सुशील जायसवाल
पंडो समुदाय और ग्रामीणों ने उठाई आवाज, उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज; डीएफओ बोले– जांच कराई जाएगी
लैंगा/पसान। कटघोरा वन मंडल अंतर्गत पसान वन परिक्षेत्र के लैंगा परिक्षेत्र में साल वृक्षों की कथित अवैध कटाई और लकड़ी तस्करी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पंडो समुदाय के लोगों ने वन विभाग के कुछ कर्मचारियों पर संरक्षण देकर जंगलों की अंधाधुंध कटाई कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
ग्रामीणों के अनुसार चंद्रौटी के शीतल डबरी एवं आसपास के वन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में साल सहित अन्य बहुमूल्य वृक्षों की कटाई की गई है। आरोप है कि कटाई की गई लकड़ियों को बाहरी क्षेत्रों में भेजा जा रहा है। इस मामले में परिक्षेत्र सहायक उषा सोनवानी और वनरक्षक रामकुमार कोराम के नाम सामने आए हैं, हालांकि आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जंगल बचाने वाले ही कटाई के संरक्षक?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर जंगलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, उन्हीं की मिलीभगत से वर्षों से वन संपदा का दोहन हो रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि बिना विभागीय संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर कटाई और परिवहन संभव नहीं है। उनका कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से तस्करों के हौसले बढ़े हैं।

पंडो समुदाय ने उठाई आवाज
आश्रित ग्राम पंडोपारा निवासी इतवार सिंह पंडो ने करीब दो माह पहले कटघोरा वन मंडलाधिकारी को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया था कि उनकी काबिज भूमि से अवैध रूप से पेड़ों की कटाई कर लकड़ियों को अन्य जिलों में भेजा गया। शिकायत में संबंधित कर्मचारियों के नामों का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी। लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।

चार वर्षों से जारी है खेल?
ग्रामीणों का आरोप है कि लैंगा परिक्षेत्र में पिछले चार वर्षों से लकड़ी तस्करों और कुछ वनकर्मियों की कथित मिलीभगत से अवैध कटाई का सिलसिला जारी है। रेशम बाई पंडो, बृज कुंवर, गंगाराम, उर्मिला, गीताबाई, रामनरेश और इतवार सिंह पंडो सहित कई ग्रामीणों ने विभिन्न अधिकारियों को शिकायत सौंपकर जांच और कार्रवाई की मांग की है।
सरपंच प्रतिनिधि का आरोप – समझौते का बनाया गया दबाव
ग्राम पंचायत चंद्रौटी के सरपंच प्रतिनिधि मोतीलाल मरकाम ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि पंचवटी जंगल क्षेत्र में बड़ी संख्या में साल वृक्षों की कटाई की सूचना मिलने पर उन्होंने इसकी जानकारी वन विभाग को दी थी। उनका आरोप है कि जांच के लिए जाने के दौरान उन्हें रास्ते में रोककर मामले को आगे न बढ़ाने और समझौते का प्रस्ताव दिया गया।
मोतीलाल मरकाम ने कहा कि ग्राम पंचायत जंगलों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी कीमत पर अवैध कटाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
“जंगल हमारी धरोहर हैं। यदि अवैध कटाई हुई है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
— मोतीलाल मरकाम, सरपंच प्रतिनिधि, ग्राम पंचायत चंद्रौटी
वायरल वीडियो ने बढ़ाया दबाव
मामले से जुड़ा कथित वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने स्वतंत्र जांच टीम गठित कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र के शेष जंगल भी खतरे में पड़ सकते हैं।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
अवैध कटाई की उच्चस्तरीय जांच।
वायरल वीडियो की तकनीकी एवं विभागीय जांच।
दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई।
लकड़ी तस्करी रोकने विशेष अभियान।
शिकायतकर्ताओं और पंडो समुदाय को सुरक्षा।
डीएफओ ने दिए जांच के संकेत
कटघोरा वन मंडलाधिकारी कुमार निशांत ने कहा कि मामले की जानकारी उन्हें पहले भी मिल चुकी है। उन्होंने बताया कि वायरल वीडियो में लोगों की पहचान स्पष्ट नहीं हो रही है, फिर भी पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।
“इस मामले की जानकारी पहले भी मुझे मिल चुकी है। वीडियो में लोगों की तस्वीर स्पष्ट नहीं दिख रही है। मामले की जांच कराई जाएगी।”
— कुमार निशांत, डीएफओ कटघोरा
फिलहाल आरोपों और वायरल वीडियो की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी, लेकिन इस प्रकरण ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और जंगलों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
