सुशील जयसवाल
पहले चरण में 240 शौचालयों को मंजूरी, जल संरक्षण के 1192 से अधिक कार्यों को भी मिली स्वीकृति
कोरबा, 12 अगस्त। ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से कोरबा जिले में ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना के तहत विकास कार्यों को गति दी जा रही है। योजना के अंतर्गत जिले के 600 से अधिक शासकीय स्कूलों में बालिका शौचालय निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रथम चरण में 240 बालिका शौचालयों के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।
कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में ग्रामीण अधोसंरचना, जनसुविधाओं तथा जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ स्वीकृत किया जा रहा है।
पांचों विकासखंडों में बनेंगे बालिका शौचालय
पहले चरण में जिले के सभी पांच विकासखंडों के स्कूलों को शामिल किया गया है। इनमें पाली विकासखंड के 68, कोरबा के 64, पोड़ी-उपरोड़ा के 62, करतला के 28 और कटघोरा के 18 स्कूलों में बालिका शौचालय निर्माण की स्वीकृति दी गई है। शेष चिन्हित स्कूलों में आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद जल्द ही स्वीकृति जारी करने की बात कही गई है।
इन निर्माण कार्यों से छात्राओं को स्कूल परिसर में स्वच्छ एवं सुरक्षित शौचालय की सुविधा मिलने के साथ स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद है।
जल संरक्षण के 1192 से अधिक कार्यों को मंजूरी
योजना के तहत ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान के माध्यम से जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। जिले में 891 कृषि डबरी, 86 परकोलेशन टैंक, 33 नवीन तालाब, 21 कंटूर ट्रेंच और 161 डिफंक्ट बोरवेल से संबंधित कार्यों को स्वीकृति दी गई है। इन जल संरचनाओं के निर्माण से बारिश के पानी को सहेजने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और आजीविका गतिविधियों के लिए जल उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
मुक्तिधाम, पीडीएस भवन और वर्कशेड भी होंगे विकसित
योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों की अन्य जरूरतों को भी शामिल किया गया है। 15 मुक्तिधामों के निर्माण के साथ स्थानीय आवश्यकता के अनुसार पीडीएस भवन और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए वर्कशेड निर्माण को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार का प्रावधान
‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना के तहत मांग के आधार पर अकुशल श्रमिकों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार का प्रावधान किया गया है। योजना में केंद्र और राज्य सरकार की वित्तीय हिस्सेदारी 60:40 निर्धारित है।
जिले में बड़ी संख्या में स्वीकृत इन कार्यों से एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण होगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
