उसका पालन नहीं होना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने जिला पंचायत प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर आदेश का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की।
भ्रष्टाचार और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप
ज्ञापन में जनप्रतिनिधियों ने सीईओ भूपेंद्र कुमार सोनवानी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि विभिन्न पंचायतों के विकास कार्यों में तीन से चार प्रतिशत कमीशन की मांग की जाती है। साथ ही सरपंचों और सचिवों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार भी किया जाता है।
जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि इस प्रकार के रवैये से पंचायतों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं तथा जनप्रतिनिधियों के सम्मान को भी ठेस पहुंच रही है। उनका कहना है कि पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ सहयोगात्मक व्यवहार के बजाय दबाव और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पूरे क्षेत्र में असंतोष का माहौल बन गया है।
विकास कार्यों पर पड़ रहा असर
जनप्रतिनिधियों ने बताया कि प्रशासनिक विवाद का सीधा असर विकास योजनाओं पर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अनेक निर्माण कार्यों की गति धीमी हो गई है। कई पात्र हितग्राही आज भी पक्के मकान की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि पंचायतों के अन्य विकास कार्य भी समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रशासन ने उचित निर्णय नहीं लिया तो ग्रामीण क्षेत्रों में विकास पूरी तरह प्रभावित हो सकता है।
पहले भी हो चुका है बड़ा विरोध
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि करीब एक माह पहले भी जनपद पंचायत पोड़ी-उपरोड़ा में जनप्रतिनिधियों और सरपंचों ने सीईओ के खिलाफ तालाबंदी कर विरोध प्रदर्शन किया था। उस समय पंचायत मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत भेजी गई थी। इसके बाद सीईओ सोनवानी का स्थानांतरण आदेश जारी हुआ, लेकिन अब तक उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया।
जनप्रतिनिधियों ने मांग की कि जब तक नए अधिकारी की पदस्थापना नहीं होती, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था कर जनपद पंचायत का सुचारु संचालन सुनिश्चित किया जाए।
चार दिन का अल्टीमेटम
जनप्रतिनिधियों ने जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन को दिए गए ज्ञापन में स्पष्ट रूप से चार दिन का समय दिया है। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं हुई तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।
आंदोलन के तहत—
राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-130 पर चक्का जाम।
जनपद पंचायत में कामबंद-कलमबंद हड़ताल।
जनपद पंचायत कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना।
सभी जनपद सदस्य, सरपंच एवं क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की सामूहिक भागीदारी।
सीईओ प्रतीक जैन ने दिया आश्वासन
नवपदस्थ जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन ने जनप्रतिनिधियों की बात गंभीरता से सुनी। उन्होंने ज्ञापन प्राप्त कर आश्वासन दिया कि पूरे मामले का परीक्षण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की भावनाओं और समस्याओं को शासन स्तर तक पहुंचाया जाएगा तथा प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार उचित निर्णय लिया जाएगा।
दूसरी ओर विकास कार्यों का किया निरीक्षण
पोड़ी-उपरोड़ा प्रवास के दौरान जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन ने क्षेत्र के दूरस्थ वनांचल गांवों का भी दौरा किया। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूल भवन, प्रधानमंत्री आवास योजना के निर्माण कार्य, गोबर गैस संयंत्र सहित विभिन्न विकास कार्यों का निरीक्षण किया। अधिकारियों को गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश भी दिए।
जनप्रतिनिधियों की प्रमुख मांगें
स्थानांतरित सीईओ भूपेंद्र कुमार सोनवानी को तत्काल कार्यमुक्त किया जाए।
पंचायतों में लंबित विकास कार्यों में तेजी लाई जाए।
जनप्रतिनिधियों एवं पंचायत प्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।
प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए शीघ्र नए सीईओ की पदस्थापना की जाए।
यदि मांगें पूरी नहीं होती हैं तो आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
