खरीफ सीजन की दस्तक के साथ बढ़ी चिंता: वनांचल में हाथियों का जमावड़ा, जटगा रेंज में 48 हाथियों का विचरण

 

 

मातिन पहाड़ पहुंचे सात हाथी, ग्रामीणों और किसानों में बढ़ी दहशत

 

सुशील जायसवाल

 

मातिन (पोड़ी उपरोड़ा)। खरीफ सीजन की शुरुआत और मानसून की दस्तक के साथ ही कटघोरा वन मंडल के वनांचल क्षेत्रों में हाथियों की सक्रियता एक बार फिर बढ़ने लगी है। पिछले लगभग आठ वर्षों से स्थायी रूप से डेरा जमाए हुए हाथियों के झुंड अब धीरे-धीरे जंगलों से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख करने लगे हैं, जिससे किसानों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। कृषि कार्यों में जुटे ग्रामीणों के सामने अब फसलों की सुरक्षा के साथ-साथ अपनी जान-माल की सुरक्षा की चुनौती भी खड़ी हो गई है।

जानकारी के अनुसार वर्तमान में कटघोरा वन मंडल के जटगा रेंज अंतर्गत लगभग 48 हाथियों का बड़ा दल विचरण कर रहा है। इनमें से सात हाथियों का समूह मातिन पहाड़ क्षेत्र में पहुंच चुका है, जबकि शेष हाथी बासिन और आसपास के वन क्षेत्रों में डेरा जमाए हुए हैं। इसके अलावा एक एकल हाथी केंदई एवं एतमानगर रेंज के बीच लगातार भ्रमण कर रहा है, जिसकी गतिविधियों पर वन विभाग की टीम नजर बनाए हुए है।

 

खरीफ सीजन शुरू होते ही बढ़ जाती है हाथियों की सक्रियता

 

वन क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि हर वर्ष खरीफ सीजन के दौरान हाथियों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। जैसे ही किसान धान की खेती के लिए खेतों की तैयारी शुरू करते हैं और बाद में फसल बढ़ने लगती है, हाथियों के झुंड भोजन और पानी की तलाश में जंगलों से बाहर निकलकर गांवों और खेतों की ओर पहुंचने लगते हैं। धान की फसल हाथियों का पसंदीदा भोजन मानी जाती है, जिसके कारण फसल पकने के समय मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं बढ़ जाती हैं।

 

पिछले वर्षों के अनुभव बताते हैं कि जटगा, केंदई, पसान और एतमानगर रेंज के अनेक गांव हाथियों की आवाजाही से प्रभावित होते रहे हैं। कई बार हाथियों के झुंड खेतों में घुसकर एक ही रात में कई एकड़ फसल चौपट कर देते हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

 

ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ी सतर्कता

 

मातिन, बासिन, चोटिया, पसान, जटगा और आसपास के गांवों में हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने सतर्कता बढ़ा दी है। ग्रामीण रात के समय समूह बनाकर निगरानी कर रहे हैं तथा खेतों की रखवाली की तैयारी शुरू कर दी गई है। वहीं वन विभाग भी हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है और प्रभावित गांवों में मुनादी तथा जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सावधान रहने की सलाह दे रहा है।

 

वन अमला ग्रामीणों से अपील कर रहा है कि हाथियों के निकट जाने, उन्हें छेड़ने या भगाने का प्रयास न करें। हाथियों के विचरण की सूचना तत्काल वन विभाग को दें तथा रात के समय अकेले जंगल या खेत की ओर न जाएं।

 

मानव-हाथी संघर्ष बना बड़ी चुनौती

 

कटघोरा वन मंडल में बीते वर्षों के दौरान हाथियों द्वारा फसल नुकसान, मकान क्षति और जनहानि की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। वन क्षेत्रों के सिकुड़ने और भोजन-पानी की उपलब्धता में कमी के कारण हाथी लगातार आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते दीर्घकालिक समाधान नहीं निकाला गया तो मानव-हाथी संघर्ष की समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

 

वन विभाग ने की सावधानी बरतने की अपील

 

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जटगा रेंज में विचरण कर रहे हाथियों की निगरानी की जा रही है। हाथियों की लोकेशन लगातार ट्रैक की जा रही है ताकि किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में ग्रामीणों को समय रहते सूचना दी जा सके। विभाग ने ग्रामीणों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतें और किसी भी आपात स्थिति की जानकारी तत्काल वन अमले को दें।

 

खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही हाथियों की बढ़ती सक्रियता ने एक बार फिर वनांचल क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में यदि हाथियों के दल आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ते हैं तो फसलों के साथ-साथ जन-धन की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बन सकती है। ऐसे में वन विभाग, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय ही इस समस्या से निपटने का सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है।