कोरबी से सुशील जयसवाल की रिपोर्ट
मजदूरों की बहाली और स्थानीय प्रभावितों को रोजगार देने की मांग, 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन तालाबंदी व हड़ताल की चेतावनी
कोरबा। एसईसीएल के चिरमिरी क्षेत्र अंतर्गत रानी अटारी एवं विजय वेस्ट भूमिगत खदानों में रोजगार का मुद्दा गरमा गया है। आउटसोर्सिंग कंपनी जेएमएस द्वारा 32 कर्मचारियों की हाजिरी बंद कर उन्हें काम से बैठाए जाने का आरोप लगाते हुए प्रभावित मजदूरों ने नाराजगी जताई है। वहीं, खदान प्रभावित गांवों के लोगों को रोजगार देने की मांग भी तेज हो गई है। मांगें पूरी नहीं होने पर प्रभावित पक्ष ने 13 अक्टूबर 2026 से दोनों खदानों में अनिश्चितकालीन तालाबंदी और हड़ताल की चेतावनी दी है।
प्रबंधन को सौंपे गए ज्ञापन में प्रभावित कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि बिना किसी गलती और उचित नोटिस के उनकी हाजिरी बंद कर काम से अलग कर दिया गया है। उन्होंने सभी 32 कर्मचारियों को तत्काल काम पर वापस लेने तथा काम से दूर रखे गए दिनों का नियमानुसार भुगतान करने की मांग की है। मजदूरों का कहना है कि अचानक रोजगार छिनने से उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
स्थानीय प्रभावितों को रोजगार देने की मांग
ज्ञापन में रानी अटारी एवं विजय वेस्ट खदानों से प्रभावित आसपास के गांवों के लोगों को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग भी उठाई गई है। प्रभावित पक्ष का आरोप है कि स्थानीय बेरोजगारों और खदान प्रभावित परिवारों को रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं, जबकि बाहर से कर्मचारियों को लाकर काम पर लगाए जाने की बात सामने आ रही है।
प्रभावितों ने बताया कि कई लोगों का वेलफेयर ट्रेनिंग सेंटर (वीटीसी) के माध्यम से प्रशिक्षण कराया गया है। इसके बावजूद प्रशिक्षित स्थानीय लोगों को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार नहीं मिलने की शिकायत है। उन्होंने प्रबंधन से पात्र प्रभावितों की सूची तैयार कर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
13 अक्टूबर से आंदोलन की चेतावनी
प्रभावित पक्ष ने स्पष्ट किया है कि यदि 32 कर्मचारियों की बहाली, बकाया अवधि के भुगतान और वीटीसी प्रशिक्षित प्रभावितों को रोजगार देने की मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो 13 अक्टूबर 2026 से रानी अटारी एवं विजय वेस्ट भूमिगत खदानों में अनिश्चितकालीन तालाबंदी और हड़ताल शुरू की जाएगी।
प्रभावितों का कहना है कि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो खदानों का कामकाज प्रभावित हो सकता है। अब निगाहें एसईसीएल प्रबंधन और संबंधित आउटसोर्सिंग कंपनी की पहल पर टिकी हैं। यदि बातचीत के जरिए मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो रोजगार का यह विवाद बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
