आरोपी चौकी में मौजूद, फिर क्यों बताया जाता रहा फरार? पुलिस की कार्यप्रणाली पर पीड़िता ने उठाए सवाल…..

✍️ भागीरथी यादव

 

 

शादी का झांसा देकर दुष्कर्म और मृत पति की 5 लाख रुपये की बीमा राशि हड़पने का आरोप; बेलगहना चौकी से रतनपुर थाने तक कार्रवाई पर सवाल, CCTV फुटेज और पुलिसकर्मियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग

 

बेलगहना/बिलासपुर। शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने और मृत पति की बीमा राशि के करीब 5 लाख रुपये वापस नहीं करने के आरोप में राकेश पांडे की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। पीड़िता ने बेलगहना चौकी से लेकर रतनपुर थाने तक पुलिसकर्मियों की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पीड़िता का दावा है कि 2 अक्टूबर को जब वह शिकायत लेकर बेलगहना चौकी पहुंची थी, तब आरोपी भी चौकी में मौजूद था। इसके बावजूद बाद में उसे फरार बताया जाता रहा। वहीं, रतनपुर थाने में बयान दर्ज करते समय बीमा की 5 लाख रुपये की राशि से जुड़े आरोप को कथन में शामिल नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

शिकायत करने पहुंची तो समझौते का दबाव बनाने का आरोप

 

पीड़िता के अनुसार, 2 अक्टूबर 2026 को वह राकेश पांडे के खिलाफ शिकायत लेकर बेलगहना चौकी पहुंची थी। आरोप है कि वहां पुलिसकर्मियों ने शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करने के बजाय आरोपी को भी चौकी बुलाया और दोनों के बीच समझौता कराने का प्रयास किया। पीड़िता का कहना है कि उसे मामला दर्ज नहीं कराने की सलाह देते हुए 5 लाख रुपये दिलाने की बात कही गई। हालांकि, उसने समझौता करने से इनकार कर कानूनी कार्रवाई की मांग की। इसके बाद उसे कोटा थाना ले जाया गया, जहां महिला विवेचक उपलब्ध नहीं होने के कारण अंततः रतनपुर थाना पहुंचाया गया। वहां उसकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई।

 

चौकी में मौजूदगी के बावजूद फरार बताने पर सवाल

 

पीड़िता ने सवाल उठाया है कि जब 2 अक्टूबर को आरोपी पुलिस के बुलाने पर बेलगहना चौकी में मौजूद था, तो बाद में उसे फरार क्यों बताया जाता रहा? पीड़िता ने उस दिन चौकी में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित कर जांच कराने की मांग की है। उसका कहना है कि फुटेज से आरोपी की मौजूदगी और उस दिन हुई बातचीत की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

 

बयान से 5 लाख रुपये के लेन-देन का जिक्र गायब होने का आरोप

 

पीड़िता ने रतनपुर थाने में बयान दर्ज करने वाली उपनिरीक्षक प्रमिला पटेल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उसका कहना है कि बयान के दौरान उसने मृत पति के काम के सिलसिले में आरोपी से 50 हजार रुपये लेने और बाद में वापस करने की जानकारी दी थी। इसके साथ ही उसने आरोप लगाया था कि मृत पति की बीमा राशि के रूप में मिले करीब 5 लाख रुपये आरोपी ने काम के लिए यह कहकर ले लिए थे कि बाद में लौटा देगा, लेकिन रकम वापस नहीं की।

 

पीड़िता का आरोप है कि बयान में 50 हजार रुपये के लेन-देन का उल्लेख किया गया, लेकिन बीमा की 5 लाख रुपये की रकम से संबंधित शिकायत को शामिल नहीं किया गया। आपत्ति जताने पर उसे कथित तौर पर चुप रहने और बयान लिखने देने के लिए कहा गया। पीड़िता का सवाल है कि जब उसने आर्थिक लेन-देन से जुड़ी पूरी जानकारी पुलिस को दी थी, तो उसे मूल कथन में दर्ज क्यों नहीं किया गया?

 

घर में मौजूद होने की सूचना के बाद गिरफ्तारी

 

पीड़िता का यह भी आरोप है कि उसने कई बार पुलिस को जानकारी दी थी कि आरोपी अपने घर में ही मौजूद है, लेकिन उसकी सूचनाओं को गंभीरता से नहीं लिया गया। उसका दावा है कि बाद में पुलिस आरोपी के घर पहुंची तो वह अंदर ही मौजूद मिला और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इस घटनाक्रम को लेकर भी पीड़िता ने पुलिस की कार्रवाई में हुई देरी पर सवाल उठाए हैं।

 

वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग

 

पीड़िता ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि 2 अक्टूबर को बेलगहना चौकी के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर उनकी जांच कराई जाए। उस दिन ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका की पड़ताल हो तथा रतनपुर थाने में दर्ज मूल बयान और एफआईआर का मिलान किया जाए। साथ ही, बीमा की 5 लाख रुपये की राशि से संबंधित आरोप कथन में शामिल नहीं किए जाने के मामले की भी जांच कराई जाए।

 

गिरफ्तारी के बाद भी उठ रहे कई सवाल

 

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद भी पीड़िता के आरोपों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत के समय आरोपी की कथित मौजूदगी के बावजूद उसे फरार क्यों बताया गया? क्या पीड़िता पर समझौते का दबाव बनाया गया था? बयान दर्ज करते समय 5 लाख रुपये के लेन-देन का आरोप क्यों शामिल नहीं किया गया? इन सभी बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।

 

फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है। हालांकि, पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष भी सामने आना शेष है। अब देखना होगा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और पीड़िता की शिकायतों पर क्या कार्रवाई करते हैं।