✍️ भागीरथी यादव
अनिल द्विवेदी ने कहा—“विद्युत जनता की मूलभूत आवश्यकता, निजी मुनाफे का माध्यम नहीं”
कोरबा, 27 अगस्त 2026।
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन ने छत्तीसगढ़ के रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद एवं अभनपुर तहसीलों में विद्युत वितरण का कार्य निजी कंपनी को सौंपे जाने के प्रस्ताव का पुरजोर विरोध किया है। संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष अनिल द्विवेदी ने इस संबंध में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग, रायपुर के अध्यक्ष को विस्तृत आपत्ति पत्र प्रस्तुत कर प्रस्तावित विद्युत वितरण लाइसेंस की प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की है।
जनता यूनियन ने कहा है कि समाचार पत्रों एवं सार्वजनिक माध्यमों से यह जानकारी सामने आई है कि टाटा पावर द्वारा उक्त क्षेत्रों में विद्युत वितरण का कार्य करने के लिए लाइसेंस प्राप्त करने हेतु आयोग के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया है तथा आगामी 01 अक्टूबर को इस संबंध में जनसुनवाई प्रस्तावित है। संगठन ने जनसुनवाई में अपना पक्ष रखने के लिए पूर्ण एवं प्रभावी अवसर दिए जाने की भी मांग की है।
अनिल द्विवेदी ने कहा कि विद्युत केवल व्यापार अथवा लाभ कमाने की वस्तु नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों, किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों, उद्योगों, अस्पतालों, विद्यालयों तथा सिंचाई एवं पेयजल जैसी आवश्यक सेवाओं की आधारभूत जरूरत है। ऐसे में विद्युत वितरण जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा को केवल व्यावसायिक लाभ के दृष्टिकोण से संचालित करना व्यापक जनहित के अनुरूप नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि निजी कंपनी के प्रवेश से भविष्य में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ने, सार्वजनिक विद्युत कंपनियों की भूमिका एवं कार्यक्षेत्र सीमित होने तथा विद्युत कर्मचारियों एवं अधिकारियों के रोजगार, सेवा शर्तों, पदोन्नति, स्थानांतरण एवं सामाजिक सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका है।
जनता यूनियन ने यह भी सवाल उठाया है कि निजी कंपनियां आर्थिक रूप से लाभकारी क्षेत्रों को प्राथमिकता दे सकती हैं, जिससे ग्रामीण, गरीब एवं कम राजस्व वाले क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति एवं उपभोक्ता सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना बनी रहेगी।
“यदि वर्तमान विद्युत वितरण व्यवस्था में कोई कमी है तो उसका समाधान निजीकरण नहीं, बल्कि सार्वजनिक विद्युत व्यवस्था को मजबूत करना है।” अनिल द्विवेदी ने कहा कि वितरण हानि कम करने, आधुनिक तकनीक अपनाने, पुराने विद्युत ढांचे के उन्नयन, पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने, वित्तीय संसाधन बढ़ाने तथा बेहतर प्रबंधन एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता यूनियन का विरोध किसी व्यक्ति अथवा निजी कंपनी विशेष के विरुद्ध नहीं है, बल्कि विद्युत वितरण व्यवस्था के निजीकरण की नीति के विरुद्ध है। संगठन का उद्देश्य प्रदेश के लाखों विद्युत उपभोक्ताओं तथा विद्युत कर्मचारियों के हितों की रक्षा करते हुए सार्वजनिक विद्युत व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना है।
जनता यूनियन ने आयोग से मांग की है कि टाटा पावर के प्रस्ताव का व्यापक जनहित एवं उपभोक्ता हित के दृष्टिकोण से पुनः परीक्षण किया जाए, निजी कंपनी को विद्युत वितरण लाइसेंस देने की प्रक्रिया निरस्त की जाए तथा कर्मचारियों एवं अधिकारियों के हितों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का विस्तृत अध्ययन कराया जाए।
अनिल द्विवेदी ने कहा कि “विद्युत व्यवस्था जनता की मूलभूत आवश्यकता है, इसे केवल निजी मुनाफे का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि जनता यूनियन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से विद्युत क्षेत्र के निजीकरण का विरोध जारी रखेगी और जनहित एवं कर्मचारी हितों की रक्षा के लिए हर उचित मंच पर अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।
