विहिप नेता प्रिंस गौड़ प्रकरण: पीलीभीत की ADM ऋतु पूनिया हटाई गईं, शासन ने लखनऊ मुख्यालय से जोड़ा

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✍️ भागीरथी यादव

 

 

पीलीभीत। उत्तर प्रदेश शासन ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए पीलीभीत की ADM (वित्त एवं राजस्व) ऋतु पूनिया को उनके पद से हटा दिया है। उन्हें देर रात आदेश जारी कर लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया। उनकी जगह प्रसून द्विवेदी को नया ADM (वित्त एवं राजस्व) नियुक्त किया गया है। प्रसून द्विवेदी अब तक मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण में विशेष कार्याधिकारी (OSD) के रूप में तैनात थे।

 

यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है जब विहिप (VHP) संगठन मंत्री प्रिंस गौड़ की गिरफ्तारी को लेकर संघ परिवार और हिंदू संगठनों में भारी नाराज़गी फैल गई थी।

 

 

🔹 पृष्ठभूमि: मजार निर्माण को लेकर हुआ था विवाद

 

विहिप नेता प्रिंस गौड़ ने कुछ दिन पहले शहर की एक कॉलोनी में निर्माणाधीन मजार का विरोध किया था। उनका आरोप था कि ADM ऋतु पूनिया कॉलोनाइजर को संरक्षण दे रही थीं। इस मामले की शिकायत प्रिंस ने बरेली मंडलायुक्त से की थी और ADM के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

 

इसी विवाद के बाद ADM ऋतु पूनिया ने प्रिंस गौड़ पर रंगदारी मांगने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने 8 नवंबर को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया।

 

 

 

🔹 हिंदू संगठनों का विरोध और शासन की सख्ती

 

प्रिंस गौड़ की गिरफ्तारी के बाद विहिप, बजरंग दल और संघ परिवार से जुड़े संगठनों ने जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कई स्थानों पर प्रदर्शन हुए और ADM पर कार्रवाई की मांग की गई। इसी विरोध के बीच शासन ने देर रात कार्रवाई करते हुए ADM ऋतु पूनिया को हटा दिया।

 

 

 

🔹 ADM ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बताया झूठा

 

ADM ऋतु पूनिया ने सभी आरोपों से इंकार करते हुए कहा था कि,

 

> “मेरे ऊपर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। न तो धारा 80 और न ही स्टांप शुल्क मेरे अधिकार क्षेत्र में आते हैं। प्रिंस गौड़ ने धमकी दी, मेरी छवि खराब करने की कोशिश की।”

 

 

 

उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें गिरोह से हमले का डर है और प्रशासन को सुरक्षा की मांग की थी।

 

 

 

🔹 अब नए ADM बने प्रसून द्विवेदी

 

ADM ऋतु पूनिया की जगह प्रसून द्विवेदी को पीलीभीत का नया ADM (वित्त एवं राजस्व) बनाया गया है। वे इससे पहले मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण में OSD के रूप में कार्यरत थे।

 

 

 

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन और हिंदू संगठनों के बीच टकराव का माहौल पैदा कर दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि शासन की इस कार्रवाई के बाद विवाद शांत होता है या नया मोड़ लेता है।