मछुआरा नीति 2022 के विरोध में राज्य स्तरीय महासम्मेलन 24 मई को बुका में आयोजित होगा

जल-जंगल-जमीन पर आदिवासी अधिकारों की रक्षा को लेकर जुटेंगे विभिन्न जलाशयों के विस्थापित समुदाय

 

सुशील जायसवाल

 

कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा :-

मत्स्य नीति 2022 के विरोध एवं जल-जंगल-जमीन पर आदिवासी अधिकारों की रक्षा हेतु 24 मई 2026, दिन रविवार को ग्राम बुका, तहसील पोड़ी उपरोड़ा, जिला कोरबा में राज्य स्तरीय विशाल महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

यह महासम्मेलन हसदेव (मिनीमाता बांगो) जलाशय सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न जलाशयों से जुड़े विस्थापित आदिवासी, पारंपरिक मछुआरा समुदाय एवं मत्स्य समितियों द्वारा आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि राज्य सरकार की मत्स्य नीति 2022 के कारण वर्षों से जलाशयों पर निर्भर विस्थापित समुदायों के पारंपरिक अधिकारों की अनदेखी हो रही है और जल संसाधनों को बाहरी ठेकेदारों को सौंपा जा रहा है।

 

आयोजकों के अनुसार इससे स्थानीय विस्थापित आदिवासी समुदाय अपने ही जल क्षेत्र में मजदूर बनने को मजबूर हो गए हैं। उन्होंने बताया कि यह नीति अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 तथा पेसा कानून की भावना के विपरीत है। ग्राम सभा की सहमति के बिना जल, जंगल एवं प्राकृतिक संसाधनों को ठेका प्रणाली में देना संवैधानिक अधिकारों पर सीधा आघात बताया गया है।

 

महासम्मेलन में छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत मुख्य रूप से उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा विभिन्न जलाशयों से विस्थापित समुदायों, मछुआरा समितियों, सामाजिक संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों की भागीदारी होगी।

 

महासम्मेलन की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं –

• मत्स्य नीति 2022 में तत्काल संशोधन किया जाए।

• जलाशयों की ठेका प्रणाली समाप्त की जाए।

• विस्थापित आदिवासी एवं स्थानीय मछुआरा समितियों को अधिकार दिया जाए।

 

कार्यक्रम का आयोजन “विस्थापित आदिवासी हसदेव जलाशय संघर्ष समिति” द्वारा किया जा रहा है। आयोजकों में दीपक मंड़वार, भारत सिदार,फिरतू बिंझवार, कृष्णा कुमार, सुरसराय मंड़वार, रविंद्र सिदार, चैन सिंह, धनसाय एवं तेजराम शामिल हैं।