✍️ भागीरथी यादव
16वें वित्त आयोग की राशि से लेकर पीएम आवास, रेत घाट और आंगनवाड़ी भर्ती में अनियमितताओं का उठाया मुद्दा; CEO को एक सप्ताह का अल्टीमेटम, कार्रवाई नहीं होने पर जनपद कार्यालय के सामने धरने की चेतावनी

बिलासपुर। कोटा जनपद पंचायत में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जनपद सदस्य श्रीमती रश्मि घनश्याम दीक्षित (करगी खुर्द) ने पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आगामी 5 नवंबर को आयोजित होने वाली सामान्य सभा की बैठक का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। उन्होंने 4 नवंबर को मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) को लिखित शिकायत सौंपकर विभिन्न मामलों की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। साथ ही प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है।

जनपद सदस्य का आरोप है कि सामान्य सभा की बैठक से सात दिन पूर्व एजेंडा और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था का पालन नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि 5 नवंबर की बैठक के संबंध में 3 नवंबर को ही लिखित एवं व्हाट्सएप के माध्यम से सूचना दी गई, जिससे जनप्रतिनिधियों को विषयों की तैयारी और अध्ययन के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। इसे उन्होंने जनप्रतिनिधियों के अधिकारों और पंचायती राज व्यवस्था की मर्यादा की अनदेखी बताया है।

चार प्रमुख मामलों में जांच की मांग
श्रीमती दीक्षित ने अपनी शिकायत में 16वें वित्त आयोग की राशि के कथित नियम विरुद्ध आवंटन और उसे सामान्य सभा में पारित कराने के प्रयास पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित अवैध वसूली, गौठान एवं खनिज मद की राशि के वितरण में अनियमितता, रेत घाटों से कथित अवैध वसूली तथा आंगनवाड़ी भर्ती प्रक्रिया में मनमानी के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं हुई तो धरना
जनपद सदस्य ने स्पष्ट किया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) एवं मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक अपनी शिकायत पहुंचाएंगी। इसके साथ ही जनपद पंचायत कार्यालय के सामने धरना देने की चेतावनी भी दी है।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के अधिकारों की अनदेखी और सरकारी योजनाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर उनकी लड़ाई जारी रहेगी। अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि शिकायत में उठाए गए बिंदुओं की जांच कब शुरू होती है और संबंधित मामलों में क्या कदम उठाए जाते हैं।
