“आई लव यू” कहना और हाथ पकड़ना भी अपराध, हाईकोर्ट का सख्त संदेश

✍️ भागीरथी यादव

 

महिला की मर्यादा भंग करने का मामला, पॉक्सो से बरी लेकिन IPC 354 में दोष बरकरार

रायपुर/बिलासपुर।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि “आई लव यू” कहना, किसी लड़की का हाथ पकड़ना और जबरन अपनी ओर खींचना महिला की मर्यादा भंग करने की श्रेणी में आता है और यह दंडनीय अपराध है।

हालांकि, पीड़िता की उम्र नाबालिग साबित नहीं हो पाने के कारण कोर्ट ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट से बरी कर दिया, लेकिन आईपीसी की धारा 354 के तहत दोष को बरकरार रखते हुए सजा को 3 साल से घटाकर 1 साल कर दिया।

हाईकोर्ट का स्पष्ट रुख

जस्टिस एन.के. चंद्रवंशी की सिंगल बेंच ने कहा कि महिलाओं की मर्यादा का अर्थ केवल शारीरिक नहीं, बल्कि उनकी गरिमा और यौन शालीनता (Sexual Decency) से जुड़ा है। ऐसी हरकतें समाज में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती हैं और इन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता।

क्या है पूरा मामला

घटना 28 नवंबर 2019 की है। रायगढ़ जिले के भूपदेवपुर थाना क्षेत्र में रहने वाली एक छात्रा स्कूल से घर लौट रही थी। इसी दौरान 19 वर्षीय रोहित चौहान ने उसका हाथ पकड़कर “आई लव यू” कहा और उसे जबरन अपनी ओर खींचने लगा। विरोध करने पर आरोपी ने गाली-गलौज की। पीड़िता की छोटी बहन और एक सहेली ने बीच-बचाव किया, जिसके बाद वे डर के कारण छिप गईं।

घर पहुंचकर पीड़िता ने मां को घटना बताई और पिता के साथ थाने जाकर शिकायत दर्ज कराई।

फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला

रायगढ़ की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 20 मई 2022 को आरोपी को

IPC धारा 354

पॉक्सो एक्ट की धारा 8

के तहत दोषी मानते हुए 3-3 साल की सजा और एक-एक हजार रुपए जुर्माना लगाया था।

हाईकोर्ट में क्यों बदला फैसला

अपील के दौरान आरोपी की ओर से तर्क दिया गया कि पीड़िता की उम्र का कोई ठोस प्रमाण नहीं है।

स्कूल रिकॉर्ड में जन्मतिथि 15 जून 2005 दर्ज

पिता ने गवाही में जन्म वर्ष 2003 बताया

न तो जन्म प्रमाणपत्र और न ही आधार कार्ड पेश किया गया

कोर्ट ने माना कि उम्र संदेह से परे साबित नहीं हुई, इसलिए पॉक्सो एक्ट लागू नहीं हो सकता।

अंतिम आदेश

पॉक्सो एक्ट की धारा 8 निरस्त

IPC धारा 354 में दोष सिद्ध

सजा 3 साल से घटाकर 1 साल

आरोपी फिलहाल जमानत पर, शेष सजा काटने के लिए सरेंडर करने का निर्देश

महत्वपूर्ण संदेश

यह फैसला समाज को स्पष्ट संदेश देता है कि महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार की जबरदस्ती, अश्लील या अमर्यादित हरकत कानूनन अपराध है, भले ही उसे हल्के शब्दों या “प्रेम प्रस्ताव” का नाम दिया जाए।