
अंधे दिव्यांग हितग्राही के प्रधानमंत्री आवास में भारी गड़बड़ी, मिट्टी की दीवार और बांस के सहारे छत डालने की तैयारी
अंगूठा लगवाकर राशि निकालने का आरोप, ग्रामीणों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
सुशील जायसवाल
कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित एवं पक्का आवास उपलब्ध कराना है, लेकिन कोरबा जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में इस योजना की जमीनी सच्चाई कई सवाल खड़े कर रही है। अधिकारियों की कथित लापरवाही, पंचायत स्तर पर निगरानी की कमी और निर्माण कार्य में अनियमितताओं के चलते गरीब हितग्राहियों के सपनों का घर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है।
ऐसा ही एक गंभीर मामला पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत घुंचापर के आश्रित ग्राम बोरला बारी से सामने आया है, जहां आंखों से पूरी तरह अंधे और शारीरिक रूप से दिव्यांग युवक संतराम धनुवार के प्रधानमंत्री आवास निर्माण में भारी गड़बड़ी और वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं।

बताया जा रहा है कि 25 वर्षीय संतराम धनुवार अत्यंत गरीबी में जीवन यापन कर रहा है। माता-पिता के निधन के बाद वह अकेले किसी तरह अपना जीवन गुजार रहा है। नेत्रहीन होने के कारण वह मजदूरी या अन्य काम करने में भी असमर्थ है। रहने के लिए उसके पास सुरक्षित मकान तक नहीं है और वह खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने को मजबूर है।

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खुले आसमान के नीचे गुजर रही जिंदगी
पीड़ित संतराम ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास मिलने की सूचना के बाद उसे उम्मीद थी कि अब उसे भी रहने के लिए सुरक्षित घर मिलेगा, लेकिन निर्माण कार्य में जिस तरह की लापरवाही बरती जा रही है, उससे उसका सपना टूटता नजर आ रहा है।
उसका आरोप है कि उसे निर्माण कार्य की जानकारी तक नहीं दी जा रही और उसके नाम से राशि निकालकर घटिया निर्माण कराया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि हितग्राही की मजबूरी और दिव्यांगता का फायदा उठाया जा रहा है।
नेत्रहीन संतराम, खुले आसमान के नीचे रह कर अपना जीवन यापन कर रहा है!

मिट्टी से दीवार, फटते कॉलम और घटिया निर्माण
ग्रामीणों के अनुसार निर्माणाधीन मकान में गुणवत्ता की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। दीवारों में सीमेंट और मजबूत मसाले की जगह मिट्टी का उपयोग कर ईंट जोड़ाई की गई है। इतना ही नहीं, मकान के कॉलम भी कई जगह से फटने लगे हैं, जिससे भविष्य में मकान गिरने का खतरा पैदा हो गया है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा। मकान की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई तक में कटौती कर राशि बचाने का प्रयास किया गया है।
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बांस और लकड़ी के सहारे छत डालने की तैयारी!
ग्रामीणों ने बताया कि निर्माणकर्ता द्वारा छत निर्माण में भी गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। आरोप है कि मजबूत निर्माण सामग्री के बजाय लकड़ी और बांस के सहारे छत डालने की तैयारी की जा रही है, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो यह मकान कभी भी जर्जर होकर गिर सकता है और हितग्राही की जान खतरे में पड़ सकती है।
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अंगूठा लगवाकर निकाल ली गई राशि!
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब पीड़ित संतराम धनुवार ने आरोप लगाया कि ग्राम लाद निवासी अशोक कोल द्वारा उसे चोटिया स्थित ग्राहक सेवा केंद्र ले जाया गया और वहां उसके अंगूठे लगवाकर प्रधानमंत्री आवास की राशि निकाल ली गई।
संतराम का कहना है कि उसे यह तक नहीं बताया गया कि उसके खाते से कितनी राशि निकाली गई और किस काम में खर्च की गई। एक नेत्रहीन एवं असहाय हितग्राही के नाम पर राशि निकाले जाने के आरोप से पूरे मामले में भ्रष्टाचार की आशंका और गहरा गई है।
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जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा है। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया जाता तो इतनी बड़ी अनियमितता सामने नहीं आती।
जानकारी के अनुसार संतराम धनुवार मूल रूप से ग्राम पंचायत लाद का निवासी है, लेकिन उसका परिवार वर्तमान में ग्राम पंचायत घुंचापर क्षेत्र में रहकर जीवन यापन कर रहा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शासन द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण और निर्धारित मानकों के अनुसार हो, लेकिन यहां नियम-कायदों को ताक पर रखकर गरीब हितग्राही के भविष्य के साथ खिलवाड़ किए जाने के आरोप लग रहे हैं।
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जांच और कार्रवाई की मांग तेज
ग्रामीणों एवं सामाजिक लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही मांग की गई है कि पीड़ित संतराम धनुवार को गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराया जाए तथा आर्थिक सहायता देकर सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर दिया जाए।
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सीईओ ने कहा – “तत्काल जांच करवाऊंगा”
इस गंभीर मामले को लेकर जब पोड़ी उपरोड़ा जनपद पंचायत के सीईओ जयप्रकाश डडसेना से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि मामला गंभीर है और इसकी तत्काल जांच कराई जाएगी।
उन्होंने बताया कि पहले फाइल देखकर यह स्पष्ट किया जाएगा कि आवास किस पंचायत में स्वीकृत हुआ है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि शिकायत सही पाई गई तो संबंधित आवास की जिओ टैगिंग नहीं की जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी और गरीब दिव्यांग हितग्राही को न्याय मिलेगा, या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस मामले को लेकर भारी नाराजगी और आक्रोश का माहौल है।
