विधानसभा में गूंजा हसदेव जलाशय का मुद्दा, वन अधिकार कानून के अनुरूप मत्स्य नीति में संशोधन की तैयारी

सरकार के आश्वासन से आदिवासी एवं पारंपरिक मछुआरों में खुशी, संघर्ष समिति ने किया स्वागत

कोरबा, 17 जुलाई 2026।

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में हसदेव (मिनीमाता बांगो) जलाशय, वन अधिकार मान्यता अधिनियम-2006 तथा आदिवासी एवं पारंपरिक मछुआरा समुदाय के अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार वन अधिकार मान्यता अधिनियम-2006 के अनुरूप छत्तीसगढ़ की मत्स्य नीति में आवश्यक संशोधन करने पर सहमत है और इस दिशा में गंभीरता से कार्य करेगी।

सरकार के इस आश्वासन के बाद हसदेव (मिनीमाता बांगो) जलाशय क्षेत्र के आदिवासी एवं पारंपरिक मछुआरा समुदाय में खुशी की लहर दौड़ गई है। विस्थापित आदिवासी हसदेव जलाशय मछुआरा संघर्ष समिति, जो क्षेत्र की 22 पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियों का संयुक्त संगठन है, ने सरकार के सकारात्मक रुख का स्वागत करते हुए इसे वर्षों के संघर्ष और संवैधानिक अधिकारों की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया।

समिति के सभापति एवं जनपद पंचायत पोड़ी-उपरोड़ा की मत्स्य एवं पशुपालन समिति के सभापति भारत सिंह ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम लागू होने के बावजूद मत्स्य नीति में आवश्यक संशोधन नहीं होने से आदिवासी मछुआरे अपने अधिकारों से वंचित थे। अब सरकार द्वारा विधानसभा में नीति संशोधन का आश्वासन ऐतिहासिक कदम साबित होगा।

उन्होंने कहा कि यदि वन अधिकार कानून के अनुरूप मत्स्य नीति में संशोधन लागू होता है तो इसका लाभ केवल हसदेव जलाशय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश के वन भूमि पर निर्मित लगभग दो लाख हेक्टेयर जलाशयों से जुड़े आदिवासी एवं पारंपरिक मछुआरा समुदायों को भी मिलेगा। इससे वर्षों से चली आ रही ठेका प्रथा समाप्त होने का मार्ग प्रशस्त होगा और स्थानीय समुदायों को उनके वैधानिक अधिकार मिल सकेंगे।

संघर्ष समिति का कहना है कि लंबे समय से ठेका व्यवस्था के कारण स्थानीय मछुआरे आर्थिक और सामाजिक रूप से प्रभावित होते रहे हैं, जबकि जलाशयों के आसपास रहने वाले आदिवासी परिवार पीढ़ियों से इन प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर हैं। ऐसे में मत्स्य नीति में संशोधन सामाजिक न्याय और संविधान प्रदत्त अधिकारों को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

समिति ने विधानसभा में इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत का आभार व्यक्त किया। साथ ही राज्य सरकार का धन्यवाद देते हुए उम्मीद जताई कि जल्द ही आवश्यक कानूनी एवं नीतिगत संशोधन कर नई मत्स्य नीति लागू की जाएगी, जिससे प्रदेश के हजारों आदिवासी एवं पारंपरिक मछुआरा परिवारों की आजीविका सुरक्षित होगी, स्थानीय मत्स्य सहकारी समितियां मजबूत होंगी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।