लोक पर्व भोजली की रही धुन

✍️ भागीरथी यादव

 

महापौर के उपस्थिति में हुआ कार्यक्रम

 

कोरबा। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत को समर्पित प्रदेश स्तरीय भोजली महोत्सव-2026 का आयोजन शनिवार को घंटाघर स्थित ओपन थिएटर में उत्साह और उल्लास के साथ हुआ। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना जिला कोरबा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहरवासी शामिल हुए। भोजली गीतों और पारंपरिक रंगों से पूरा वातावरण छत्तीसगढ़ी संस्कृति की खुशबू से सराबोर रहा।

 

महोत्सव का प्रमुख आकर्षण भव्य भोजली शोभायात्रा रही। शोभायात्रा में पारंपरिक परिधान में शामिल लोगों ने लोक संस्कृति की जीवंत प्रस्तुति दी। भोजली गीतों की गूंज के बीच निकली यात्रा ने शहरवासियों का ध्यान आकर्षित किया। आयोजन में विभिन्न समाज और वर्ग के लोगों की भागीदारी देखने को मिली, जिसने सामाजिक सौहार्द और एकजुटता की मिसाल पेश की।

 

कार्यक्रम में महापौर संजू देवी राजपूत विशेष रूप से शामिल हुईं। आयोजकों एवं उपस्थित लोगों ने उनका स्वागत किया। महापौर ने भोजली महोत्सव की सराहना करते हुए कहा कि भोजली पर्व छत्तीसगढ़ की लोक आस्था और ग्रामीण जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह पर्व लोगों के बीच प्रेम, भाईचारे और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करता है।

 

उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखना बेहद जरूरी है। नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। छत्तीसगढ़ की लोक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करना चाहिए।

 

महोत्सव में नगर निगम सभापति नूतन सिंह ठाकुर, एल्डरमैन दीपक यादव, रामकुमार ठाकुर, दिलीप मिरी, धीरेंद्र साहू, अतुलदास महंत और एलएच टोप्पो सहित छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में शहर के नागरिकों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

 

लोक परंपरा के साथ एकजुटता का संदेश

 

भोजली शोभायात्रा के दौरान छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति के साथ सामाजिक एकजुटता भी दिखाई दी। लोगों ने उत्साह के साथ भोजली पर्व में सहभागिता निभाई। लोकगीतों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच आयोजित महोत्सव ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया।

 

आयोजकों का कहना रहा कि भोजली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की माटी, लोक आस्था और आपसी प्रेम का प्रतीक है। महोत्सव के माध्यम से स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने का प्रयास किया गया।