✍️ भागीरथी यादव
धमतरी, 16 जून। अपराध अनुसंधान को वैज्ञानिक, सटीक और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से धमतरी पुलिस द्वारा मंगलवार को कम्पोजिट भवन धमतरी में आईएसएस (Investigation Support System) प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार के निर्देशन एवं उपस्थिति में संपन्न हुआ।
कार्यशाला में जिले के सभी थाना एवं चौकियों से चयनित विवेचक अधिकारी और पुलिस कर्मचारी शामिल हुए। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पुलिस बल को डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी रूप से दक्ष बनाना था। इस दौरान डिजिटल साक्ष्यों के संकलन, संरक्षण और विश्लेषण के साथ-साथ सीसीटीवी कैमरा, डीवीआर/एनवीआर सिस्टम, मोबाइल फोन एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त साक्ष्यों के प्रभावी उपयोग की जानकारी दी गई।
सायबर एवं आईटी विशेषज्ञ आशुतोष दुबे और उनकी टीम ने प्रतिभागियों को डिजिटल एविडेंस की उपयोगिता, डेटा रिकवरी, सीसीटीवी फुटेज संरक्षण, तकनीकी विश्लेषण तथा न्यायालयीन प्रक्रिया में डिजिटल साक्ष्यों की स्वीकार्यता पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। साथ ही विभिन्न डिजिटल उपकरणों का लाइव डेमो भी प्रस्तुत किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तरी सत्र में उत्कृष्ट जवाब देने वाले चार पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत किया गया, जबकि तीन कर्मियों को गलत जवाब देने पर प्रतीकात्मक दंड भी दिया गया, जिससे प्रशिक्षण को अधिक सहभागितापूर्ण बनाया जा सके।
अपने संबोधन में एसपी सूरज सिंह परिहार ने कहा कि आधुनिक पुलिसिंग में डिजिटल साक्ष्य अपराध अनुसंधान का मजबूत आधार बन चुके हैं। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान और तकनीकी कौशल का उपयोग दैनिक विवेचना कार्यों में करने का आह्वान किया, ताकि जांच अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और साक्ष्य-आधारित हो सके।
कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र कुमार पांडेय, नगर पुलिस अधीक्षक अभिषेक चतुर्वेदी, डीएसपी भानूप्रताप चंद्राकर, मोनिका मरावी, मीना साहू, यशकरण दीप ध्रुव, रक्षित निरीक्षक दीपक शर्मा सहित जिले के पुलिस अधिकारी, विवेचक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
धमतरी पुलिस के अनुसार ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से पुलिस बल की तकनीकी क्षमता को मजबूत कर जिले में वैज्ञानिक एवं परिणाममुखी पुलिसिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
