✍️ भागीरथी यादव
ढोल बजाओ, प्रबंधन जगाओ’ अभियान के तहत कोरबा में सैकड़ों विद्युतकर्मियों का शक्ति प्रदर्शन, OPS से लेकर नियमितीकरण तक मांगों पर गरजे कर्मचारी
कोरबा, 08 जून। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन के बैनर तले सोमवार को मुख्य अभियंता कार्यालय, कोरबा पश्चिम (उत्पादन) परिसर में कर्मचारियों का आक्रोश खुलकर सामने आया। अपनी लंबित मांगों को लेकर यूनियन ने प्रदेशव्यापी “ढोल बजाओ, प्रबंधन जगाओ” अभियान के तहत विशाल प्रदर्शन किया, जिसमें सैकड़ों नियमित, संविदा एवं ठेका कर्मचारियों ने भाग लेकर प्रबंधन के खिलाफ जोरदार हुंकार भरी।

ढोल-नगाड़ों की गूंज, जोशीली नारेबाजी और पैदल रैली के बीच कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, संविदा कर्मियों के नियमितीकरण, ठेका प्रथा की समाप्ति, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती तथा वेज रिवीजन सहित कई महत्वपूर्ण मांगों को लेकर प्रबंधन का ध्यान आकर्षित किया।

सभा के बाद प्रांताध्यक्ष अनिल द्विवेदी, मुख्य अतिथि पी.के. पाठक एवं केंद्रीय पर्यवेक्षक ए.जे. सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने विद्युत कंपनी के अध्यक्ष सुबोध कुमार सिंह (आईएएस) के नाम मुख्य अभियंता को ज्ञापन सौंपा।
वादाखिलाफी से बढ़ रहा कर्मचारियों का आक्रोश
सभा को संबोधित करते हुए प्रांताध्यक्ष अनिल द्विवेदी ने कहा कि कर्मचारियों से किए गए वादों को पूरा करने में लगातार देरी हो रही है, जिससे कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
6 हजार से अधिक रिक्त पदों पर भर्ती नहीं, व्यवस्था पर संकट
मुख्य अतिथि पी.के. पाठक ने कहा कि कर्मचारियों को अपनी आवाज सुनाने के लिए प्रतीकात्मक आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने विद्युत कंपनियों में छह हजार से अधिक रिक्त पदों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि नियमित भर्ती नहीं होने से उत्पादन एवं वितरण व्यवस्था प्रभावित हो रही है तथा मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ रहा है।
‘ढोल सिर्फ प्रतीक है, असली दर्द उपेक्षा का है’
केंद्रीय पर्यवेक्षक ए.जे. सिंह ने कहा कि ढोल बजाना केवल विरोध का प्रतीक है। वास्तविकता यह है कि कर्मचारी स्वयं को उपेक्षित और शोषित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज भी विद्युतकर्मियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।
अंबिकापुर से बस्तर तक गूंजेगा आंदोलन
प्रांतीय उपाध्यक्ष सम्मेलाल श्रीवास ने कहा कि कर्मचारियों की एकजुटता यह संकेत है कि आंदोलन अब प्रदेशव्यापी स्वरूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि अंबिकापुर से शुरू हुई यह लड़ाई बस्तर तक पहुंचेगी और तब तक जारी रहेगी जब तक कर्मचारियों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता।
जनप्रतिनिधियों के बाद अब प्रबंधन पर दबाव
यूनियन ने बताया कि मई 2026 में प्रथम चरण के तहत “जनप्रतिनिधि संपर्क अभियान” चलाकर प्रदेश के 65 से अधिक विधायक, मंत्री एवं सांसदों को ज्ञापन सौंपा जा चुका है। अब दूसरे चरण में प्रदेशभर के क्षेत्रीय मुख्य अभियंताओं को ज्ञापन देकर कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत कराया जा रहा है।
कार्यक्रम में कोरबा, कटघोरा, पाली सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए। सभा को टी.पी. गुप्ता, वेदराम निर्मलकर, ओमप्रकाश सूर्यवंशी, संजय कौशिक, गेंदराम साहू, लक्ष्मी प्रसाद यादव सहित अनेक वक्ताओं ने संबोधित किया।
मुख्य मांगें
पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
संविदा कर्मियों का नियमितीकरण
ठेका प्रथा की समाप्ति
प्रीमियम रहित कैशलेस चिकित्सा सुविधा
रिक्त पदों पर नियमित भर्ती
1 अप्रैल 2026 से वेज रिवीजन हेतु समिति गठन
1320 मेगावाट विद्युत परियोजना में स्थानीय युवाओं को रोजगार
तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों के लिए करियर प्रोग्रेशन योजना लागू करना
कर्मचारियों के इस शक्ति प्रदर्शन ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो विद्युत विभाग में आंदोलन की आंच और तेज हो सकती है।
