✍️ भागीरथी यादव
बार-बार नए नियम बदलाव कर कार्यवाही करने एवं पक्षपात से है परेशान
ग्राम जटराज , तहसील दर्री के किसान जमीन अर्जन के बाद प्रदान किए जाने वाले रोजगार , मुआवजा एवं पुनर्वास संबंधी समस्याओं के निराकरण नहीं होने से परेशान है। अभी कुछ महीनो से परिसंपत्तियों के मापन एवं भुगतान एवं बसाहट के संबंध में बार-बार नियमों में बदलाव करने से परेशान है। इसके संबंध में कई बार आवेदन करने के उपरांत समस्या का निराकरण नहीं किया गया है। जिसे क्षुब्ध होकर 29 जून को तहसील कार्यालय दर्री का घेराव एवं 7 जुलाई को कुसमुंडा महाप्रबंधक कार्यालय का घेराव करने का निर्णय लिया है ।
ग्राम जटराज का अर्जन चार चरणों में किया गया है। प्रथम 1978 द्वितीय 1983 तृतीय 1984 एवं अंतिम चौथी बार 2010 में अर्जन किया गया है । अर्जन उपरांत ग्रामीणों को एक ही स्थान पर बसाहर देने के बजाय टुकड़ों में अलग-अलग स्थान में बसाहट दी जा रही है जिससे ग्रामीणों में नाराजगी व्याप्त है । सर्वमंगला नगर बसाहट में 54 भूमिहीन परिवारों को लगभग 2 वर्ष पूर्व पुनर्वास प्लाट प्रदान किया गया है । शेष ग्रामीणों को नहर किनारे मिट्टी डम्प को समतल कर पुनर्वास प्लाट दिया जा रहा है । मिट्टी के कमजोर होने से निर्मित बिल्डिंग के क्रैक एवं जान जाने का खतरा बना हुआ है । हल्की बारिश में मिट्टी कट कर बहने लगती है एवं नाली का रूप ले लेती हैं । बसाहट में सुविधाओं का निर्माण कार्य गुणवत्ताहीन पूर्वक हो रहा है । बसाहट स्थल में बगैर संपूर्ण सुविधाओं का विस्तार किए दबाव पूर्वक बसाहट में जाने के लिए कुसमुंडा प्रबंधन के द्वारा प्रयास किया जा रहा है । इसके लिए प्रबंधन द्वारा यह नोटिस ग्राम में चस्पित कराई गई है कि 30 जून तक परिसंपत्तियां की 50% राशि प्राप्त कर ले अन्यथा राशि ट्रिब्यूनल में जमा कर दी जाएगी । ग्राम जटराज के सर्वेंड होने के आधार पर जिन मकानधारियों के मकान को शासकीय भूमि पर स्थित माना जा रहा है। उनका नाम बसाहट सूची में नहीं है। प्रबंधन उसे बसाहट के लिए अपात्र मान रहा है, जबकि 2 वर्ष पूर्व भूमिहीन शासकीय भूमि में मकान बनाकर निवासरत लोगों को पुनर्वास प्रदान किया है ।
परिसंपत्तियों के मापन में भी व्यापक पैमाने पर अनियमितता बरती गई है । प्रशासन के द्वारा पर परिसंपत्तियों के मापन हेतु कमेटी का गठन किया गया है , जो मापन के लिए तकनीकी जानकार हैं। इसके विरुद्ध गैर तकनीकी जानकार एसईसीएल के अधिकारियों द्वारा परिसंपत्तियो का मापन कार्य किया जा रहा है । इसके उपरांत उसे कमेटी द्वारा मापन दिखाने हेतु फर्जी रूप से बाद में हस्ताक्षर कराया जा रहा है । मापन के दौरान कमेटी मेंबर प्रत्यक्ष रूप से मापन में उपस्थित नहीं रहते हैं । परिसंपत्तियों का मापन के संबंध में पावती मांगने पर प्रदान नहीं की जा रही है । मापन के दौरान अनेक मकान धारी के द्वारा नियमों के विरुद्ध मापन करने पर सहमति हेतु हस्ताक्षर नहीं किया गया है उनके परिसंपत्तियों का भी मुआवजा राशि तैयार की गई है । परिसंपत्तियों के मापन में व्यापक पैमाने पर नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है । जिसके फलस्वरुप ग्रामीणों में रोष व्याप्त है ।
ग्राम जतराज मसाहती ग्राम है । ग्राम का नक्शा नहीं होने के कारण काबिज भूमि को खसरा मानकर कार्यवाही की जा रही थी । वर्ष 2010 में अर्जन के बाद मसाहती मानकर 2025 तक कार्यवाही की गई । एकाएक तहसीलदार दर्री श्रीमती चंद्रा मैडम एवं दीपका तहसीलदार श्री अमित केरकेट्टा के द्वारा ग्राम का सर्वेड होने नक्शा निर्धारण की जानकारी देते हुए खसरे को अन्यत्र बताते हुए परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में सोलिशियम की कटौती की जा रही है । यह कटौती 2025 तक मसाहती मानते हुए नहीं की गई । अर्जन के 15 वर्षों तक मसाहती मानकर कार्यवाही की गई । एकाएक सर्वेंड होने की जानकारी देकर कटौती की जा रही है
इसके संबंध में दस्तावेज की मांग करने पर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। ज्ञात हो कि 2010 के अर्जन के समय नक्शा निर्धारण हेतु प्रशासन के द्वारा प्रयास किया गया था , परंतु नक्शा का निर्धारण के दौरान आपत्तियां आने एवं विभिन्न तकनीकी कारणों से पूरा नहीं हुआ । उक्त समय ग्रामीणों के द्वारा आपत्ति की गई थी ।
