महाराष्ट्र बॉर्डर से आए मरीज की जान बचाकर बिलासपुर के डॉक्टरों ने किया कमाल—हार्ट के अंदर धँसी गोली निकाल रचा इतिहास

✍️ भागीरथी यादव

 

बिलासपुर।

पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट ने एक अत्यंत जोखिमपूर्ण और दुर्लभ ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा जगत में नई उपलब्धि दर्ज की है। हार्ट सर्जरी विभाग के डॉ. कृष्णकांत साहू और उनकी टीम ने 40 वर्षीय मरीज के हृदय के अंदर धँसी गोली निकालकर उसकी जान बचाई। यह केस इतना जटिल था कि ऑपरेशन टेबल पर मौत की आशंका (D.O.T.) लगभग निश्चित मानी जा रही थी।

 

पीठ से छाती, फेफड़े चीरते हुए गोली पहुँची दिल तक

 

महाराष्ट्र बॉर्डर क्षेत्र का रहने वाला घायल युवक गंभीर अवस्था में अस्पताल के ट्रॉमा यूनिट में लाया गया। भर्ती के समय उसका ब्लड प्रेशर मात्र 70/40 mmHg था। सीटी स्कैन में खुलासा हुआ कि गोली पीठ से प्रवेश कर पसलियों और फेफड़ों को चीरते हुए सीधे हार्ट के राइट वेंट्रिकल (Right Ventricle) में धँस गई थी।

गोली से हृदय में बने छेद के कारण खून हार्ट के चारों ओर जमा होकर अत्यधिक दबाव पैदा कर रहा था, जिसे कार्डियक टैम्पोनेड कहते हैं। इस स्थिति में कुछ ही मिनटों की देरी मरीज की जान ले सकती थी।

 

तुरंत ओपन हार्ट सर्जरी का फैसला—परिजनों से हाई रिस्क कन्सेंट

 

स्थिति का आकलन करते हुए डॉक्टरों ने तत्काल ओपन हार्ट सर्जरी का निर्णय लिया। हाई रिस्क और “डेथ ऑन टेबल” कन्सेंट लेकर मरीज को कार्डियक ओटी में शिफ्ट किया गया, क्योंकि सीटी स्कैन से स्पष्ट था कि गोली हृदय के चैम्बर के भीतर फंसी हुई है।

 

हार्ट-लंग मशीन के सहारे रुकी दिल की धड़कन—राइट एट्रियम चीरा

टीम ने हार्ट-लंग मशीन की मदद से दिल की धड़कन को अस्थायी रूप से रोका। इसके बाद

राइट एट्रियम को चीरा,

ट्राइकस्पिड वाल्व को पार किया,

 

और राइट वेंट्रिकल के भीतर धँसी 8mm x 4mm की गोली को खोजकर बाहर निकाला।

गोली का पता लगाना हुआ सबसे बड़ी चुनौती

टीईई (Transesophageal Echocardiography) से भी गोली की सही स्थिति नहीं मिल पाई। ऐसे में मूवेबल डिजिटल एक्स-रे मशीन इस सर्जरी में वरदान साबित हुई। कई बार एक्स-रे लेने के बाद ही हृदय की मांसपेशियों में धँसी गोली को सटीक स्थान पर पहचाना जा सका।

डॉ. कृष्णकांत साहू के अनुसार यह वायरलेस डिजिटल एक्स-रे सिस्टम ऑपरेशन में निर्णायक साबित हुआ, क्योंकि यह कैमरे की तरह तुरंत स्क्रीन पर तस्वीर उपलब्ध करा देता है।

चार घंटे चली जटिल सर्जरी—7 यूनिट ब्लड की जरूरत

इस बहुचर्चित ऑपरेशन में लगभग 4 घंटे लगे और 7 यूनिट रक्त का इस्तेमाल किया गया। फेफड़े के छेद, पल्मोनरी आर्टरी और हार्ट की मरम्मत सटीकता से की गई।

मरीज की स्थिति स्थिर—जल्द होगा डिस्चार्ज

 

सर्जरी सफल होने के बाद मरीज की हालत लगातार सुधर रही है और चिकित्सकों के अनुसार उसे एक-दो दिनों में अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।

एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट की इस सफलता ने छत्तीसगढ़ के चिकित्सा क्षेत्र को राष्ट्रीय पटल पर एक बार फिर गौरवान्वित किया है।