गोंडवाना के जननायक हीरा सिंह मरकाम की 5वीं पुण्यतिथि पर सिमगा में ‘हीरा-मोती सेना’ का विशाल आयोजन

 

सुशील जायसवाल, सिमगा/सिरमिना से विशेष रिपोर्ट

 

सिमगा में मंगलवार, 28 अक्टूबर को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के संस्थापक एवं आदिवासी समाज के महान नेता दादा हीरा सिंह मरकाम की 5वीं पुण्यतिथि पर भव्य श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

‘हीरा-मोती चौक, सिमगा’ में हुए इस आयोजन में हजारों की संख्या में कार्यकर्ता और अनुयायी एकत्र हुए। सभी ने दादा मरकाम को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

 

✦ जननायक का स्मरण: ‘हीरा’ के बिना ‘मोती’ अधूरा

 

आदिवासी समाज में ‘हीरा-मोती’ के नाम से प्रसिद्ध हीरा सिंह मरकाम और आचार्य मोतीरावण कंगाली की जोड़ी ने गोंडी संस्कृति, भाषा और अधिकारों की रक्षा के लिए लंबा संघर्ष किया था।

दादा मरकाम का निधन 28 अक्टूबर 2020 को हुआ था, लेकिन उनके विचार आज भी गोंडवाना आंदोलन की दिशा तय कर रहे हैं।

 

✦ सिमगा में एकजुटता का प्रदर्शन

 

‘हीरा-मोती सेना’ के तत्वावधान में हुए इस आयोजन में कार्यकर्ताओं ने विशाल उपस्थिति दर्ज कराई।

कार्यक्रम में संयोजक योगेन्द्र राजन, अध्यक्ष दिनेश्वर मरकाम, रणजीत आर्मो, दिलेश आयाम, राकेश आर्मों, लक्ष्मण पुलस्त, नाहक, विनोद, देवेंद्र, रामकुमार, आकाश धनुहार, महावीर आर्मो, बिट्टू सरुता, रवि, देव प्रताप समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

सभी ने दादा मरकाम की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके संघर्षों को याद किया।

 

✦ संघर्ष और स्वाभिमान की मशाल

 

इस अवसर पर संयोजक योगेन्द्र राजन ने कहा—

 

> “दादा मरकाम ने हमें स्वाभिमान से जीना और अधिकार के लिए लड़ना सिखाया। आज हम संकल्प लेते हैं कि उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुँचाएँगे।”

 

 

 

वहीं, अध्यक्ष दिनेश्वर मरकाम ने कहा—

 

> “दादा के सिद्धांत ‘जल, जंगल, ज़मीन’ पर सभी का समान अधिकार है। हमें उनकी विचारधारा को घर-घर तक पहुँचाना है ताकि गोंडवाना आंदोलन की मशाल सदा प्रज्वलित रहे।”

 

 

 

✦ श्रद्धांजलि से आगे — एकजुटता और संकल्प का प्रतीक

 

यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि सभा नहीं, बल्कि गोंडवाना की एकता और स्वाभिमान का प्रतीक बना।

कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि महान नेता मर सकते हैं, पर उनके विचार अमर रहते हैं।

दादा हीरा सिंह मरकाम का नाम सदैव गोंडवाना आंदोलन के इतिहास में सम्मानपूर्वक लिया जाता रहेगा।

सिमगा की यह एकजुटता उनके अनुयायियों के अटल विश्वास और संघर्षशीलता की मिसाल बनी।