कोरबा : कुसमुंडा खदान बंद करने की चेतावनी, 4 नवंबर को कोयला परिवहन रोकने का ऐलान देखें वीडियो…..

✍️ भागीरथी यादव

 

रोजगार की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ किसान सभा ने कलेक्टर और एसईसीएल प्रबंधन को सौंपा ज्ञापन, स्थानीय बेरोजगारों को प्राथमिकता देने की मांग

 

कोरबा। कुसमुंडा क्षेत्र में आउटसोर्सिंग कंपनियों में स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार देने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ किसान सभा ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने जिला कलेक्टर और एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपकर रोजगार संबंधी समस्याओं के निराकरण की मांग की है। मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होने की स्थिति में 4 नवंबर 2026 को कुसमुंडा खदान बंद करने और कोयला परिवहन बाधित करने की चेतावनी दी गई है।

छत्तीसगढ़ किसान सभा के अनुसार, एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के खदान विस्तार के लिए पूर्व में और वर्तमान में कई गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है। इसके बावजूद प्रभावित गांवों के बेरोजगारों को आउटसोर्सिंग कंपनियों में प्राथमिकता के आधार पर रोजगार नहीं मिल पा रहा है। संगठन ने आरोप लगाया कि स्थानीय युवाओं की अनदेखी कर दूसरे जिलों और राज्यों के लोगों को रोजगार दिया जा रहा है, जबकि प्रभावित क्षेत्र के युवा नौकरी के लिए भटक रहे हैं।

 

ज्ञापन में कहा गया है कि आउटसोर्सिंग कंपनियों में 70 और 30 प्रतिशत रोजगार के प्रावधान का कथित रूप से पालन नहीं किया जा रहा है। संगठन ने इस व्यवस्था को समाप्त कर जिन गांवों की जमीन खदान विस्तार के लिए अधिग्रहित की गई है, वहां के प्रभावित बेरोजगारों को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग की है। साथ ही, प्रभावित जिले के बेरोजगारों को शत-प्रतिशत रोजगार उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई है।

 

किसान सभा ने यह भी मांग की है कि आउटसोर्सिंग कंपनियों का काम समाप्त होने के बाद नई कंपनियों के आने पर पुराने कर्मचारियों को दोबारा काम पर रखा जाए। ज्ञापन में गोदावरी कंपनी बंद होने के कारण जिले के सैकड़ों कर्मचारियों के बेरोजगार होने का मुद्दा भी उठाया गया है।

 

संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर समय रहते सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो 4 नवंबर को कुसमुंडा खदान बंद करने के साथ कुसमुंडा थाना क्षेत्र, बालमपुर और सर्वमंगला मंदिर के पास से गुजरने वाले कोयला परिवहन मार्ग को बाधित कर आंदोलन किया जाएगा। किसान सभा ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन की जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी।

 

ज्ञापन छत्तीसगढ़ किसान सभा की ओर से जिला प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन को सौंपा गया है। इसमें स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार देने, प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा करने और आउटसोर्सिंग कंपनियों में रोजगार संबंधी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग की गई है।