
✍️ भागीरथी यादव
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने रविवार को बड़ी कार्रवाई की। रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में शराब कारोबारियों के 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। इस दौरान दस्तावेज़ों और लेन-देन से जुड़े सबूतों की जांच की गई। राजधानी रायपुर के शिव विहार कॉलोनी में शराब कारोबारी अवधेश यादव का घर भी कार्रवाई की जद में आया।
घोटाले की पृष्ठभूमि
ईओडब्ल्यू के अनुसार यह घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच कांग्रेस शासनकाल में हुआ। आरोप है कि लाइसेंसी शराब दुकानों पर डुप्लिकेट होलोग्राम लगाकर अवैध शराब बेची गई, जिससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।

जांच में सामने आया कि नकली होलोग्राम बनाने का ठेका उत्तर प्रदेश की PHSE कंपनी को दिया गया था, जबकि कंपनी इसके लिए पात्र नहीं थी। टेंडर दिलाने के एवज में कंपनी मालिक से भारी कमीशन वसूला गया।
बड़ी गिरफ्तारियां और नाम
ईओडब्ल्यू ने अब तक PHSE कंपनी के मालिक विधु गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में गुप्ता ने कांग्रेस सरकार के दौरान आबकारी विभाग से जुड़े कई बड़े नामों का खुलासा किया। इसमें सीएसएमसीएल के पूर्व एमडी अरुणपति त्रिपाठी, कारोबारी अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा का नाम सामने आया।
वर्ष 2024 के अंत में जांच आगे बढ़ी तो कांग्रेस विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा का नाम भी जुड़ गया। सूत्रों के मुताबिक, लखमा को कथित तौर पर शराब घोटाले से जुड़े “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” (POC) के जरिए हर महीने कमीशन मिलता था।
राजनीतिक हलचल
ईओडब्ल्यू की ताजा छापेमारी से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं के नाम सामने आने से आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।






