*वन विभाग की नीतियों के* *खिलाफ वन कर्मचारी* *संघ का मोर्चा,* *सेवानिवृत्त कर्मचारियों की* *पुनर्नियुक्ति और* *बायोमेट्रिक व्यवस्था का किया* *कड़ा विरोध*

 

*बेरोजगार युवाओं के हक पर* *डाका डालने का आरोप,* *मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदेशव्यापी आंदोलन* *और कार्य* *बहिष्कार की चेतावनी*

*सुशील जायसवाल*

*रायपुर/कोरबा।*

 

छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ ने वन विभाग की वर्तमान नीतियों एवं हाल ही में प्रस्तावित व्यवस्थाओं को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अजीत दुबे ने बुधवार को जारी एक महत्वपूर्ण प्रेस विज्ञप्ति में विभाग द्वारा रिक्त पदों पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पुनः नियोजित करने के प्रस्ताव तथा मैदानी कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने के निर्णय को अव्यावहारिक और कर्मचारी विरोधी बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है।

प्रदेश अध्यक्ष अजीत दुबे ने कहा कि वन विभाग में वर्तमान समय में हजारों पद रिक्त पड़े हुए हैं। इसके बावजूद विभाग नई भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करने के बजाय सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा सेवा में लेने की तैयारी कर रहा है। संघ का मानना है कि यह कदम प्रदेश के लाखों शिक्षित बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है तथा रोजगार के अवसरों को सीमित करने वाला निर्णय साबित होगा।

उन्होंने कहा कि सरकार और विभाग को सबसे पहले प्रदेश के योग्य बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। इसके साथ ही वर्षों से वन विभाग में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करने की दिशा में भी ठोस पहल की जानी चाहिए। लेकिन इसके विपरीत सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव लाना युवाओं और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की उपेक्षा के समान है।

*दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों* *को मिले* *प्राथमिकता*

वन कर्मचारी संघ ने मांग की है कि विभाग में रिक्त पड़े सभी पदों पर शीघ्र सीधी भर्ती निकाली जाए, ताकि प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को रोजगार का अवसर मिल सके। साथ ही लंबे समय से विभाग में सेवाएं दे रहे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर नियमित पदों पर समायोजित किया जाए।

संघ का कहना है कि वर्षों से कठिन परिस्थितियों में कार्य कर रहे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने विभागीय कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे कर्मचारियों को नियमितीकरण का लाभ मिलना चाहिए, न कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पुनः नियुक्ति देकर उनके अवसरों को प्रभावित किया जाना चाहिए।

*बायोमेट्रिक उपस्थिति को बताया जमीनी हकीकत* *से दूर*

प्रदेश अध्यक्ष अजीत दुबे ने वनरक्षक, वनपाल एवं उपवनक्षेत्रपाल जैसे मैदानी अमले के लिए लागू की जा रही बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली पर भी गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि वन विभाग के मैदानी कर्मचारी दिन-रात जंगलों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। उनकी ड्यूटी किसी कार्यालय तक सीमित नहीं होती, बल्कि घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों तथा नेटवर्क विहीन इलाकों में लगातार बनी रहती है।

उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा, जंगलों की निगरानी, अवैध कटाई पर रोक, वन तस्करों की धरपकड़ और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी परिस्थितियों में कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए निश्चित समय पर मुख्यालय पहुंचकर बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराना व्यावहारिक नहीं है। इससे कर्मचारियों के कार्य प्रभावित होंगे और उनके मनोबल पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा ।

*वन सुरक्षा कार्यों पर पड़* *सकता है असर*

संघ का कहना है कि वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली अन्य विभागों से अलग होती है। कई बार कर्मचारियों को जंगलों में घंटों और दिनों तक निगरानी करनी पड़ती है। वन्यजीवों की गतिविधियों तथा अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए उन्हें चौबीसों घंटे सतर्क रहना पड़ता है। ऐसे में बायोमेट्रिक उपस्थिति जैसी व्यवस्था उनके लिए अतिरिक्त दबाव पैदा करेगी और वन संरक्षण कार्यों की प्रभावशीलता भी प्रभावित हो सकती है।

*सरकार से मांगों पर तत्काल* *निर्णय लेने की* *अपील*

छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ ने सरकार एवं विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पुनर्नियोजन संबंधी प्रस्ताव को तत्काल निरस्त किया जाए तथा रिक्त पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए। साथ ही विभाग में लंबे समय से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।

संघ ने यह भी मांग की है कि वनरक्षक, वनपाल एवं उपवनक्षेत्रपाल जैसे मैदानी कर्मचारियों के लिए लागू की जा रही बायोमेट्रिक उपस्थिति संबंधी निर्देशों को वापस लिया जाए और उनकी कार्य परिस्थितियों के अनुरूप व्यवहारिक व्यवस्था लागू की जाए।

*आंदोलन और कार्य बहिष्कार* *की चेतावनी*

प्रदेश अध्यक्ष अजीत दुबे ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि संघ की इन जायज मांगों पर सरकार और विभाग द्वारा सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया तथा बेरोजगार युवाओं, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों और वन कर्मचारियों के हितों की अनदेखी जारी रही, तो छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होगा। आवश्यकता पड़ने पर कार्य बहिष्कार जैसे कदम भी उठाए जाएंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और विभागीय प्रशासन की होगी।

वन कर्मचारी संघ की इस चेतावनी के बाद वन विभाग की प्रस्तावित नीतियों को लेकर कर्मचारियों और बेरोजगार युवाओं के बीच चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें शासन और विभाग के आगामी निर्णय पर टिकी हुई हैं।